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JSSC Teacher Recruitment Dispute: JSSC शिक्षक भर्ती विवाद में बड़ा अपडेट! 13 अक्टूबर को हाईकोर्ट में करीब 100 अपीलों पर सुनवाई

JSSC Teacher Recruitment Dispute: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 से जुड़े मीना कुमारी प्रकरण में राज्य सरकार और आयोग की ओर से दायर करीब 100 अपील याचिकाओं पर अब 13 अक्टूबर को सुनवाई होगी। झारखंड हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने यह तारीख तय की है। जानकारी प्रतिवादी मीना कुमारी के अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने दी। इस सुनवाई से शिक्षक नियुक्ति विवाद की जांच और एकल पीठ के आदेश के खिलाफ चुनौती दोनों पर आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

मामला लंबे समय से अदालत में लंबित है। एकल पीठ के फैसले के बाद सरकार और जेएसएससी ने अपील दाखिल की थी। खंडपीठ पहले ही अवमानना याचिका की सुनवाई पर रोक लगा चुकी है, ताकि अपीलों पर विचार होने तक एकल पीठ के आदेश के अनुपालन को लेकर कोई तत्काल कार्रवाई न हो।

13 अक्टूबर की सुनवाई में क्या शामिल होगा?

चीफ जस्टिस एमएस सोनक की खंडपीठ सरकार और जेएसएससी की उन अपीलों पर विचार करेगी, जो मीना कुमारी मामले और उससे जुड़े समान मुद्दों पर दायर हुई हैं। पिछली सुनवाई में राज्य की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्याम रॉय और जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने अदालत को बताया था कि कुछ अन्य अपीलें भी लंबित हैं, जिनमें वही कानूनी सवाल उठाए गए हैं। खंडपीठ ने दोनों पक्षों को संबंधित अपीलों की सूची सौंपने का निर्देश दिया था, ताकि एक साथ सुनवाई हो सके और परस्पर विरोधी आदेशों की स्थिति न बने।

अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता के अनुसार, 13 अक्टूबर को इन अपीलों की सुनवाई सूचीबद्ध है। अदालत यह देखेगी कि एकल पीठ द्वारा गठित जांच आयोग की कार्यवाही और नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाई गई आपत्तियों का क्या आधार है।

एकल पीठ ने एक सितंबर को क्या आदेश दिया था?

इस विवाद में एकल पीठ ने एक सितंबर को मीना कुमारी समेत 258 याचिकाओं पर फैसला सुनाया था। अदालत ने शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश डॉ. एसएन पाठक की अध्यक्षता में एक सदस्यीय तथ्य-अन्वेषण आयोग गठित किया था। बाद में जस्टिस पाठक की असमर्थता के कारण सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी की अध्यक्षता में नया एक सदस्यीय आयोग बनाया गया।

आयोग का काम सुप्रीम कोर्ट के 2 अगस्त 2022 के फैसले के बाद जेएसएससी द्वारा तैयार संशोधित मेरिट सूची और उसी आधार पर हुई नियुक्तियों की जांच करना है। याचिकाकर्ताओं का आरोप रहा है कि कुछ मामलों में उनसे कम अंक वाले अभ्यर्थियों को भी चयनित किया गया।

फैक्ट फाइंडिंग कमीशन किन बातों की जांच करेगा?

कमीशन को संशोधित मेरिट सूची की तैयारी और उसके आधार पर जारी नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया देखनी है। इसमें उन अभ्यर्थियों की नियुक्ति भी शामिल है, जिनके अंक याचिकाकर्ताओं से कम बताए गए। साथ ही 2019 में खाली हुए पदों को बाद में भरने की प्रक्रिया की भी जांच होगी। वैध कारणों से उम्मीदवारी रद्द होने के बावजूद बाद में नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों का सत्यापन अलग से किया जाएगा।

आयोग की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की संभावना है कि संशोधन के बाद सूची में बदलाव नियमों के अनुरूप था या नहीं। सरकार और आयोग का पक्ष है कि प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और मौजूदा नियमों के अनुसार चली।

अवमानना याचिका पर रोक क्यों लगी है?

एकल पीठ के आदेश के अनुपालन को लेकर अवमानना याचिका भी दायर हुई थी। खंडपीठ ने उस याचिका की सुनवाई पर रोक लगा दी है। इसका मतलब है कि जब तक अपीलों पर विचार नहीं हो जाता, एकल पीठ के निर्देश को तुरंत लागू कराने की मांग पर सुनवाई नहीं होगी। अदालत ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि एक ही मुद्दे पर दो स्तरों पर अलग-अलग कार्यवाही न चले।

प्रतिवादियों की ओर से कहा गया है कि जांच आयोग का गठन पारदर्शिता के लिए जरूरी था। वहीं अपीलकर्ता पक्ष का तर्क है कि एकल पीठ का आदेश नियुक्ति प्रक्रिया पर व्यापक प्रभाव डालता है, इसलिए खंडपीठ को पहले अपील पर निर्णय करना चाहिए।

आगे की सुनवाई से अभ्यर्थियों पर क्या असर पड़ सकता है?

13 अक्टूबर की सुनवाई से यह तय हो सकता है कि तथ्य-अन्वेषण आयोग की कार्यवाही जारी रहेगी या उस पर कोई अंतरिम निर्देश दिया जाएगा। यदि खंडपीठ अपीलों को स्वीकार करते हुए एकल पीठ के कुछ हिस्सों पर रोक लगाती है, तो जांच की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। इसके उलट, यदि अपीलें खारिज होती हैं या सीमित दायरे में रखी जाती हैं, तो आयोग संशोधित मेरिट और नियुक्तियों की विस्तृत जांच आगे बढ़ा सकेगा।

इस परीक्षा से जुड़े हजारों अभ्यर्थी लंबे समय से परिणाम और नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता में हैं। अदालत ने समान मुद्दों वाली अपीलों को एक साथ रखने का निर्देश देकर यह संकेत दिया है कि मामले को टुकड़ों में नहीं, बल्कि समग्र रूप से देखा जाएगा। अंतिम स्थिति 13 अक्टूबर की सुनवाई और उसके बाद के आदेश पर निर्भर करेगी।

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Author: Sanjna Gupta

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