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Jharkhand News: झारखंड में शिक्षा विभाग का बड़ा फेरबदल, 134 लिपिकों का संवर्ग तय, 7 जिलों में तबादले

Jharkhand News: झारखंड के उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सात जिलों में शिक्षा विभाग ने एक बड़ा प्रशासनिक सुधार किया है, जिसके तहत 134 लिपिकों के संवर्ग का निर्धारण करते हुए बड़े पैमाने पर तबादले किए गए हैं। यह कार्रवाई हजारीबाग, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, बोकारो, धनबाद और रामगढ़ जिलों में हुई है, जहां हाईकोर्ट के आदेश और सरकार के निर्देश के बाद गठित प्रमंडलीय स्थापना समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया। क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक कुमारी नीलम की अगुवाई में हुए इस सुधार को शिक्षा विभाग के इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर पारदर्शी तरीके से किया गया तबादला माना जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में कर्मियों को नियमावली 2010 के तहत जिला या प्रमंडल संवर्ग चुनने का एकबारीय अवसर दिया गया, और उसी के अनुरूप उनका पदस्थापन तय किया गया। विभाग का मानना है कि इस कदम से कार्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ेगी।

Jharkhand News: हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई यह कार्रवाई

इस पूरे प्रशासनिक सुधार की शुरुआत हाईकोर्ट के आदेश और सरकार के निर्देश के बाद हुई, जिसके तहत प्रमंडलीय स्थापना समिति की बैठक बुलाई गई। इस बैठक में सातों जिलों में लंबे समय से एक ही जगह जमे कर्मचारियों की समीक्षा की गई और उसी आधार पर तबादले का निर्णय लिया गया। इस संबंध में शनिवार 12 सितंबर को विभागीय स्तर पर छह अलग-अलग कार्यालय आदेश जारी किए गए। यह पूरी प्रक्रिया नियमों के दायरे में रहते हुए पूरी की गई, जिससे इसकी वैधानिकता और पारदर्शिता पर कोई सवाल न उठे।

चार श्रेणियों में हुआ तबादलों का निर्धारण

शिक्षा विभाग ने इस पूरी कवायद को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर अंजाम दिया है। पहली श्रेणी में वे लिपिक शामिल हैं जो तीन साल से अधिक समय से एक ही कुर्सी पर जमे हुए थे, जिनकी संख्या 15 है। दूसरी श्रेणी में छह साल से अधिक समय से एक ही जिले में तैनात 27 लिपिकों को दूसरे जिलों में भेजा गया है, जबकि तीसरी श्रेणी में आठ साल से एक ही जिले में जमे नौ लिपिकों का तबादला किया गया। इसके अलावा विभाग ने मानवीय पहलू का भी ध्यान रखते हुए गंभीर असाध्य रोग या दिव्यांगता प्रमाण पत्र रखने वाले सात लिपिकों को उनके लिए सुविधाजनक स्थान पर पदस्थापित किया है, जो इस पूरी प्रक्रिया में संवेदनशीलता का उदाहरण माना जा रहा है।

जिला और प्रमंडल संवर्ग का ऐतिहासिक बंटवारा

इस पूरी प्रक्रिया के तहत कुल 134 लिपिकों में से 102 ने प्रमंडल संवर्ग चुना, जबकि 28 लिपिकों ने जिला संवर्ग को प्राथमिकता दी। जिला कैडर पाने वाले 28 लिपिकों में सबसे ज्यादा संख्या धनबाद और गिरिडीह जिलों से रही, जहां क्रमशः दस-दस लिपिकों को जिला संवर्ग मिला, जबकि बोकारो और हजारीबाग में तीन-तीन, कोडरमा और रामगढ़ में एक-एक लिपिक को यह दर्जा दिया गया। इनमें से 26 लिपिकों को तुरंत उनके आवंटित जिले में ही पदस्थापित कर दिया गया, जबकि बाकी 102 लिपिकों को प्रमंडल संवर्ग घोषित किया गया, जिसका मतलब है कि अब वे पूरे उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में कहीं भी सेवा दे सकते हैं। यह व्यवस्था भविष्य में कर्मियों की तैनाती को अधिक लचीला और जरूरत आधारित बनाने में मददगार साबित हो सकती है।

Jharkhand News: एक सप्ताह में योगदान देने का सख्त निर्देश

विभाग ने इस पूरे तबादला आदेश को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी नियंत्री पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि संबंधित कर्मचारियों को एक सप्ताह के भीतर विरमित कराकर नए पदस्थापन स्थल पर योगदान सुनिश्चित कराया जाए। इसके साथ ही सेवा पुस्तिका में संवर्ग की प्रविष्टि अनिवार्य रूप से दर्ज करने को भी कहा गया है, ताकि भविष्य में किसी तरह का भ्रम न रहे। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आगे चलकर संवर्ग परिवर्तन का कोई दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे इस फैसले को अंतिम और बाध्यकारी माना जा रहा है।

कुल मिलाकर झारखंड के उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में हुआ यह प्रशासनिक सुधार शिक्षा विभाग के कामकाज में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों के तबादले से न सिर्फ प्रशासनिक निष्पक्षता बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि कार्य संस्कृति में भी सुधार आने की संभावना जताई जा रही है। हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप हुई इस कार्रवाई को शिक्षा प्रशासन के लिए एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें असाध्य रोग से पीड़ित कर्मियों के प्रति संवेदनशीलता भी बरती गई। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस तरह की पारदर्शी प्रक्रिया झारखंड के अन्य प्रमंडलों में भी अपनाई जाती है या नहीं।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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