Congenital Syphilis: अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य में जन्मजात सिफलिस (Congenital Syphilis) से जुड़ी नवजातों की मौतों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। यह बीमारी गर्भवती मां से बच्चे में फैलती है और समय पर इलाज न हो तो बच्चे के लिए जानलेवा हो सकती है। अच्छी बात यह है कि गर्भावस्था में एक साधारण खून की जांच और समय पर इलाज से इसे लगभग पूरी तरह रोका जा सकता है। आइए जानें न्यूयॉर्क में क्या हुआ, यह बीमारी क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और बचाव कैसे होता है।
Congenital Syphilis: न्यूयॉर्क में जन्मजात सिफलिस से 3 बच्चों की मौत, जानें यह बीमारी और इसके लक्षण
मुख्य बातें
- न्यूयॉर्क में क्या हुआ?
- जन्मजात सिफलिस क्या है?
- जन्मजात सिफलिस के लक्षण
- Congenital Syphilis: बचाव और इलाज का तरीका

न्यूयॉर्क में क्या हुआ?
न्यूयॉर्क राज्य स्वास्थ्य विभाग ने 12 अगस्त 2025 को जारी बयान में बताया कि 2025 में न्यूयॉर्क सिटी के बाहर के इलाकों में सिफलिस से जुड़ी संभावित शिशु मृत्यु का यह तीसरा मामला था। विभाग के अनुसार उस साल तब तक (न्यूयॉर्क सिटी को छोड़कर) जन्मजात सिफलिस के 21 मामले सामने आ चुके थे, जबकि 2024 में ऐसे 36 मामले दर्ज हुए थे। विभाग ने डॉक्टरों से गर्भवती महिलाओं की सिफलिस जांच बढ़ाने की अपील की और बताया कि राज्य के नियमों के तहत गर्भावस्था की पहली जांच, तीसरी तिमाही और प्रसव के समय सिफलिस टेस्ट कराना जरूरी है। विभाग ने इलाज में इस्तेमाल होने वाली पेनिसिलिन की राष्ट्रीय स्तर पर कमी का भी जिक्र किया।
जन्मजात सिफलिस क्या है?
जन्मजात सिफलिस एक ऐसी बीमारी है, जो सिफलिस से पीड़ित मां से गर्भ में बच्चे को फैलती है। यह ट्रेपोनेमा पैलिडम (Treponema pallidum) नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। सिफलिस मुख्य रूप से यौन संपर्क से फैलने वाला संक्रमण है। अगर मां का इलाज गर्भावस्था के दौरान न हो, तो संक्रमण गर्भनाल के जरिए बच्चे तक पहुंच सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 2022 में दुनिया भर में जन्मजात सिफलिस के लगभग 7 लाख मामले हुए, यानी हर 1 लाख जीवित जन्मों पर करीब 523 मामले। WHO के अनुमान के मुताबिक इससे लगभग 3.9 लाख प्रतिकूल परिणाम हुए, जिनमें गर्भ में या जन्म के बाद शिशु की मृत्यु, समय से पहले जन्म और कम वजन शामिल हैं।
जन्मजात सिफलिस के लक्षण
जन्मजात सिफलिस के लक्षण बच्चों में जन्म के समय या बाद में दिख सकते हैं। कई नवजात जन्म के समय बिल्कुल सामान्य दिखते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के भरोसे बीमारी नहीं पकड़ी जा सकती।
- नवजात में: त्वचा पर चकत्ते, बुखार, जिगर और तिल्ली का बढ़ना, पीलिया, नाक से लगातार स्राव और हड्डियों में बदलाव।
- बाद के वर्षों में: इलाज न होने पर आंखों, कानों, दांतों और हड्डियों से जुड़ी समस्याएं, जैसे देखने या सुनने में दिक्कत।
- गर्भावस्था पर असर: गर्भपात, मृत शिशु का जन्म (स्टिलबर्थ), समय से पहले प्रसव और जन्म के तुरंत बाद मृत्यु।
Congenital Syphilis: बचाव और इलाज का तरीका
जन्मजात सिफलिस पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है। इसके लिए जरूरी है:
- पहली जांच में टेस्ट: WHO सलाह देता है कि हर गर्भवती महिला की गर्भावस्था की पहली प्रसवपूर्व (एंटीनेटल) जांच में सिफलिस की जांच हो। ज्यादा जोखिम वाले इलाकों में बाद में दोबारा जांच की जाती है।
- पेनिसिलिन से इलाज: WHO के अनुसार गर्भावस्था में सिफलिस का एकमात्र अनुशंसित इलाज बेंजाथिन पेनिसिलिन G का इंजेक्शन है। समय पर इलाज से मां ठीक होती है और बच्चे में संक्रमण का खतरा बहुत कम हो जाता है।
- पार्टनर का इलाज: दोबारा संक्रमण से बचने के लिए जीवनसाथी की जांच और इलाज भी जरूरी है।
- सुरक्षित यौन व्यवहार: कंडोम का सही इस्तेमाल सिफलिस समेत यौन संचारित संक्रमणों का खतरा घटाता है।
भारत में गर्भवती महिलाओं के लिए क्या जरूरी है?
भारत में भी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसवपूर्व जांच के दौरान HIV और सिफलिस की जांच की व्यवस्था है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के HIV और सिफलिस के वर्टिकल ट्रांसमिशन उन्मूलन (EVTHS) दिशानिर्देश सभी गर्भवती महिलाओं की पहली तिमाही में, बेहतर हो तो पहली ANC जांच में ही, HIV और सिफलिस स्क्रीनिंग की बात कहते हैं। गर्भवती महिलाएं अपनी पहली ANC जांच में ही डॉक्टर से सिफलिस टेस्ट के बारे में पूछें और रिपोर्ट पॉजिटिव आए तो इलाज पूरा करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
जन्मजात सिफलिस किस बैक्टीरिया से होता है?
यह ट्रेपोनेमा पैलिडम नामक बैक्टीरिया से होता है, जो संक्रमित मां से गर्भ में बच्चे तक पहुंचता है।
क्या जन्मजात सिफलिस को रोका जा सकता है?
हां। गर्भावस्था की शुरुआत में जांच और बेंजाथिन पेनिसिलिन G से समय पर इलाज से इसे रोका जा सकता है।
क्या हर नवजात में लक्षण दिखते हैं?
नहीं। कई बच्चे जन्म के समय सामान्य दिखते हैं, इसलिए मां की जांच सबसे जरूरी है।
गर्भावस्था में सिफलिस की जांच कब करानी चाहिए?
पहली प्रसवपूर्व जांच में। डॉक्टर जोखिम के आधार पर बाद में दोबारा जांच की सलाह दे सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी जांच या इलाज के लिए योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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