Chauth Chandra 2026: चौठचंद्र का पर्व सोमवार 14 सितंबर 2026 को मनाया जा रहा है। मिथिला पंचांग के अनुसार इस दिन मणिकांचन योग का संयोग बताया गया है। ज्योतिषाचार्य डॉ. रतन कुमार मिश्र के अनुसार इस अवसर पर किए गए उपाय संतान के चंद्र संबंधी दोष कम करने से जुड़े माने जाते हैं। उन्होंने मानसिक संतुलन, सौम्य स्वभाव और भाग्योन्नति की बात आस्था के रूप में कही। घर के आंगन में अरिपन बनाकर पकवान-फल का भोग और चंद्रोदय पर अर्घ्य देने की लोकपरंपरा है। ये मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक प्रमाण नहीं। कोई उपाय हर कष्ट का निश्चित निवारण नहीं माना जा सकता।
Chauth Chandra 2026: आज चौठचंद्र और मणिकांचन योग
मिथिला क्षेत्र में चौठचंद्र का विशेष स्थान है। इस बार पंचांग के अनुसार मणिकांचन योग जुड़ने से पूजा का महत्व बढ़ने की बात कही गई है। ज्योतिषाचार्य मिश्र ने इसे कई वर्षों की तुलना में अधिक फलदायी बताया। यह ज्योतिषीय और लोक आस्था का दावा है। तारीख और योग पंचांग पर आधारित हैं।
पर्व का पारंपरिक महत्व
मान्यता है कि यह दिन मानसिक संतुलन और मातृ चेतना से जुड़ा है। सौम्य स्वभाव और परिवार की शांति से जोड़कर देखा जाता है। मिथिला की महिलाओं में पूरे दिन उपवास रखने की प्रथा है। शाम को विधि से पूजन होता है। आस्था परिवार और संतान की सुख-शांति से जोड़ी जाती है।
Chauth Chandra 2026: आंगन में अरिपन और भोग
घर के आंगन में पिठार यानी चावल के पेस्ट और सिंदूर से अरिपन बनाया जाता है। यह लोक कला की परंपरा है। उसी पर चंद्र देव को पकवान और फल का भोग लगाया जाता है। परिवार के सदस्य पूजा में शामिल होते हैं। सादगी और श्रद्धा पर जोर रहता है।
चंद्रोदय पर अर्घ्य
चांद निकलने के बाद चंद्र देव को अर्घ्य देने की मान्यता है। निष्ठा से अर्घ्य देने पर परिवार समृद्ध रहता है, ऐसा लोक विश्वास है। समय स्थानीय चंद्रोदय पर निर्भर करता है। पंचांग या मंदिर की सूचना देख लेना बेहतर है। खुले आकाश में अर्घ्य देने की प्रथा कई घरों में है।
आधा चांद वाला ज्योतिषीय उपाय
डॉ. रतन कुमार मिश्र ने बताया कि चांदी का आधा चांद या दो मोतियों से बना अर्धचंद्र बनाकर पूजन करें। पूजन के बाद उसे लाल धागे में पिरोकर बच्चे को धारण कराया जा सकता है। इसे चंद्र से जुड़े कष्ट कम करने का उपाय बताया गया। यह शास्त्र और ज्योतिष की व्याख्या है, गारंटी नहीं।
चंद्र की स्थिति से जुड़ी मान्यता
ज्योतिषाचार्य के अनुसार कुंडली में कई ग्रह संकट पैदा कर रहे हों तो मजबूत चंद्र उसे शांत कर सकता है। यह ज्योतिष शास्त्र की मान्यता है। व्यक्तिगत कुंडली अलग होती है। सामान्य पर्व उपाय हर बच्चे पर एक जैसा असर नहीं मानना चाहिए। गंभीर चिंता हो तो योग्य ज्योतिष या परिवार परंपरा से सलाह लें।
Chauth Chandra 2026: व्रत और सावधानी
महिलाएं दिन भर उपवास रख शाम पूजन करती हैं। स्वास्थ्य खराब हो तो कठोर व्रत न करें। छोटे बच्चों को जबरन धागा या आभूषण न पहनाएं अगर असुविधा हो। चांदी-मोती साफ और सुरक्षित रखें। आस्था के साथ व्यावहारिक ध्यान जरूरी है।
चौठचंद्र 14 सितंबर को मणिकांचन योग के साथ मिथिला समेत कई इलाकों में मनाया जा रहा है। आंगन में अरिपन, भोग और चंद्रोदय पर अर्घ्य की परंपरा प्रमुख है। ज्योतिषाचार्य रतन कुमार मिश्र ने चांदी के आधे चांद या मोती के अर्धचंद्र का पूजन कर लाल धागे में धारण कराने का उपाय बताया। इसे संतान के चंद्र दोष से जोड़कर देखा जाता है। ये आस्था और ज्योतिषीय विश्वास हैं। सुख-शांति की कामना पूजा का भाव है, निश्चित फल नहीं। स्थानीय पंचांग देखकर समय तय करें और स्वास्थ्य का ख्याल रखें।
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घोषणा: इस खबर में दी गई पूजा तिथि, मुहूर्त और धार्मिक नियम पंचांग एवं प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। पूजा के मुहूर्त में शहर और स्थान के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। पाठकों से अनुरोध है कि पूजा-अनुष्ठान से जुड़ी किसी भी विशेष जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान आचार्य से पुष्टि करें। News Media Kiran किसी धार्मिक मान्यता को व्यक्तिगत या वैज्ञानिक सलाह के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।
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