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Dussehra 2026: कैसे करें विजयादशमी की पूजा? जानें पूजन विधि, सामग्री और शुभ मुहूर्त

Dussehra 2026: दशहरा (विजयादशमी) को बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व माना जाता है। उत्तर भारत में इसे भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जबकि पूर्वी और दक्षिणी भारत के कई हिस्सों में इसे मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय के रूप में मनाया जाता है।

इस लेख में विजयादशमी की पूजा विधि, पूजा सामग्री, मां अपराजिता की पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त की जानकारी दी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा करने से वर्षभर कार्यों में सफलता की आशा की जाती है।दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:50 बजे शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे समाप्त होगी।

दशहरा पूजा सामग्री क्या-क्या होती है?

विजयादशमी की पूजा के लिए रोली और कुमकुम, अक्षत, हल्दी, मौली, ताजे फूल, फूलों की माला, दीया और घी या तेल, अगरबत्ती, कपूर, फल, मिठाई, नारियल, गंगाजल और पूजा स्थल पर बिछाने के लिए साफ कपड़ा इस्तेमाल किया जाता है।

मां दुर्गा को लाल चुनरी चढ़ाना शुभ माना जाता है। सिंदूर, अक्षत, लाल फूल और नारियल अर्पित करने की परंपरा है।

पूजा सामग्री साफ और ताजी रखें।

विजयादशमी की पूजा विधि क्या है?

विजयादशमी के दिन मां अपराजिता की पूजा करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां अपराजिता की आराधना करने से सालभर कार्यों में सफलता मिलने और बाधाएं दूर होने की आशा की जाती है।

इस दिन दोपहर के बाद घर के उत्तर-पूर्व कोने की अच्छी तरह सफाई करें। उस स्थान को गोबर से लीपकर चंदन की मदद से आठ पंखुड़ियों वाला कमल बनाएं। फिर मां अपराजिता को फूल और प्रसाद अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करें।

पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। घर के द्वार पर हल्दी या लाल रंग से स्वस्तिक बनाएं। मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने दीपक और धूप जलाएं। सिंदूर, अक्षत, लाल फूल, नारियल, फल और मिठाई अर्पित करें। शमी का पौधा लगाना भी शुभ माना जाता है।

दशहरा 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?

दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:50 बजे शुरू होगी और 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:11 बजे समाप्त होगी। विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक है।

अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1:14 बजे से शाम 3:30 बजे तक बताया गया है। रावण दहन 20 अक्टूबर 2026 की शाम को प्रदोष काल में सूर्यास्त के बाद किया जाएगा।

मुहूर्त के अनुसार पूजा करने की परंपरा है।

मां अपराजिता की पूजा का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन मां अपराजिता की पूजा विशेष महत्व रखती है। इस दिन उनकी आराधना से वर्षभर कार्यों में सफलता और बाधाओं के दूर होने की आशा की जाती है।

उत्तर-पूर्व कोने में कमल बनाकर फूल और प्रसाद अर्पित करने की विधि बताई जाती है। यह परंपरा भक्तों के बीच प्रचलित है।

पूजा विधि स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

दशहरा पर और क्या करना शुभ माना जाता है?

इस दिन शमी का पौधा लगाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति आती है। मां दुर्गा को लाल चुनरी चढ़ाना और लाल फूल अर्पित करना परंपरा में शुभ माना जाता है।

रावण दहन शाम के समय प्रदोष काल में किया जाता है। पूजा के बाद प्रसाद बांटने की परंपरा है।

कुल मिलाकर, दशहरा 2026 में विजयादशमी की पूजा 20 अक्टूबर को विजय मुहूर्त में की जा सकती है। मां अपराजिता की पूजा का विशेष महत्व है। पूजा सामग्री में रोली, अक्षत, फूल, नारियल आदि शामिल हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। व्यक्तिगत आस्था और स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा करें।

News Desk Declaration / Disclaimer

घोषणा: इस खबर में दी गई पूजा तिथि, मुहूर्त और धार्मिक नियम पंचांग एवं प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। पूजा के मुहूर्त में शहर और स्थान के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। पाठकों से अनुरोध है कि पूजा-अनुष्ठान से जुड़ी किसी भी विशेष जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान आचार्य से पुष्टि करें। News Media Kiran किसी धार्मिक मान्यता को व्यक्तिगत या वैज्ञानिक सलाह के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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