Jharkhand News: झारखंड की राजनीति में एक युग का अंत हो गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद चंद्रशेखर दुबे, जिन्हें लोग प्यार से ददई दुबे कहते थे, का गुरुवार को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। उनकी उम्र 80 साल थी। पिछले डेढ़ महीने से वह बीमार थे और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई है।
ददई दुबे का राजनीतिक सफर
ददई दुबे का जन्म झारखंड के गढ़वा जिले के चोका गांव में हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एक मुखिया के रूप में की थी। मेहनत और जनता के प्रति समर्पण ने उन्हें बिश्रामपुर से पांच बार विधायक बनाया। इसके बाद वह धनबाद से कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने। ददई दुबे ने झारखंड में मजदूरों और गरीबों के हक के लिए हमेशा आवाज उठाई। वह एक सादा जीवन जीने वाले नेता थे, जिन्हें लोग उनकी सादगी और ईमानदारी के लिए याद करते हैं।
नेताओं ने जताया शोक, हेमंत सोरेन ने कहा- अपूरणीय क्षति
ददई दुबे के निधन पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा, “ददई दुबे जी का जाना झारखंड के लिए बहुत बड़ी क्षति है। वह जनता की आवाज थे।” पलामू जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जयेश कुमार पाठक ने उन्हें अपने पिता की तरह बताया और कहा कि उनका मार्गदर्शन हमेशा याद रहेगा। कई अन्य नेताओं, जैसे पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, ने भी उनके निधन पर शोक जताया।
Jharkhand News: झारखंड की राजनीति पर असर
ददई दुबे का निधन कांग्रेस पार्टी और झारखंड की सियासत के लिए बड़ा नुकसान है। वह मजदूरों और समाज के कमजोर वर्गों के लिए लड़ने वाले नेता थे। उनकी कमी को भरना मुश्किल होगा। लोग उन्हें उनके साहस, सादगी और जनसेवा के लिए हमेशा याद रखेंगे।
झारखंड की जनता और कांग्रेस कार्यकर्ता इस दुख की घड़ी में ददई दुबे को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दे।
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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