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Delhi News: दिल्ली हाई कोर्ट ने रेस कोर्स मस्जिद में नमाज की अनुमति नहीं दी, सुरक्षा कारणों का हवाला

29 अक्टूबर 2026
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Delhi News: दिल्ली हाई कोर्ट ने जयपुर पोलो ग्राउंड परिसर में स्थित रेस कोर्स मस्जिद में नमाज पढ़ने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस अनीश दयाल की अदालत ने नमाजी सैयद अहमद सऊद की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कोर्ट ने प्रवेश की अनुमति नहीं दी। इससे मुस्लिम पक्ष को झटका लगा है। केंद्र सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि याचिका पर अंतिम फैसला होने तक उस स्थल पर कोई तोड़फोड़ नहीं की जाएगी।

यह मामला मस्जिद की सुरक्षा और बिना रुकावट के प्रवेश की मांग से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने तोड़फोड़ के डर के बीच सुरक्षा और प्रवेश बहाल करने की गुहार लगाई थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नमाज की अनुमति नहीं दी।

याचिका में क्या मांग की गई थी और कोर्ट ने क्या कहा?

सैयद अहमद सऊद की याचिका में रेस कोर्स मस्जिद को टूटने से बचाने और प्रवेश स्थल को बहाल करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि मस्जिद में बिना किसी बाधा के नमाज पढ़ने की इजाजत मिलनी चाहिए। उन्होंने सुरक्षा की भी मांग की थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। जस्टिस अनीश दयाल ने केंद्र के वकील को निर्देश लेकर गुरुवार को पेश होने को कहा था।

गुरुवार की सुनवाई में कोर्ट ने सुरक्षा कारणों से प्रवेश और नमाज की अनुमति नहीं दी। अदालत ने माना कि फिलहाल स्थल पर नमाज की इजाजत देना उचित नहीं है। हालांकि कोर्ट ने तोड़फोड़ रोकने के लिए केंद्र के आश्वासन को दर्ज किया। यह फैसला याचिका के अंतिम निपटारे तक लागू रहेगा।

केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड की क्या दलील रही?

केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील आशीष दीक्षित ने कोर्ट को बताया कि उक्त परिसर में एक मस्जिद और एक मंदिर दोनों हैं। फिलहाल इनमें से किसी को ध्वस्त करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि याचिका पर फैसला होने तक कोई तोड़फोड़ नहीं होगी। दीक्षित ने कहा कि वक्फ बोर्ड और याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए प्रतिवेदनों पर संबंधित अधिकारी फैसला करेंगे।

दिल्ली वक्फ बोर्ड के वकील ने बताया कि बोर्ड ने भूमि एवं विकास कार्यालय और अन्य संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रतिवेदन दिया है। बोर्ड ने मस्जिद की सुरक्षा और प्रवेश से जुड़े मुद्दों को उठाया था। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद कोर्ट ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नमाज की इजाजत नहीं दी। केंद्र का आश्वासन याचिका के लंबित रहने तक मस्जिद की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

मामला क्यों पहुंचा हाई कोर्ट और आगे क्या होगा?

यह मामला जयपुर पोलो ग्राउंड परिसर में स्थित रेस कोर्स मस्जिद से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई थी कि मस्जिद को तोड़ा जा सकता है या प्रवेश रोका जा सकता है। इसी आशंका के बीच उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने मंगलवार को नोटिस जारी किया और गुरुवार को सुनवाई की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए नमाज की अनुमति नहीं दी गई।

आगे की सुनवाई में याचिका पर अंतिम फैसला होना बाकी है। तब तक केंद्र का आश्वासन लागू रहेगा कि कोई तोड़फोड़ नहीं होगी। वक्फ बोर्ड और याचिकाकर्ता के प्रतिवेदनों पर अधिकारियों के फैसले का भी इंतजार है। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया है और दोनों पक्षों को अपने तर्क रखने का मौका दिया।

सुरक्षा कारणों को क्यों प्राथमिकता दी गई?

जस्टिस अनीश दयाल ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों से फिलहाल प्रवेश और नमाज की इजाजत देना संभव नहीं है। परिसर की स्थिति और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया। कोर्ट ने माना कि जब तक स्थिति स्पष्ट न हो, नमाज की अनुमति देना उचित नहीं। साथ ही तोड़फोड़ रोकने का आश्वासन दर्ज कर मस्जिद की सुरक्षा का इंतजाम किया गया।

यह फैसला संतुलित माना जा रहा है। एक तरफ नमाज की अनुमति नहीं दी गई, दूसरी तरफ तोड़फोड़ पर रोक लगाई गई। दोनों पक्षों को आगे सुनवाई में अपने तर्क रखने का पूरा अवसर मिलेगा। मामले में भूमि एवं विकास कार्यालय की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि परिसर से जुड़ी कई अनुमतियां उसी से जुड़ी हैं।

इस फैसले का क्या मतलब है और आगे की स्थिति क्या रहेगी?

हाई कोर्ट के इस फैसले से मुस्लिम पक्ष को झटका लगा है, क्योंकि नमाज की इजाजत नहीं मिली। हालांकि केंद्र के आश्वासन से मस्जिद की सुरक्षा बनी हुई है। याचिका लंबित रहने तक कोई तोड़फोड़ नहीं होगी। वक्फ बोर्ड के प्रतिवेदन पर अधिकारियों के फैसले का इंतजार है। आगे की सुनवाई में याचिकाकर्ता और केंद्र दोनों अपने तर्क विस्तार से रख सकते हैं।

यह मामला दिल्ली में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और पहुंच से जुड़े मुद्दों को रेखांकित करता है। कोर्ट ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, जो कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है। दोनों पक्षों को अब अदालत के अगले आदेश का इंतजार है। याचिका का अंतिम फैसला आने तक स्थिति यथावत रहेगी। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को भी कोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा।

कुल मिलाकर दिल्ली हाई कोर्ट का यह आदेश संतुलित दृष्टिकोण अपनाता दिखता है। नमाज की अनुमति सुरक्षा कारणों से नहीं दी गई, लेकिन मस्जिद को किसी भी नुकसान से बचाने का आश्वासन दर्ज किया गया। आगे की सुनवाई में मामले की पूरी स्थिति साफ हो सकती है। दोनों पक्षों को अपने तर्क रखने का पूरा मौका मिलेगा और कोर्ट सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अंतिम फैसला सुनाएगा।

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Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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