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DUSU Election Result: NSUI ने काटा टिकट, निर्दलीय लड़कर DUSU उपाध्यक्ष बने दीपांशू शौकीन, जानें कौन हैं यह युवा नेता

DUSU Election Result: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी DUSU चुनाव के नतीजों ने इस बार एक बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक कहानी को जन्म दिया है। जहां अध्यक्ष पद पर ABVP और NSUI के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है, वहीं उपाध्यक्ष पद पर दोनों बड़े छात्र संगठनों को एक निर्दलीय प्रत्याशी ने पीछे छोड़ दिया है। यह प्रत्याशी हैं दीपांशू शौकीन, जिन्हें एनएसयूआई ने टिकट देने से इनकार कर दिया था, लेकिन उन्होंने हार मानने की बजाय अपने दम पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। 18 सितंबर को हुई वोटिंग के बाद शनिवार को वोटों की गिनती हुई, जिसमें दीपांशू शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर ली। 10 राउंड की गिनती के बाद वे कुल 14256 वोटों के साथ ABVP और NSUI, दोनों ही प्रत्याशियों से आगे निकल गए। आइए जानते हैं कौन हैं दीपांशू शौकीन और किन हालातों से गुजरते हुए उन्होंने यह बड़ी जीत हासिल की।

DUSU Election Result: पीरागढ़ी गांव से DUSU तक का सफर

दीपांशू शौकीन दिल्ली के पीरागढ़ी गांव के रहने वाले हैं और उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई भी दिल्ली में ही हुई है। उन्होंने अपना ग्रेजुएशन भगत सिंह कॉलेज से पूरा किया और वर्तमान में वे दिल्ली विश्वविद्यालय से ही बुद्धिस्ट स्टडीज विषय में आगे की पढ़ाई कर रहे हैं। दीपांशू का पारिवारिक पृष्ठभूमि बेहद साधारण रही है, उनकी मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के तौर पर काम करती हैं, जबकि उनके पिता एक बस कंडक्टर हैं। एक सामान्य परिवार से निकलकर दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे बड़े मंच पर छात्र राजनीति में अपनी पहचान बनाना दीपांशू के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।

NSUI ने पहले दिया टिकट, फिर लिया वापस

दीपांशू शौकीन पिछले कई महीनों से दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे और इस दौरान वे एनएसयूआई से जुड़े हुए थे। शुरुआत में उन्हें उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने को भी कहा गया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी उम्मीदवारी दर्ज करा दी। लेकिन कुछ समय बाद ही पार्टी की तरफ से उन्हें अपना नामांकन वापस लेने के लिए कहा गया, जिससे उनके सामने एक मुश्किल स्थिति खड़ी हो गई। दीपांशू ने इस फैसले को स्वीकार करने की बजाय अपने राजनीतिक करियर को लेकर एक साहसिक कदम उठाने का निर्णय लिया।

निर्दलीय मैदान में उतरने का साहसिक फैसला

नामांकन वापस लेने से इनकार करते हुए दीपांशू शौकीन ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया, जो किसी भी बड़े छात्र संगठन के समर्थन के बिना काफी जोखिम भरा कदम माना जाता है। बिना किसी संगठनात्मक ढांचे और संसाधनों के दो बड़े छात्र संगठनों, ABVP और NSUI के खिलाफ मैदान में उतरना आसान नहीं था, लेकिन दीपांशू ने अपनी मेहनत और छात्रों के बीच सीधे जुड़ाव के दम पर प्रचार अभियान चलाया। उनकी यह रणनीति आखिरकार रंग लाई और वे वोटों की गिनती में शुरू से ही मजबूत स्थिति में नजर आने लगे।

