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Ganesh Chauth 2026: गणेश चौठ 2026 सोमवार 14 सितंबर को, मध्याह्न पूजा 10:30 से 12:58 तक और विधि

Ganesh Chauth 2026: गणेश चौठ भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। मिथिला और काशी पंचांग के अनुसार इस वर्ष पर्व 14 सितंबर 2026 सोमवार को है। भविष्य पुराण की मान्यता के अनुसार इसी तिथि के मध्याह्न में गणेश जी का जन्म हुआ था इसलिए दोपहर की पूजा विशेष मानी जाती है।

शुभ मुहूर्त सुबह 10:30 से दोपहर 12:58 बजे तक बताया गया है, यानी दो घंटे 28 मिनट। चतुर्थी 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे शुरू होकर 15 सितंबर सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी।चंद्रोदय शाम 7:36 बजे बताया गया है। इसके बाद चौठ चंद्र पूजन का समय शुरू होता है। शास्त्रों में इस दिन पूजा से विघ्न दूर होने की मान्यता है।

Ganesh Chauth 2026: तिथि और मुहूर्त एक नजर में

चतुर्थी 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे आरंभ होगी और अगले दिन सुबह 7:44 बजे पूरी होगी। मुख्य पूजा का समय मध्याह्न का रखा गया है। 10:30 बजे से 12:58 बजे तक का अंतराल पूजन के लिए उपयुक्त बताया गया है। चांद निकलने के बाद शाम 7:36 बजे से चौठ चंद्र पूजा का क्रम जुड़ता है। स्थानीय पंचांग में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है इसलिए घर के पुरोहित या क्षेत्रीय पंचांग भी देखना ठीक रहता है।

पर्व का धार्मिक महत्व

भविष्य पुराण के अनुसार भादो शुक्ल चतुर्थी के मध्याह्न में गणेश जन्म की कथा जुड़ी है। इसी कारण दोपहर का समय पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में अर्चना से बाधाएं कम होती हैं और मनोकामना पूरी होने की कामना की जाती है। गणपति को विघ्नहर्ता कहा जाता है इसलिए नए काम से पहले यह दिन पूजा के लिए चुना जाता है। ये बातें शास्त्रीय परंपरा पर आधारित हैं।

Ganesh Chauth 2026: पूजा से पहले तैयारी

सुबह स्नान के बाद शुद्ध आसन पर पूर्व मुख बैठने को कहा गया है। छोटी चौकी गंगाजल से शुद्ध कर उस पर मूर्ति स्थापित की जाती है। शास्त्रों के अनुसार सोना, चांदी, तांबा, पीतल, मिट्टी या गोबर की प्रतिमा का उल्लेख है। संकल्प लेकर कलश स्थापित किया जाता है। इसके बाद नवग्रह और दशदिग्पाल का पूजन करने की विधि बताई गई है। फिर सामर्थ्य के अनुसार षोडशोपचार, दशोपचार या पंचोपचार किया जाता है।

ध्यान मंत्र और अर्पण

ध्यान के लिए मंत्र दिया गया है- ॐ एकदन्तं शूर्पकर्णं गजवक्त्रं चतुर्भुजम्, पाशांकुशधरं देवं ध्यायेत् सिद्धिविनायकम्। संभव हो तो 21 गांठ दूर्वा अर्पित करें, अन्यथा कम से कम एक दूर्वा चढ़ाएं। शमी पत्र और घी का मोदक भी प्रिय भोग माने जाते हैं। गुड़-घी का पकवान, केला, सेब, जामुन और नारियल मौसम के अनुसार चढ़ाए जा सकते हैं। सिंदूर, अबीर, फूल, धूप-दीप के बाद आरती और तीन परिक्रमा का क्रम बताया गया है।

Ganesh Chauth 2026: चौठ चंद्र पूजन

दिन की पूजा के बाद शाम को चंद्रोदय पर चौठ चंद्र दर्शन और पूजन की प्रथा भी जुड़ी है। इस वर्ष चांद 7:36 बजे उदय होने का समय दिया गया है। कई परिवार दिन की अर्चना पूरी कर शाम को चंद्र पूजन करते हैं। व्रत रखने वाले पारण का समय अपने कुल रीति और पंचांग से तय करते हैं। विधि सरल रखने पर भी श्रद्धा बनाए रखने पर जोर दिया जाता है।

गणेश चौठ 2026 सोमवार 14 सितंबर को मनाई जाएगी। मध्याह्न पूजा 10:30 से 12:58 बजे तक बताई गई है और चतुर्थी अगली सुबह तक रहेगी। चंद्रोदय शाम 7:36 बजे के बाद चौठ चंद्र पूजन जुड़ता है। दूर्वा, मोदक और सरल उपचार से घर पर पूजा की जा सकती है। पंचांग क्षेत्र के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है इसलिए स्थानीय समय जरूर मिला लें। पर्व की तैयारी श्रद्धा और साफ-सफाई के साथ पूरी की जा सकती है।

News Desk Declaration / Disclaimer

घोषणा: इस खबर में दी गई पूजा तिथि, मुहूर्त और धार्मिक नियम पंचांग एवं प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। पूजा के मुहूर्त में शहर और स्थान के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। पाठकों से अनुरोध है कि पूजा-अनुष्ठान से जुड़ी किसी भी विशेष जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान आचार्य से पुष्टि करें। News Media Kiran किसी धार्मिक मान्यता को व्यक्तिगत या वैज्ञानिक सलाह के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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