Jamshedpur Flood Alert: लौहनगरी जमशेदपुर पर एक बार फिर बाढ़ का साया गहराता जा रहा है। बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन और जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते शहर की प्रमुख नदियां उफान पर आ गई हैं। शुक्रवार सुबह आदित्यपुर पुल के पास खरकई नदी खतरे के निशान को पार कर गई, जिसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने शहर के निचले और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए चांडिल डैम और गंजिया बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे नदियों का दबाव और बढ़ गया है। बागबेड़ा, कदमा, मानगो और जुगसलाई जैसे इलाकों की बस्तियों में पानी घुसना शुरू हो चुका है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।
खरकई नदी खतरे के निशान से ऊपर, प्रशासन अलर्ट पर
जमशेदपुर के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि आदित्यपुर पुल के पास खरकई नदी अपने खतरे के निशान 129.00 मीटर को पार करते हुए 129.010 मीटर तक जा पहुंची। नदी के जलस्तर में यह बढ़ोतरी लगातार जारी है, जिसने प्रशासन को सतर्क कर दिया है। ओडिशा और झारखंड के विभिन्न बांधों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण नदी में पानी की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। इस स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर दिया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
तटीय बस्तियों में घुसा पानी, लोगों में मची अफरा-तफरी
स्वर्णरेखा और खरकई नदियों के उफान का सीधा असर अब शहर की कई बस्तियों पर दिखने लगा है। बागबेड़ा नया बस्ती और बड़ौदा घाट, कदमा के शास्त्रीनगर व रामनगर, मानगो तथा भुइयांडीह के कल्याण नगर और इंदिरा नगर जैसे निचले इलाकों में नदी का पानी पहुंच चुका है। इन क्षेत्रों में नालियों के रास्ते बैक-वाटर आने से सड़कों और घरों के आसपास पानी जमा होना शुरू हो गया है। हालात को भांपते हुए स्थानीय निवासी अपने घरों का जरूरी सामान समेटकर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की तैयारी में जुट गए हैं। जिला प्रशासन ने भी इन तटीय बस्तियों में विशेष सतर्कता बरतते हुए निगरानी की गतिविधियां तेज कर दी हैं।
चांडिल डैम के नौ और गंजिया बैराज के सभी गेट खोले गए
लगातार हो रही बारिश के कारण क्षेत्र के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ा है, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से भारी मात्रा में डिस्चार्ज शुरू करना पड़ा है। चांडिल डैम का जलस्तर 181.00 मीटर तक पहुंचने के बाद वहां मौजूद कुल तेरह रेडियल गेटों में से नौ को एक-एक मीटर तक खोलकर अतिरिक्त पानी की निकासी की जा रही है। इसी तरह गंजिया बैराज में जलस्तर 136.90 मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसका पूर्ण जलाशय स्तर 143.70 मीटर है। एहतियात के तौर पर बैराज के सभी पांचों गेट पूरी तरह खोल दिए गए हैं, जहां से करीब 999.32 क्यूमेक पानी तेज रफ्तार से बह रहा है। इन दोनों जलाशयों से हो रहा भारी डिस्चार्ज नदियों के जलस्तर को और बढ़ा सकता है।
पड़ोसी राज्य ओडिशा के बांधों से भी छोड़ा जा रहा पानी
केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य ओडिशा के जलाशयों में भी बारिश के कारण जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मयूरभंज जिले में स्थित बांकबल डैम का जलस्तर 304.60 मीटर तक पहुंच गया, जो इसके पूर्ण जलाशय स्तर 305.00 मीटर के करीब है। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए यहां के दो फाटक खोलकर 144.42 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा खरकई डैम का जलस्तर भी 312.78 मीटर तक जा पहुंचा, जबकि इसकी पूर्ण क्षमता 313.50 मीटर है। यहां भी दो फाटक खोलकर 61.02 क्यूमेक पानी की निकासी की जा रही है। इन सभी डैमों से एक साथ हो रहे डिस्चार्ज ने खरकई और स्वर्णरेखा नदी के जलस्तर पर सीधा दबाव बना दिया है।
मौसम विभाग का येलो अलर्ट, अगले पांच दिन रहेगी चुनौती
मौसम विज्ञान केंद्र, रांची ने पूर्वी सिंहभूम जिले सहित जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए भारी बारिश, मेघ गर्जन और वज्रपात का येलो अलर्ट जारी किया है। पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जमशेदपुर में 17 मिमी, चक्रधरपुर में 29.2 मिमी, गोईलकेरा में 33.4 मिमी, बहरागोड़ा में 43.5 मिमी और खरकई तटीय क्षेत्र में 38 मिमी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान जमशेदपुर में 64.5 से 115.5 मिमी तक भारी बारिश हो सकती है। इसके बाद 26 से 28 सितंबर के बीच जिले में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के साथ-साथ गरज-चमक और वज्रपात की भी चेतावनी दी गई है।
आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है नदियों पर दबाव
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले पांच दिनों तक क्षेत्र में रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला बना रहने वाला है। इसका सीधा असर नदियों के जलस्तर पर पड़ सकता है, जिससे बाढ़ की स्थिति और गंभीर होने की आशंका बनी हुई है। लगातार बारिश और बांधों से हो रहे डिस्चार्ज के मेल से खरकई और स्वर्णरेखा नदियों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है। ऐसे में प्रशासन के सामने न केवल मौजूदा हालात से निपटने बल्कि आने वाले दिनों की चुनौतियों के लिए भी तैयार रहने की जिम्मेदारी है।
प्रशासन की तैयारियां और स्थानीय निवासियों से अपील
बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियों को और पुख्ता कर लिया है। तटीय और निचले इलाकों में निगरानी टीमें तैनात की गई हैं, ताकि हालात बिगड़ने पर तुरंत राहत कार्य शुरू किया जा सके। स्थानीय निवासियों से अपील की गई है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और जरूरत पड़ने पर समय रहते सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं। नदी किनारे बसी बस्तियों में रहने वाले परिवारों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि जलस्तर में किसी भी अप्रत्याशित बढ़ोतरी की स्थिति में उन्हें ही सबसे पहले खतरा हो सकता है।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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