Winter Weight Gain: गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ ही मौसम सुहावना होने लगता है, लेकिन इसके साथ ही अधिकांश लोगों की जीवनशैली, खानपान और दैनिक दिनचर्या में भी अनजाने में बड़े बदलाव आ जाते हैं। सुबह अलार्म बजने के बाद रजाई से बाहर निकलने में आलस आना, सुबह-शाम की सैर छूट जाना और चाय के साथ गर्मागर्म तले-भुने पकौड़े, मक्खन लगे पराठे व मिठाइयां खाने की लालसा अचानक बढ़ जाना इस मौसम की आम बात है। इन मौसमी आदतों का सीधा असर कमर और वजन पर दिखाई देने लगता है।
अक्सर लोग मानते हैं कि ठंड के मौसम में अपने आप वजन बढ़ जाता है, जबकि चिकित्सा विज्ञान के अनुसार मौसम स्वयं वजन नहीं बढ़ाता। वजन में आने वाले इस उछाल के पीछे शारीरिक गतिविधियों में भारी गिरावट, अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का अनियंत्रित सेवन, धूप की कमी और हार्मोनल असंतुलन मुख्य रूप से जिम्मेदार होते हैं। यदि समय रहते इन कारणों को समझकर कुछ जरूरी सावधानियां बरती जाएं, तो सर्दियों के स्वादिष्ट खानपान का आनंद लेते हुए भी शरीर को पूरी तरह फिट और संतुलित रखा जा सकता है।
शारीरिक निष्क्रियता और गतिहीन जीवनशैली है प्राथमिक वजह
सर्दियों के महीनों में वजन बढ़ने का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष कारण शारीरिक गतिविधियों में अचानक आने वाली कमी है। गर्मियों और मानसून के दिनों में लोग सुबह की ताजी हवा में टहलना, दौड़ना या पार्क जाना पसंद करते हैं, लेकिन कड़ाके की ठंड और कोहरे के कारण यह रूटीन टूट जाता है। दिनभर हीटर के सामने या रजाई में बैठकर टीवी और मोबाइल देखने का समय बढ़ जाता है।
जब शरीर की ऊर्जा खपत (कैलोरी बर्न) न्यूनतम स्तर पर पहुंच जाती है और कैलोरी का अंतर्ग्रहण (कैलोरी इनटेक) पहले जितना या उससे अधिक बना रहता है, तो शरीर उस अतिरिक्त ऊर्जा को वसा (फैट) के रूप में जमा करने लगता है। शारीरिक निष्क्रियता मेटाबॉलिज्म की दर को भी धीमा कर देती है, जिससे वजन तेजी से बढ़ने लगता है।
उच्च कैलोरी वाले पारंपरिक व्यंजनों और मीठे की तीव्र क्रेविंग
सर्दियों का मौसम भारतीय व्यंजनों के लिहाज से बेहद समृद्ध माना जाता है। इस दौरान घरों में गाजर का हलवा, गोंद व तिल के लड्डू, बेसन की पिन्नी, मक्खन से लबालब भरे पराठे और गुड़ की चाय खूब चाव से खाई-पी जाती है। ठंड में शरीर का आंतरिक तापमान बनाए रखने के लिए मस्तिष्क हमें उच्च ऊर्जा वाले खाद्य पदार्थ खाने का संकेत देता है, जिसे ‘थर्मोजेनेसिस’ कहा जाता है।
समस्या इन पारंपरिक व्यंजनों में नहीं, बल्कि इनके अनियंत्रित और अत्यधिक सेवन में है। इसके अतिरिक्त मेवे, मखाना और ड्राई फ्रूट्स स्वास्थ्यवर्धक होने के बावजूद भारी मात्रा में कैलोरी और स्वस्थ वसा से भरपूर होते हैं। जब व्यक्ति स्वाद-स्वाद में जरूरत से ज्यादा कैलोरी का उपभोग कर लेता है, तो कुछ ही हफ्तों में वजन कई किलोग्राम तक बढ़ जाता है।
धूप की कमी, मेलाटोनिन असंतुलन और विंटर डिप्रेशन का प्रभाव
सर्दियों में दिन छोटे और रातें लंबी हो जाती हैं। धूप का संपर्क कम होने से शरीर में विटामिन डी का स्तर गिरने लगता है। चिकित्सा शोधों से यह साबित हो चुका है कि विटामिन डी की कमी से वसा जलने (Fat Burning) की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और भूख को नियंत्रित करने वाला हार्मोन लेप्टिन असंतुलित हो जाता है।
धूप कम मिलने के कारण शरीर में ‘सेरोटोनिन’ (हैप्पी हार्मोन) का स्तर गिरता है, जिससे कई लोग मौसमी अवसाद यानी सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) या विंटर ब्लूज के शिकार हो जाते हैं। इस सुस्ती और उदासी से निपटने के लिए मस्तिष्क कार्बोहाइड्रेट और शुगर की मांग करता है, जिसे हम ‘कम्फर्ट फूड’ कहते हैं। इसके अलावा अंधेरा जल्दी होने से नींद लाने वाला हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ अधिक बनता है, जिससे दिनभर भारी थकान और आलस्य महसूस होता है।
पानी पीने की मात्रा में कमी से भ्रमित होता है पाचन तंत्र
सर्दियों में पसीना न आने के कारण अक्सर लोगों को प्यास का अहसास बहुत कम होता है। परिणामस्वरूप, लोग दिनभर में पर्याप्त पानी पीना भूल जाते हैं। शरीर में पानी की कमी होने पर मस्तिष्क प्यास के संकेत को भूख समझने की भूल कर बैठता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘फॉल्स हंगर’ कहा जाता है।
पर्याप्त पानी न मिलने से मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है और आंतों में भोजन का पाचन ठीक से नहीं हो पाता, जिससे कब्ज और पेट फूलने (ब्लोटिंग) की समस्या होने लगती है। जब शरीर ठीक से हाइड्रेटेड नहीं रहता, तो वह विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिन्स) को बाहर नहीं निकाल पाता, जो वजन बढ़ने की प्रक्रिया को और तेज कर देता है।
सर्दियों में वजन नियंत्रित रखने के व्यावहारिक और आसान उपाय
ठंड के मौसम में वजन को नियंत्रण में रखने के लिए किसी कठोर क्रैश डाइट की जरूरत नहीं है, बल्कि थोड़ी-सी सतर्कता ही पर्याप्त है। यदि सुबह की ठंड में बाहर जाना संभव न हो, तो घर के भीतर ही 30 से 40 मिनट का समय योग, सूर्य नमस्कार, बॉडीवेट एक्सरसाइज या सामान्य स्ट्रेचिंग के लिए निकालें। दोपहर के समय धूप में 20 से 30 मिनट जरूर टहलें ताकि शरीर को प्राकृतिक विटामिन डी मिल सके।
अपने खानपान में हरी पत्तेदार सब्जियों (पालक, मेथी, बथुआ), गाजर, मूली, दालों, गर्म सूप और साबुत अनाजों को प्रचुर मात्रा में शामिल करें। मौसमी सब्जियों का सूप पीने से पेट भी भरता है और शरीर को न्यूनतम कैलोरी में भरपूर पोषण मिलता है। दिनभर में कम से कम दो से ढाई लीटर गुनगुना पानी पीने का नियम बनाएं; गुनगुना पानी पाचन को तेज करता है और शरीर से चर्बी घटाने में मदद करता है।
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