Current Affair: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12 सितंबर को भारत पहुंच रहे हैं। वे नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात भी प्रस्तावित है। भारत इस समय ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है इसलिए इस वर्ष का सम्मेलन देश में हो रहा है। संगठन की शुरुआत ब्रिक के रूप में ब्राजील, रूस, भारत और चीन से हुई थी।
बाद में दक्षिण अफ्रीका जुड़ा तो नाम ब्रिक्स हो गया। आज इसमें 11 पूर्ण सदस्य बताए गए हैं। मंच अब केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। व्यापार, वित्त, तकनीक, ऊर्जा और विकास जैसे विषय भी चर्चा में रहते हैं। 2026 की थीम बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी है। यह भारत की चौथी अध्यक्षता है।
Current Affair: ब्रिक्स आखिर है क्या
ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों का सहयोग मंच है। शुरुआत चार देशों से हुई थी। दक्षिण अफ्रीका के आने के बाद नाम बदल गया। समय के साथ नए देश भी सदस्य बने। आज संगठन राजनीति और वैश्विक शासन जैसे मुद्दों पर भी बात करता है। विकासशील देशों की आवाज यहां एक साथ आती है।
संगठन की शुरुआत कब हुई
ब्रिक की पहली औपचारिक बैठक 2006 में हुई। पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ। दक्षिण अफ्रीका जुड़ने के बाद 2011 से नाम ब्रिक्स पड़ा। मकसद प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच पर लाना था। धीरे-धीरे इसका दायरा व्यापार और सहयोग से आगे बढ़ा।
Current Affair: भारत के लिए ब्रिक्स क्यों महत्वपूर्ण है
भारत संस्थापक सदस्यों में शामिल है इसलिए भूमिका शुरू से मजबूत रही। इस मंच से दूसरे बड़े विकासशील देशों से आर्थिक और कूटनीतिक रिश्ते बढ़ते हैं। वैश्विक मुद्दों पर अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। विकासशील देशों की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रखने में भी यह समूह मददगार माना जाता है।
2026 में भारत की अध्यक्षता क्यों खास है
इस वर्ष अध्यक्षता भारत के पास है। थीम लचीली अर्थव्यवस्था, नवाचार, आपसी सहयोग और टिकाऊ विकास पर जोर देती है। 2026 भारत की चौथी अध्यक्षता है। इससे पहले देश 2012, 2016 और 2021 में यह जिम्मेदारी निभा चुका है। मेजबानी के कारण सम्मेलन नई दिल्ली में हो रहा है।
Current Affair: 12-13 सितंबर के सम्मेलन में क्या होगा
सदस्य देशों के नेता और प्रतिनिधि दिल्ली में जुटेंगे। व्यापार, वित्त, तकनीक, ऊर्जा और वैश्विक शासन जैसे विषय एजेंडे में रह सकते हैं। भारत सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है। पुतिन के दौरे के दौरान भारत-रूस द्विपक्षीय मुद्दे भी उठ सकते हैं। व्यापार और आर्थिक साझेदारी चर्चा का हिस्सा बन सकती है।
पुतिन के दौरे का कूटनीतिक महत्व
दौरा ऐसे समय हो रहा है जब ब्रिक्स का विस्तार पहले से बड़ा हो चुका है। सम्मेलन के साथ द्विपक्षीय मुलाकात दोनों देशों के पुराने संबंधों को नया संदर्भ देगी। ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्र पहले से चर्चा में रहते हैं। मेजबान के रूप में भारत एजेंडा तय करने की स्थिति में है।
Current Affair: प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जरूरी तथ्य
शुरुआती नाम ब्रिक था। पहले सदस्य ब्राजील, रूस, भारत और चीन थे। दक्षिण अफ्रीका जुड़ने पर नाम ब्रिक्स हुआ। वर्तमान पूर्ण सदस्य 11 बताए गए हैं। 2026 की अध्यक्षता भारत के पास है और सम्मेलन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। थीम रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी है। यह भारत की चौथी अध्यक्षता है।
संगठन का बढ़ा हुआ दायरा
शुरुआत आर्थिक सहयोग से हुई थी। अब वित्त व्यवस्था, तकनीक साझेदारी और ऊर्जा सुरक्षा जैसे विषय भी जुड़ गए हैं। नए सदस्यों के आने से समूह का स्वरूप बदला है। विकासशील देशों के लिए यह मंच पश्चिमी संस्थानों के विकल्प के रूप में देखा जाता है। दिल्ली सम्मेलन इसी विस्तार के बाद का अहम पड़ाव माना जा रहा है।
Current Affair: भारत की भूमिका आगे कैसे रहेगी
अध्यक्ष के नाते भारत सहयोग के एजेंडे को आकार दे रहा है। सम्मेलन में लिए गए निर्णय समूह की अगली दिशा तय कर सकते हैं। द्विपक्षीय मुलाकातें भी इसी मंच के इर्द-गिर्द चलेंगी। परीक्षा और सामान्य ज्ञान दोनों के लिए सदस्य संख्या, थीम और तारीख याद रखना उपयोगी है।
व्लादिमीर पुतिन 12 सितंबर को 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आ रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात भी होगी। भारत की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर का यह आयोजन समूह की आगे की राह तय कर सकता है। संगठन की यात्रा 2006 की बैठक और 2009 के पहले शिखर सम्मेलन से शुरू होकर 11 पूर्ण सदस्यों तक पहुंच चुकी है।
भारत के लिए यह मंच विकासशील देशों के साथ सहयोग और वैश्विक आवाज दोनों देता है। 2026 की थीम लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिर विकास पर टिकी है। यह देश की चौथी अध्यक्षता है। परीक्षा के लिहाज से नाम परिवर्तन, सदस्य देश, तारीख और थीम सबसे महत्वपूर्ण बिंदु हैं।
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