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Petrol-Diesel Price 13 Oct 2026: आज आपके शहर में ईंधन के भाव में क्या है खास, और क्यों अलग-अलग हैं कीमतें?

Petrol-Diesel Price 13 Oct 2026: भारत के ज्यादातर बड़े शहरों में आज सुबह 6 बजे के संशोधन के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। नई दिल्ली में पेट्रोल लगभग ₹102.12 प्रति लीटर के आसपास है, जबकि मुंबई और बेंगलुरु में यह ₹111 से ऊपर पहुंच चुका है। हैदराबाद और कोलकाता जैसे शहरों में पेट्रोल ₹113 से ₹116 के बीच है। तेल कंपनियां आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल के भाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और राज्य सरकारों के टैक्स के आधार पर रोजाना रेट तय करती हैं। ड्राइवरों के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि एक शहर से दूसरे शहर में कीमत में ₹10-14 तक का फर्क आसानी से पड़ जाता है, जिसका मुख्य कारण राज्य स्तर का वैट है।

नई दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल करीब ₹95.20 प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल ₹111.21 और डीजल लगभग ₹97.83 है। बेंगलुरु में पेट्रोल ₹111.68, चेन्नई में ₹107.77 और कोलकाता में ₹113.51 दर्ज किया गया है। हैदराबाद में पेट्रोल ₹116.15 के आसपास है, जबकि अहमदाबाद और लखनऊ जैसे शहरों में यह ₹102 के आसपास ही है। नोएडा में पेट्रोल ₹101.96 और पुणे में ₹112.02 है। ये रेट प्रमुख तेल कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) के आउटलेट्स पर आधारित हैं। निजी पंपों पर थोड़ा अंतर हो सकता है।

आज प्रमुख भारतीय शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्या हैं?

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पेट्रोल ₹102 के आसपास है, जो दक्षिणी और पश्चिमी महानगरों की तुलना में सस्ता है। मुंबई और बेंगलुरु दोनों जगह पेट्रोल ₹111 से ऊपर है, जबकि हैदराबाद और कोलकाता में यह ₹113 से ₹116 के बीच है। डीजल भी इसी क्रम में है, लेकिन पेट्रोल से कम दर पर बिक रहा है। जहां सीएनजी उपलब्ध है, वहां इसकी कीमत दिल्ली और मुंबई के कुछ इलाकों में ₹90 प्रति किलो से कम और दक्षिणी शहरों में ₹100 से ऊपर हो सकती है। हमेशा पंप पर जाकर सटीक रेट चेक करें, क्योंकि सरकारी और निजी पंपों के बीच भी छोटा अंतर हो सकता है। हाल के दिनों में वैश्विक क्रूड ऊंचा रहने के बावजूद घरेलू रेट ज्यादा नहीं बढ़े हैं।

ईंधन की कीमतें राज्य दर राज्य अलग-अलग क्यों रहती हैं?

सबसे बड़ा कारण राज्य सरकारों का वैट और अन्य स्थानीय टैक्स है। क्रूड ऑयल की लागत, रिफाइनिंग, केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी और बेसिक फ्रेट पूरे देश में लगभग एक जैसा होता है, लेकिन हर राज्य अपना वैट रेट अलग रखता है। कुछ राज्य कम वैट लगाकर रेट कम रखते हैं ताकि ट्रांसपोर्ट और उद्योग पर बोझ न पड़े, जबकि कुछ राज्य ज्यादा वैट लगाते हैं जिससे कीमत ₹110 के ऊपर चली जाती है। डीलर कमीशन और स्थानीय चार्जेस भी कुछ रुपये जोड़ देते हैं। वैट अंतिम कीमत पर लगता है, इसलिए बेस रेट में छोटा अंतर भी बड़ा फर्क पैदा कर देता है। दिल्ली से यूपी या गुजरात से महाराष्ट्र में जाते ही रेट में अचानक इजाफा दिखना इसी वजह से होता है।

भारत में रिटेल फ्यूल प्राइस कैसे कैलकुलेट होती है?

कीमत का हिसाब आयातित क्रूड ऑयल की लैंडेड कॉस्ट से शुरू होता है। भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत क्रूड आयात करता है। समुद्री फ्रेट, इंश्योरेंस और डॉलर-रुपये की दर जोड़ने के बाद क्रूड रिफाइनरी पहुंचता है। रिफाइनिंग के बाद पेट्रोल-डीजल बनता है और उसमें रिफाइनर का मार्जिन जुड़ता है। तेल मार्केटिंग कंपनियां अपनी मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट जोड़ती हैं। इसके बाद केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी (जो पूरे देश में एक जैसी और फिक्स्ड होती है) लगती है। फिर राज्य का वैट और अंत में पेट्रोल पंप वाले का डीलर कमीशन जुड़कर फाइनल रेट बनता है। इसी वजह से दो शहरों में बेस कॉस्ट एक जैसी होने के बावजूद रिटेल प्राइस में 10 प्रतिशत से ज्यादा का अंतर पड़ जाता है।

ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव किन वजहों से आता है?

सबसे बड़ा फैक्टर अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल का भाव है। जब ब्रेंट क्रूड ऊपर जाता है तो भारत के आयात की लागत तुरंत बढ़ जाती है और तेल कंपनियां अगले संशोधन में इसे रेट में दिखाती हैं। रुपये की कमजोरी भी कीमत बढ़ाती है, क्योंकि क्रूड डॉलर में खरीदा जाता है। ओपेक+ के फैसले, भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई में रुकावट या मौसमी मांग भी भाव को प्रभावित करते हैं। घरेलू स्तर पर केंद्रीय एक्साइज या राज्य वैट में बदलाव से रेट अचानक ऊपर-नीचे हो सकते हैं। तेल कंपनियां कई बार क्रूड के उतार-चढ़ाव को पूरी तरह ग्राहकों तक नहीं पहुंचातीं, इसलिए रेट कुछ समय तक स्थिर भी रह सकते हैं।

उच्च ईंधन खर्च को कैसे कंट्रोल करें?

गाड़ी का सही मेंटेनेंस (टायर प्रेशर, एयर फिल्टर, समय पर सर्विस) से फ्यूल एफिशिएंसी बढ़ जाती है। छोटी-छोटी यात्राओं को मिलाकर करना, शॉर्ट डिस्टेंस के लिए राइड शेयरिंग या पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करना खर्च कम कर सकता है। जहां सीएनजी उपलब्ध है वहां उसे चुनना फायदेमंद रहता है। ज्यादा वैट वाले राज्य में रहने वाले लोग कभी-कभी पड़ोसी कम टैक्स वाले राज्य में जाकर फ्यूल भर लेते हैं, लेकिन यह तभी समझदारी है जब रोजाना या बार-बार बॉर्डर क्रॉस करना पड़ता हो।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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