Press Club of India: प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने अरुणाचल प्रदेश पुलिस की कार्रवाई की तीखी निंदा की है। पासीघाट में 23 अक्टूबर को सियांग डैम परियोजना के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में जारी सर्च वारंट की सूची में वरिष्ठ पत्रकार और द अरुणाचल टाइम्स की डिप्टी एडिटर टोंगम रीना का नाम शामिल किए जाने पर प्रेस क्लब ने आक्रोश जताया है। क्लब का कहना है कि विरोध प्रदर्शन को कवर करने वाले पत्रकारों को डराने-धमकाने की कोशिश बंद की जाए और हिंसा की जांच को प्रेस पर हमले का बहाना न बनाया जाए।
पासीघाट हिंसा और सर्च वारंट का पूरा मामला
23 अक्टूबर को पासीघाट में सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के बाद एनएचपीसी के कार्यालय और पुलिस स्टेशन समेत कई जगहों पर आगजनी और तोड़फोड़ की खबरें आईं। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया और हिंसा से जुड़े सबूत जुटाने के लिए अदालत से सर्च वारंट की मांग की। 27 अक्टूबर को ईस्ट सियांग पुलिस के जांच अधिकारी द्वारा दायर आवेदन में टोंगम रीना समेत कुछ अन्य लोगों के नाम भी शामिल किए गए। पुलिस का दावा है कि इनके आवासों से घटना से जुड़े कपड़े, मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरण बरामद हो सकते हैं।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने इस कदम को बेहद गंभीर बताया। क्लब का मानना है कि पत्रकारों को सिर्फ अपने पेशेवर कर्तव्य निभाने के लिए कानूनी प्रक्रिया में घसीटना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। पासीघाट की यह घटना अरुणाचल के पूर्वी सियांग जिले में हुई, जहां सियांग नदी पर प्रस्तावित बड़े बांध परियोजना को लेकर स्थानीय समुदायों का लंबे समय से विरोध जारी है।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का बयान और स्पष्ट मांगें

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की अध्यक्ष संगीता बरुआ पिशारोटी और महासचिव अफजल इमाम द्वारा जारी बयान में साफ कहा गया है कि हिंसा और संपत्ति के नुकसान की जांच को पत्रकारों को डराने का बहाना नहीं बनाया जा सकता। क्लब ने जोर देकर कहा कि टोंगम रीना ने हमेशा पर्यावरण, राजनीति और शासन से जुड़े मुद्दों पर बेबाक रिपोर्टिंग की है। बिना ठोस सबूत के उनका नाम सर्च वारंट की सूची में डालना प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। भारत जैसे लोकतंत्र में ऐसा कदम स्वीकार्य नहीं हो सकता।
क्लब ने अरुणाचल प्रदेश पुलिस से मांग की है कि टोंगम रीना समेत किसी भी पत्रकार को सिर्फ अपना काम करने की वजह से परेशान न किया जाए। बयान में यह भी कहा गया कि विरोध प्रदर्शन को कवर करना पत्रकारों का कर्तव्य है और इसे आपराधिक गतिविधि मानना गलत है। प्रेस क्लब ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि वे प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करें और पत्रकारों के खिलाफ किसी भी तरह की उत्पीड़न की कार्रवाई से बचें।
टोंगम रीना की पत्रकारिता और उनकी भूमिका
टोंगम रीना अरुणाचल प्रदेश की एक प्रतिष्ठित पत्रकार हैं जो द अरुणाचल टाइम्स में डिप्टी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने लंबे समय तक पर्यावरण, आदिवासी अधिकार, शासन व्यवस्था और बड़े विकास परियोजनाओं के प्रभावों पर रिपोर्टिंग की है। सियांग घाटी में बांध परियोजनाओं के खिलाफ स्थानीय लोगों की चिंताओं को उन्होंने लगातार आवाज दी है। उनकी रिपोर्टिंग में अक्सर जमीनी हकीकत और समुदायों की आशंकाएं प्रमुख रही हैं।
पत्रकारिता जगत में टोंगम रीना अपनी साहसिक रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं। अतीत में भी उन्हें अपने काम के कारण धमकियां और हमलों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में प्रेस क्लब का मानना है कि उनकी रिपोर्टिंग को जांच का हिस्सा बनाना उनके पेशेवर काम पर सवाल खड़ा करता है। कई मीडिया संगठनों ने भी उनके नाम को सर्च वारंट में शामिल करने पर चिंता जताई है और कहा है कि पत्रकारों के काम को अपराध से अलग देखा जाना चाहिए।
सियांग डैम परियोजना और विरोध प्रदर्शन का संदर्भ
सियांग नदी पर प्रस्तावित अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश की सबसे बड़ी जलविद्युत योजनाओं में से एक है। एनएचपीसी द्वारा इस परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। स्थानीय आदिवासी समुदायों, खासकर आदि समुदाय, का कहना है कि बड़े बांध से उनकी जमीन, संस्कृति और पर्यावरण को खतरा है। कई गांवों में विस्थापन और नदी के प्रवाह में बदलाव की आशंका जताई जा रही है।
23 अक्टूबर को पासीघाट और आसपास के इलाकों में विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले गया। सुरक्षा बलों द्वारा आंसू गैस का इस्तेमाल किए जाने के बाद स्थिति बिगड़ी। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद पुलिस ने कई गिरफ्तारियां कीं और जांच तेज कर दी। प्रेस क्लब का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए, न कि उन्हें डराने की कोशिश।
प्रेस स्वतंत्रता पर मंडराता खतरा और आगे का रास्ता
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने इस घटना को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया है। क्लब का तर्क है कि लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका सिर्फ खबरें देना नहीं, बल्कि सत्ता की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है। अगर पत्रकारों को उनके काम के लिए कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़े तो स्वतंत्र रिपोर्टिंग प्रभावित होगी।
बयान में स्पष्ट मांग की गई है कि अरुणाचल पुलिस तुरंत यह सुनिश्चित करे कि टोंगम रीना या किसी अन्य पत्रकार को सिर्फ पेशेवर कर्तव्य निभाने के कारण परेशान न किया जाए। प्रेस क्लब ने पूरे मीडिया समुदाय से एकजुटता की अपील की है और कहा है कि ऐसी कार्रवाइयों के खिलाफ आवाज उठाई जानी चाहिए।
यह घटना अरुणाचल प्रदेश में विकास परियोजनाओं, स्थानीय विरोध और प्रेस की भूमिका के बीच के जटिल संबंधों को उजागर करती है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का बयान इस बात की याद दिलाता है कि हिंसा की जांच जरूरी है, लेकिन उसे पत्रकारों को निशाना बनाने का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए। राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से अब यह अपेक्षा की जा रही है कि वे पारदर्शिता के साथ जांच आगे बढ़ाएं और प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करें।
Read More Here:-
CBSE Class 10 Exam 2028: बोर्ड परीक्षा अब 5 विषयों की, 3 विषय हटाए गए; स्किल एजुकेशन अनिवार्य
IND vs NZ 4th T20: ऑकलैंड में न्यूजीलैंड ने भारत को 87 रनों से हराया, ग्लेन फिलिप्स का तूफानी शतक
Kal Ka Rashifal 31 October 2026: गुरु सिंह राशि में प्रवेश, मेष-धनु-कुंभ को भाग्य का साथ
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.
