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Meghalaya Politics: मेघालय में BJP मजबूत, UDP के 8 विधायक पार्टी में शामिल

23 सितंबर 2026
Meghalaya Politics
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Meghalaya Politics: मेघालय की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी यानी UDP के आठ विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। यह कदम पूर्वोत्तर भारत में भाजपा की स्थिति को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा की उपस्थिति में इन आठों विधायकों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेताओं ने नए सदस्यों का स्वागत किया। घटना 23 सितंबर 2026 को सामने आई।

भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर और मेघालय में हुए विकास कार्यों से ये विधायक प्रभावित हुए। क्षेत्रीय दल छोड़कर राष्ट्रीय पार्टी से जुड़ने का यह फैसला राज्य की मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

कौन-कौन विधायक भाजपा में शामिल हुए?

भाजपा में शामिल होने वाले आठ विधायकों के नाम लखमेन रिम्बुई, पायस मारवेन, किर्मेन श्यल्ला, मायरालबॉर्न सिएम, मैथ्यू कुर्बाह, ओलन सिंह सुइन, बालाजीद कुपर सिनरेम और सिनशर लिंगदोह थबाह हैं। ये सभी पहले UDP से जुड़े हुए थे।

UDP मेघालय की एक प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी रही है। इन विधायकों के भाजपा में आने से राज्य विधानसभा में सत्ताधारी गठबंधन के समीकरणों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। सभी विधायकों ने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ली।

इस फैसले के पीछे विकास कार्यों और केंद्रीय नेतृत्व से जुड़ाव को कारण बताया गया है। विधायकों का यह कदम स्थानीय राजनीति से राष्ट्रीय स्तर की पार्टी की ओर बढ़ने का संकेत देता है।

किरेन रिजिजू ने विधायकों के शामिल होने पर क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे मेघालय विधानसभा के आठ विधायकों का भाजपा परिवार में स्वागत करते हैं। उन्होंने बताया कि ये विधायक पहले UDP से जुड़े थे जो एक प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी है।

रिजिजू के अनुसार पिछले 12 साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर और मेघालय में हुई प्रगति और बदलाव इन विधायकों को भाजपा की ओर खींच लाए। उन्होंने पूर्वोत्तर के लोगों के साथ नरेंद्र मोदी के दिल से जुड़े होने और भाजपा द्वारा पूर्वोत्तर में विकास की राजनीति बदलने का जिक्र किया।

रिजिजू ने कहा कि इन सभी बातों से ये आठ विधायक प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज से बहुत प्रभावित हैं। उनका यह बयान पूर्वोत्तर में भाजपा की रणनीति को रेखांकित करता है।

लखमेन रिम्बुई समेत प्रमुख नेताओं की क्या भूमिका रही?

संबित पात्रा ने लखमेन रिम्बुई के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वे तीन बार के विधायक हैं। रिम्बुई 2008, 2018 और 2023 में विधायक चुने गए। 2018 से 2023 तक वे शिक्षा, वन और पर्यावरण, गृह और पुलिस जैसे विभागों के मंत्री रहे।

2025 से अब तक वे शिक्षा, राजस्व और आपदा प्रबंधन तथा कानून मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं। पात्रा ने पायस मारवेन का भी जिक्र किया जो 35 साल की उम्र में विधायक बने। मारवेन 2018 और 2023 में दो बार विधायक चुने गए हैं और वर्तमान में मेघालय सरकार कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन के चेयरमैन हैं।

किर्मेन श्यल्ला भी दो बार 2018 और 2023 में विधायक चुने गए। वे 2023 से 2025 तक राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री रहे। इन नेताओं का अनुभव राज्य सरकार में महत्वपूर्ण रहा है।

अमित शाह से जुड़ी मांगों का क्या संबंध है?

सूत्रों के अनुसार मेघालय में UDP के इन आठ विधायकों की कुछ मांगें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वीकार की थीं। इसी के बाद उन्होंने भाजपा से जुड़ने का फैसला लिया। यह जानकारी स्रोत सामग्री में दी गई है।

मांगों के स्वीकृत होने के बाद विधायकों ने क्षेत्रीय दल छोड़कर भाजपा का दामन थामा। यह कदम पूर्वोत्तर राज्यों में केंद्र सरकार के साथ तालमेल बढ़ाने की दिशा में देखा जा रहा है।

भाजपा इस घटना को पूर्वोत्तर से मिली खुशखबरी बता रही है। विकास कार्यों और केंद्रीय समर्थन को विधायकों के फैसले का आधार माना गया है।

पूर्वोत्तर राजनीति में इस कदम का क्या महत्व है?

मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्य में क्षेत्रीय दलों का दबदबा रहा है। UDP जैसी पार्टियों से विधायकों का भाजपा में आना राष्ट्रीय दल की पैठ बढ़ाने वाला कदम है। पिछले वर्षों में भाजपा ने पूर्वोत्तर में अपनी उपस्थिति बढ़ाई है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में क्षेत्र के विकास पर जोर दिया गया है। सड़क, बिजली, शिक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में काम हुए हैं। इन विधायकों का शामिल होना इसी विकास मॉडल से जुड़ा बताया जा रहा है।

राज्य विधानसभा में इन आठ सदस्यों के आने से भाजपा की संख्या बढ़ेगी। यह गठबंधन सरकार की स्थिरता और भविष्य के चुनावों पर असर डाल सकता है। पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी भाजपा इसी तरह विस्तार की कोशिश कर रही है।

विधायकों के अनुभव को देखते हुए सरकार में उनकी भूमिका बढ़ सकती है। लखमेन रिम्बुई जैसे वरिष्ठ नेता मंत्री पद पर रह चुके हैं इसलिए उनका योगदान महत्वपूर्ण हो सकता है। युवा विधायक पायस मारवेन जैसे चेहरे नई ऊर्जा ला सकते हैं।

कुल मिलाकर यह घटना मेघालय की राजनीति में भाजपा की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है। विकास और केंद्रीय जुड़ाव को आधार बनाकर क्षेत्रीय नेताओं को जोड़ने की रणनीति यहां काम करती दिख रही है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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कवरेज: Netsha Singh, News Media Kiran

Netsha Singh

News Media Kiran के लिए लिखते हैं।

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