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Jharkhand News: 10 जून से रेत खनन पर एनजीटी की रोक, बालू की कीमतें बढ़ीं, जमाखोरी शुरू

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Jharkhand News: झारखंड में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पर्यावरण को बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। 10 जून 2025 से 15 अक्टूबर 2025 तक राज्य में रेत खनन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इस आदेश के बाद बालू माफिया और कुछ लोग जमाखोरी में जुट गए हैं, जिससे रेत की कीमतें आसमान छू रही हैं। रांची में बालू की कीमतें सबसे ज्यादा बढ़ी हैं, जिससे आम लोगों और निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों को परेशानी हो रही है।
रेत की कीमतों में भारी उछाल
रांची में कुछ दिन पहले तक एक हाईवा (500 सीएफटी) बालू की कीमत 28,000 रुपये थी, जो अब बढ़कर 33,000 रुपये हो गई है। वहीं, 100 सीएफटी बालू की कीमत 4,500 रुपये से बढ़कर 6,500 रुपये हो गई है। सरकारी नियमों के अनुसार, 100 सीएफटी बालू की कीमत ढुलाई समेत 3,300 रुपये तक होनी चाहिए, लेकिन यह 6,000 से 6,500 रुपये में बिक रही है। यह सरकारी दर से चार गुना ज्यादा है। लोगों का कहना है कि पुलिस, प्रशासन और कुछ नेताओं की मिलीभगत से यह कालाबाजारी हो रही है।
अवैध खनन और कम वैध घाट
झारखंड में कुल 44 वैध बालू घाट हैं, लेकिन अभी केवल 27 घाटों से ही रेत का खनन हो रहा है। करीब 100 घाटों को पर्यावरण मंजूरी का इंतजार है। नियमों में बदलाव के कारण नए टेंडर भी रुके हुए हैं। इस मौके का फायदा उठाकर 400 से ज्यादा अवैध घाटों से रेत निकाली जा रही है। पलामू के मोहम्मदगंज में लोग कोयल नदी से बोरी में बालू भरकर ला रहे हैं ताकि निर्माण कार्य न रुके।
जिलों में बालू की स्थिति
  • रांची: 6,500 रुपये (100 सीएफटी), 3 घाट चालू, 2 लाख सीएफटी स्टॉक
  • लातेहार: 1,000 रुपये (अवैध), कोई वैध घाट नहीं
  • गढ़वा: 4,500 रुपये, बिहार से आयात
  • पलामू: 4,000 रुपये, ग्रामीण खुद ला रहे बालू
  • बोकारो: 4,500 रुपये (80 सीएफटी), कोई वैध स्टॉकिस्ट नहीं
सरकार को बनाना होगा सख्त नियम
एनजीटी ने सरकार को सख्त नियम बनाने और अवैध खनन रोकने का आदेश दिया है। लोगों से अपील की गई है कि वे अवैध रेत खनन की शिकायत पुलिस को करें। यह रोक पर्यावरण और नदियों को बचाने के लिए जरूरी है, लेकिन इससे निर्माण कार्यों पर असर पड़ सकता है। सरकार से मांग है कि वह जल्द पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया शुरू करे ताकि बालू की किल्लत और कालाबाजारी रुके।
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Manpreet Singh
Author: Manpreet Singh

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