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Child Sleep Quality: बच्चे की नींद के घंटे ही काफी नहीं, खर्राटे और दिन के व्यवहार पर भी रखें नजर

Child Sleep Quality: माता-पिता अक्सर यही गिनते हैं कि बच्चा कितने घंटे सोया। नींद की गुणवत्ता और रात का पैटर्न भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बार-बार जागना, तेज खर्राटे, मुंह से सांस लेना या सुबह चिड़चिड़ापन नजर आने वाली बातें हैं।

American Academy of Sleep Medicine के अनुसार उम्र के हिसाब से 24 घंटे की नींद अलग-अलग होती है। चार से 12 महीने के शिशु को 12 से 16 घंटे चाहिए। एक से दो वर्ष पर 11 से 14, तीन से पांच वर्ष पर 10 से 13 घंटे उपयुक्त माने गए हैं। छह से 12 वर्ष के बच्चों को 9 से 12 घंटे और किशोरों को 8 से 10 घंटे की सलाह है।

कभी सर्दी में मुंह से सांस आ सकती है। लेकिन लगातार तेज खर्राटे, रुकती-शुरू होती सांस या बार-बार जागना NHLBI के अनुसार स्लीप एपनिया के संभावित संकेत हो सकते हैं। AAP कहता है कि आकलन में घंटों के साथ खर्राटे और सांस के लक्षण भी देखें। परेशानी दोहराए तो कुछ दिन की स्लीप डायरी मददगार रहती है।

Child Sleep Quality: उम्र के हिसाब से कितनी नींद चाहिए

छोटे बच्चे दिन-रात मिलाकर ज्यादा सोते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों की जरूरत घटती जाती है। किशोरावस्था में आठ से दस घंटे पर्याप्त माने गए हैं। ये सीमाएं औसत सलाह हैं। हर बच्चे की दिनचर्या थोड़ी अलग हो सकती है। कमी या अधिकता लगातार दिखे तो पैटर्न नोट करें।

सिर्फ घंटे गिनना क्यों काफी नहीं

रात भर बिस्तर पर रहना अच्छी नींद का सबूत नहीं होता। बार-बार टूटना गुणवत्ता गिरा देता है। सुबह थकान और दिन का मूड रात की असल तस्वीर बताते हैं। घंटे पूरे लगें फिर भी बच्चा सोया-सोया रहे तो जांच जरूरी है। गुणवत्ता घंटों के साथ चलती है।

खर्राटे कब सामान्य और कब चिंता की बात

जुकाम या बंद नाक में अस्थायी खर्राटे आ सकते हैं। समस्या तब है जब आवाज तेज और रोजाना हो। मुंह खुला रखकर सोना भी साथ दिखे तो ध्यान दें। सांस रुकती या हांफती लगे तो इसे हल्के में न लें। NHLBI ऐसे लक्षणों को संभावित स्लीप एपनिया से जोड़ता है।

Child Sleep Quality: मुंह से सांस लेना क्यों नोट करें

कभी-कभार नाक बंद होने पर मुंह से सांस लेना आम है। लगातार ऐसा होना अलग बात है। रात भर मुंह खुला रहना नींद तोड़ सकता है। सुबह सूखा मुंह या बेचैनी भी जुड़ सकती है। लक्षण टिके रहें तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर रहता है।

अगले दिन का व्यवहार क्या बताता है

रात की खराब नींद दिन में दिखाई देती है। जरूरत से ज्यादा झपकी, ध्यान न लगना या चिड़चिड़ापन संकेत हो सकते हैं। व्यवहार अचानक बदले तो सिर्फ अनुशासन न समझें। AAP नींद के आकलन में इन्हीं लक्षणों को शामिल करने को कहता है। पैटर्न लिखकर रखना फायदेमंद है।

Child Sleep Quality: स्लीप डायरी कैसे काम आती है

कुछ दिनों तक सोने और जागने का समय लिखें। रात में कितनी बार जागा यह भी दर्ज करें। दिन की झपकी और अगले दिन का मूड साथ रखें। यह रिकॉर्ड डॉक्टर को समस्या समझने में मदद करता है। अनुमान की जगह तथ्य मिल जाते हैं।

किन बातों को नजरअंदाज न करें

तेज खर्राटे रोजाना आएं तो टालें नहीं। सांस रुकती दिखे तो तुरंत नोट करें। बार-बार जागना और दिन का गुस्सा साथ चलें तो जोड़कर देखें। एक रात की खराबी अलग है। वही क्रम सप्ताह भर चले तो जांच का विषय बनता है।

Child Sleep Quality: घर पर नींद पर नजर रखने का सरल तरीका

सोने का समय स्थिर रखने की कोशिश करें। कमरे में रोशनी और शोर कम रखें। स्क्रीन देर रात तक न चलने दें। डायरी में छोटे-छोटे बदलाव लिखते रहें। ये आदतें पैटर्न साफ दिखाती हैं और जरूरत पड़ने पर बातचीत आसान बनाती हैं।

बच्चे की सेहत के लिए नींद के घंटे जितने जरूरी हैं उतनी ही उसकी गुणवत्ता भी मायने रखती है। चार महीने से किशोरावस्था तक American Academy of Sleep Medicine ने 24 घंटे की अलग-अलग सीमाएं बताई हैं। लगातार खर्राटे, मुंह से सांस और रुकती सांस NHLBI के अनुसार स्लीप एपनिया के संभावित संकेत हो सकते हैं।

AAP सलाह देता है कि घंटों के साथ ये लक्षण और अगले दिन का व्यवहार भी देखें। बार-बार दिक्कत हो तो स्लीप डायरी बनाएं जिसमें सोने-जागने का समय, रात के जागने और दिन का मूड हो। एक-दो रात की गड़बड़ी आम हो सकती है। वही संकेत टिके रहें तो उन्हें हल्के में न लें और विशेषज्ञ से बात करें।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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