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राष्ट्रपति मुर्मु से पीएम मोदी की मुलाकात ने बढ़ाई हलचल, संसद गतिरोध और अंतरराष्ट्रीय दबावों की पृष्ठभूमि में हुई चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को राष्ट्रपति भवन पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इस शिष्टाचार भेंट के राजनीतिक निहितार्थों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राष्ट्रपति भवन ने इस मुलाकात की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मु की तस्वीर साझा की और लिखा—“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।”

बैठक को लेकर अटकलें तेज़

हालांकि, राष्ट्रपति भवन या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस मुलाकात के एजेंडे का कोई आधिकारिक ब्योरा नहीं दिया गया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे संसद के मौजूदा गतिरोध, बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार दबावों की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।

संसद गतिरोध और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का असर

पार्लियामेंट का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू हुआ है, लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ समेत विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के कारण दोनों सदनों में अब तक बहुत कम कामकाज हुआ है। विपक्ष की ओर से संसद में बिहार की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और एसआईआर प्रक्रिया पर भी बहस की मांग की गई है। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने इन मुद्दों की जानकारी साझा की होगी।

अमेरिका और रूस से जुड़ी चुनौतियां भी चर्चा में?

यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी दी है और भारत द्वारा रूस से सैन्य उपकरण और कच्चा तेल खरीदने को लेकर संभावित अमेरिकी पेनाल्टी की चर्चा भी गर्म है। कूटनीतिक हलकों का मानना है कि राष्ट्रपति को इन संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मसलों पर भी ब्रीफ किया गया होगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मुलाकात?

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की ऐसी नियमित मुलाकातें संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं, लेकिन जब ये मुलाकातें किसी राजनीतिक या कूटनीतिक संकट की पृष्ठभूमि में होती हैं, तो इनके संकेत व्यापक स्तर पर तलाशे जाते हैं। संसद में विपक्ष के आरोप, अमेरिका की चेतावनियां, और बिहार में चल रही वोटर लिस्ट पुनरीक्षण प्रक्रिया—इन सभी घटनाओं के केंद्र में सरकार की रणनीति को लेकर राष्ट्रपति से विचार-विमर्श स्वाभाविक माना जा रहा है।

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