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PM Modi: पीएम मोदी ने वडनगर से वाराणसी दल से की बात

PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सेवा संकल्प अभियान पर निकले युवाओं से संवाद किया। यह दल वडनगर से वाराणसी की ओर जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाशक्ति की भूमिका को मजबूती से आगे बढ़ाना है।

उन्होंने सेवा को मुख्य कार्य बताया। संदेश यह था कि सेवा करते हुए ही सेवा का संदेश देना है, उपदेश नहीं देना है। आचरण से लोग समझें कि राजनीति में सत्ता कितनी भी बड़ी हो, मार्ग सेवा का ही रहेगा। सेवा के मार्ग से विचलित नहीं होना है। ऊंचे शिखर पर पहुंचकर भी सेवा परमो धर्म के भाव से आगे बढ़ना है।

वडनगर को जन्मभूमि और काशी को कर्मभूमि बताते हुए उन्होंने दोनों शहरों के बीच चल रहे अभियान को अनुभव से जोड़ा। कुछ साथियों से बात का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे वह भी उनके साथ चल रहे हों।

पीएम मोदी ने सेवा का क्या अर्थ बताया?

प्रधानमंत्री के अनुसार सेवा ही मुख्य कार्य होना चाहिए। उपदेश देने की जगह काम करके दिखाना है। सत्ता के आकार से मार्ग नहीं बदलना चाहिए। सेवा परमो धर्म का भाव शिखर पर भी वही रहना चाहिए। यह बात उन्होंने अभियान पर निकले दल को कही, जो दो ऐतिहासिक शहरों के बीच सेवा का काम कर रहा है।

उन्होंने उदाहरण भी दिए। सेवा भाव से काम होने पर करोड़ों जरूरतमंदों को मुफ्त अनाज मिलता है। सेवा भाव से आयुष्मान योजना जन्म लेती है। दोनों शहरों के रास्ते में युवाओं ने देखा होगा कि सेवा के काम कैसे आगे बढ़ाए गए हैं। ये वाक्य सरकारी योजनाओं को सेवा की भाषा से जोड़ते हैं। आंकड़े इस संवाद में नहीं दिए गए।

संदेश का केंद्र व्यक्तिगत आचरण है। राजनीति और चुनाव अपनी जगह हैं, शासन व्यवस्था अपनी जगह है। प्रधानमंत्री के शब्दों में वे राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के संकल्प को लेकर निकले लोग हैं। 2047 तक विकसित भारत में युवाशक्ति की बड़ी भूमिका को मजबूत करना है।

वडनगर और वाराणसी को क्यों जोड़ा गया?

पीएम मोदी ने कहा कि वडनगर और वाराणसी दोनों पुरातन ऐतिहासिक शहर हैं और हजारों साल से जीवंत हैं। एक जन्मभूमि है, दूसरी कर्मभूमि। काशी में बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद है। वडनगर हाटकेश्वर महादेव के आशीष की भूमि है। इन्हीं दो बिंदुओं के बीच युवा सेवा अभियान चला रहे हैं।

यह जोड़ व्यक्तिगत जीवनी और अभियान के भूगोल को एक रेखा पर लाता है। दल वडनगर से निकला है और वाराणसी की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कुछ साथियों से बात का उल्लेख किया। उनके अनुभव सुनकर उन्हें लगा जैसे वे साथ चल रहे हों। यात्रा का विवरण, दूरी या प्रतिभागी संख्या इस सामग्री में नहीं है। संवाद का स्वर अनुभव साझा करने का है।

युवाओं से कहा गया कि देश को जमीन पर जानना है, हर बारीकी को अनुभव करना है, अलग अलग क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों से मिलना है, उनके सपनों और आकांक्षाओं को समझना है। सेवा संकल्प यात्रा को उनके जीवन में अहम भूमिका निभाने वाली बताया गया।

विकसित भारत में युवाओं की भूमिका क्या कही गई?

प्रधानमंत्री ने आज की युवा पीढ़ी को विकसित भारत का निर्माता भी बताया और बड़ी लाभार्थी भी। यानी निर्माण का भार और भविष्य का लाभ दोनों एक ही पीढ़ी से जुड़े। इस दायित्व के लिए देश को नजदीक से जानना जरूरी बताया गया। सेवा संकल्प यात्रा उसी जानने समझने का माध्यम बताई गई।

2047 का संकल्प समय सीमा देता है। युवाशक्ति को एकदम मजबूती से आगे बढ़ाने की बात उसी लक्ष्य से जुड़ी है। राजनीति, चुनाव और शासन को अलग रखकर राष्ट्र निर्माण को प्राथमिक बताया गया। यह फ्रेम युवा श्रोताओं के लिए अभियान को चुनावी नहीं, निर्माण वाला काम बताता है।

पहले जलवायु संकट पर प्रधानमंत्री का बयान संबंधित उल्लेख में है कि भारत दुनिया को नई राह दिखा रहा है। वह बयान इस संवाद से पहले का बताया गया है। वर्तमान संवाद का मूल सेवा, आचरण और युवा भूमिका है।

इस संवाद का युवाओं के लिए क्या मतलब है?

जो दल रास्ते पर है उसके लिए संदेश सीधा है। सेवा करके दिखाना, उपदेश नहीं देना। जरूरतमंदों तक अनाज और स्वास्थ्य जैसी योजनाओं को सेवा भाव की मिसाल मानना। दो शहरों के बीच चलते हुए मैदान की हकीकत देखना। अलग वर्गों से बात करना और आकांक्षाएं सुनना।

जो घर बैठे यह संवाद सुन रहे हैं उनके लिए अर्थ यह है कि विकसित भारत का आह्वान युवाओं को लाभार्थी और कर्ता दोनों मानता है। जन्मभूमि कर्मभूमि का निजी संदर्भ अभियान को भावनात्मक रंग देता है, लेकिन काम की सूची सेवा और समझने की है। प्रतिभागियों की कुल संख्या, रुकने के स्थान या अवधि स्रोत में नहीं हैं इसलिए उनका अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

सेवा संकल्प अभियान पर पीएम मोदी का यह संवाद गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस से हुआ। वडनगर से वाराणसी जाते दल को सेवा का मार्ग, 2047 का लक्ष्य और जमीन से जुड़ने की सलाह दी गई। सत्ता चाहे जितनी बड़ी हो, कहा गया मार्ग सेवा का ही रहेगा।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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