10 राउंड की गिनती में लगातार बनी रही बढ़त

वोटों की गिनती जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे यह साफ होता गया कि दीपांशू शौकीन की बढ़त मजबूत होती जा रही है। 10 राउंड की गिनती पूरी होने के बाद दीपांशू को कुल 14256 वोट मिले, जिसके साथ वे ABVP और NSUI दोनों के प्रत्याशियों से काफी आगे निकल गए। यह आंकड़ा बताता है कि छात्रों के बीच दीपांशू को लेकर व्यापक समर्थन मौजूद था, जो किसी संगठनात्मक ताकत के बिना भी उन्हें जीत दिलाने में कामयाब रहा। यह नतीजा दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में परंपरागत छात्र संगठनों के दबदबे को चुनौती देने वाला माना जा रहा है।

अध्यक्ष पद पर बनी रही कांटे की टक्कर

जिस समय उपाध्यक्ष पद पर दीपांशू शौकीन बढ़त बनाए हुए थे, उसी दौरान अध्यक्ष पद की लड़ाई भी उतनी ही रोमांचक बनी हुई थी। 12 राउंड की गिनती के बाद एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा 14,530 वोटों के साथ पहले स्थान पर बने हुए थे, जबकि एबीवीपी के यश डबास 14,106 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर चल रहे थे। दोनों प्रत्याशियों के बीच वोटों का यह छोटा सा अंतर बताता है कि अध्यक्ष पद की लड़ाई अंत तक बेहद कड़ी बनी रही, जिसमें हर राउंड के साथ स्थिति बदलती नजर आई।

जीत के बाद दीपांशू का भावुक संदेश

उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज करने के बाद दीपांशू शौकीन ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा कीं और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों का दिल से आभार जताया। उन्होंने लिखा कि निर्दलीय होकर चुनाव लड़ना आसान नहीं था, लेकिन छात्रों ने यह साबित कर दिया कि छात्र संगठनों से ऊपर उनका भरोसा होता है। दीपांशू ने इस जीत को अपनी निजी उपलब्धि न मानते हुए हर उस विद्यार्थी की जीत बताया, जो कैंपस में असली मुद्दों पर बात करना चाहता है। उन्होंने आगे कहा कि अब उनकी जिम्मेदारी और बड़ी हो गई है और वे हर छात्र की आवाज बनने की कोशिश करेंगे।

जॉइंट सेक्रेटरी पद पर भी दिलचस्प मुकाबला

DUSU चुनाव में उपाध्यक्ष और अध्यक्ष पद के अलावा जॉइंट सेक्रेटरी पद पर भी कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। 12 राउंड की गिनती के बाद एनएसयूआई के गोपाल चौधरी 9,867 वोटों के साथ पहले स्थान पर बने हुए हैं, जबकि एबीवीपी के लक्ष्यराज सिंह 9157 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर हैं। इसके अलावा समाजवादी छात्र सभा के विशेष यादव तीसरे स्थान पर चल रहे हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि इस बार का DUSU चुनाव किसी एक पद तक सीमित न रहकर लगभग हर सीट पर बेहद प्रतिस्पर्धी साबित हुआ है।

निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए बड़ा संदेश

दीपांशू शौकीन की यह जीत सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में एक नया संदेश देने वाली घटना मानी जा रही है। यह नतीजा दिखाता है कि अगर किसी प्रत्याशी के पास सही मुद्दे और छात्रों से सीधा जुड़ाव हो, तो बड़े संगठनों के समर्थन के बिना भी जीत हासिल की जा सकती है। आने वाले समय में यह जीत अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत बन सकती है, जो परंपरागत छात्र संगठनों की छाया से बाहर निकलकर अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं।

दीपांशू शौकीन की यह जीत दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के इतिहास में एक यादगार अध्याय के तौर पर दर्ज हो गई है। एनएसयूआई से टिकट न मिलने के बावजूद हार न मानते हुए निर्दलीय मैदान में उतरना और फिर दोनों बड़े छात्र संगठनों को पछाड़ते हुए उपाध्यक्ष पद जीतना, यह सफर आसान नहीं रहा। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर इतनी बड़ी जीत हासिल करना दीपांशू के संघर्ष और मेहनत को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि वे अपनी नई जिम्मेदारी को किस तरह निभाते हैं और छात्रों से किए गए वादों को कितना पूरा कर पाते हैं।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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