अंतिम चार्जशीट में सरकारी अधिकारी क्यों नहीं हैं?
जांच से जुड़े सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंतिम चार्जशीट में किसी सरकारी अधिकारी या एनटीए पदाधिकारी को आरोपी नहीं बनाया जाएगा। उनके अनुसार, पेपर लीक की घटना की गहन जांच में निजी व्यक्तियों से आगे किसी सरकारी तंत्र की मिलीभगत के प्रमाण नहीं मिले। अधिकारी ने कहा कि इस चार्जशीट के साथ NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में जांच पूरी हो जाएगी। यह बयान जांच सूत्रों का है, न कि अदालत का अंतिम निष्कर्ष। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद अदालत साक्ष्यों की परीक्षा करेगी। छात्रों का तर्क है कि बिना शीर्ष स्तर की ढिलाई के गोपनीय प्रश्नपत्र बाहर नहीं जा सकता था। वे क्लीन चिट को न्यायसंगत नहीं मान रहे। एजेंसी ने अब तक केवल 13 निजी व्यक्तियों की भूमिका तय की है, जिनमें विषय विशेषज्ञ, कोचिंग संचालक और बिचौलिए शामिल हैं।
पहली चार्जशीट में कौन नामजद हुए और लीक कैसे हुआ?
28 जुलाई की पहली चार्जशीट में 13 लोगों के नाम थे। इनमें एनटीए द्वारा नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञ प्रमुख हैं। बॉटनी और जूलॉजी विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मंधारे, केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रह्लाद विट्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार को नामजद किया गया। जांच में कहा गया कि एनटीए ने प्रश्नपत्र तैयार करने के चारों चरणों में इन्हीं विशेषज्ञों को बार-बार लगाया। अंतिम चरण में इन्हें सभी चार मास्टर क्वेश्चन सेट का एक्सेस दे दिया गया था। केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रह्लाद कुलकर्णी पर आरोप है कि उन्होंने कागज के छोटे टुकड़ों पर 135 प्रश्न और उनके विकल्प लिखकर गोपनीय क्षेत्र से बाहर पहुंचा दिए। अन्य विशेषज्ञों ने प्रश्न याद रखकर बाहर किताबों की मदद से दोबारा तैयार किए। पहली चार्जशीट के बाद सीबीआई ने तीन और लोगों को गिरफ्तार किया, जो कोचिंग केंद्रों के जरिए लीक पेपर के लाभार्थी बने थे। इन तीनों और सीएफएसएल तथा जीईक्यूडी की फोरेंसिक रिपोर्ट को अंतिम चार्जशीट में जोड़ा जाएगा।
विवाद के बाद सरकार और एनटीए ने क्या बदलाव किए?
पेपर लीक विवाद और कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले हुए देशव्यापी प्रदर्शनों के बाद सरकार ने एनटीए के ढांचे में बड़े बदलाव किए। विवाद के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। शिक्षा मंत्रालय ने 17 अगस्त को एनटीए के 50 कर्मचारियों को हटा दिया। इसके बाद एजेंसी ने अपने 600 विषय विशेषज्ञों को हटाकर नई टीम गठित की और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए चार-स्तरीय जांच प्रणाली लागू की। ये प्रशासनिक कदम चार्जशीट से अलग हैं। सीबीआई की मौजूदा जांच में इन बदलावों को किसी अधिकारी की आपराधिक संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना गया। छात्र संगठनों का कहना है कि कार्मिक बदलाव जिम्मेदारी तय करने का विकल्प नहीं हो सकता।
ईडी की भूमिका और धन शोधन की जांच क्या है?
प्रवर्तन निदेशालय ने सीबीआई से इस मामले के केस रिकॉर्ड मांगे हैं। ईडी समीक्षा कर रही है कि घोटाले में धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत मामला बनता है या नहीं। अभी तक ईडी की तरफ से औपचारिक ईसीआईआर या गिरफ्तारी की पुष्टि इस रिपोर्ट के आधार सामग्री में नहीं है। यदि वित्तीय लेनदेन, कोचिंग फीस या बिचौलियों के जरिए पैसा घूमता मिला, तो मनी लॉन्ड्रिंग की अलग जांच खुल सकती है। सीबीआई की चार्जशीट आपराधिक साजिश और परीक्षा अधिनियम पर केंद्रित है, जबकि ईडी का दायरा धन के स्रोत और उपयोग तक होगा। दोनों एजेंसियों के निष्कर्ष अलग-अलग अदालतों में जा सकते हैं।
NEET UG 2026 Paper Leak: छात्र और अभिभावक अंतिम रिपोर्ट को क्यों खारिज कर रहे हैं?
अभ्यर्थियों का कहना है कि लाखों छात्रों का एक साल प्रभावित करने वाले लीक में सिर्फ 13 निजी लोगों तक जांच रुकना स्वीकार्य नहीं। उनका तर्क है कि मास्टर सेट तक पहुंच, विशेषज्ञों का बार-बार चयन और गोपनीय क्षेत्र से प्रश्न बाहर जाना सिस्टम की निगरानी के बिना संभव नहीं था। कई अभिभावक चाहते हैं कि एनटीए की चयन प्रक्रिया, प्रश्नपत्र की कस्टडी और मंत्रालय की निगरानी पर भी आरोप तय हों। सीबीआई का जवाब है कि सबूत निजी कड़ी से आगे नहीं गए। कानूनी स्थिति यह है कि चार्जशीट में नाम न होना बरी होना नहीं है। अदालत अतिरिक्त आरोपी बनाने या आगे जांच के आदेश दे सकती है, यदि याचिका या नए साक्ष्य आएं। फिलहाल एजेंसी अगले एक सप्ताह में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने की तैयारी में है।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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