Rajasthan News: राजस्थान में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत गेहूं वितरण पर संकट के संकेत हैं। करीब 27 हजार राशन दुकानों पर पोस मशीन से सत्यापन और वितरण होता है। इन मशीनों के रखरखाव का मौजूदा अनुबंध 4 सितंबर को खत्म हो रहा है। नया टेंडर चुनाव आचार संहिता के कारण आगे नहीं बढ़ पाया। समय पर नई व्यवस्था न हुई और मशीन खराब हुई तो लाभार्थी का अनिवार्य सत्यापन रुक सकता है। ऐसे में डीलर गेहूं नहीं दे सकेगा। प्रदेश में योजना से जुड़े करीब 4.34 करोड़ लाभार्थी हैं।
Rajasthan News: 4 सितंबर के बाद क्या जोखिम है
मौजूदा रखरखाव फर्म की अवधि उसी दिन समाप्त हो रही है। उसके बाद खराब मशीन ठीक करने की पुरानी व्यवस्था नहीं रहेगी। सत्यापन नहीं हुआ तो वितरण रुकने की आशंका विभाग ने जताई है। दुकान पर लाभार्थी और डीलर के बीच विवाद भी बढ़ सकता है।
रोज कितनी शिकायतें आती हैं
विभागीय स्तर पर पोस मशीन की तकनीकी खराबी की रोजाना करीब 600 शिकायतें दर्ज होती हैं। इन्हें मौजूदा फर्म ठीक करती है। पोस के साथ आईरिस स्कैनर और तौल मशीन की दिक्कत भी इसी व्यवस्था में सुलझती है। सेवा रुकने पर शिकायतों का ढेर लग सकता है।
बिना पोस गेहूं बांटना क्यों गंभीर माना गया
अधिकारियों के अनुसार योजना में पारदर्शिता के लिए पोस मशीन अनिवार्य है। बिना मशीन वितरण को गंभीर अनियमितता माना जा सकता है। इसे गबन की श्रेणी में भी रखा जा सकता है। डीलरों के लिए स्थिति पेचीदा हो सकती है। इसलिए मशीन चालू रखना जरूरी बताया गया है।
Rajasthan News: निजी कंपनी के निशुल्क ऑफर से चर्चा क्यों हुई
करीब चार दिन पहले जिला रसद अधिकारियों के मोबाइल पर एक पोस्टर संदेश आया। निजी कंपनी ने राशन डीलरों को पोस, आईरिस स्कैनर और तौल मशीन खराब होने पर निशुल्क मरम्मत और तकनीकी सहयोग का प्रस्ताव दिया। विभाग में सवाल उठा कि बिना टेंडर यह सुविधा किस आधार पर दी जा रही है।
लाभार्थियों और मासिक गेहूं का आंकड़ा
खाद्य सुरक्षा योजना में प्रदेश के करीब 4.34 करोड़ लाभार्थी हैं। प्रत्येक को हर महीने 5 किलो गेहूं मिलता है। इस हिसाब से हर माह करीब 2.20 लाख मीट्रिक टन गेहूं बंटता है। मशीनें ठप पड़ीं तो यह चक्र टूट सकता है।
राशन दुकानों का जाल कितना बड़ा है
पूरे राजस्थान में करीब 27 हजार राशन दुकानें चल रही हैं। अकेले जयपुर जिले में करीब 1200 दुकानें हैं। एक जिले में भी सेवा रुकने का असर हजारों परिवारों पर पड़ सकता है। राज्यव्यापी ठहराव और बड़ा होगा।
Rajasthan News: आचार संहिता टेंडर को कैसे रोकती है
चुनाव आचार संहिता के दौरान नई निविदा और अनुबंध पर रोक लगना आम है। विभाग पुराना ठेका खत्म होने और नया न खुल पाने के बीच फंसा है। स्रोत में चुनाव का नाम अलग से नहीं दिया गया। अटकने का कारण आचार संहिता ही बताया गया है।
लाभार्थी और डीलर दोनों क्यों चिंतित हो सकते हैं
लाभार्थी सत्यापन के बिना राशन नहीं ले पाएगा। डीलर बिना पोस बांटे तो कार्रवाई का खतरा रहेगा। दोनों तरफ दबाव बढ़ेगा। रोज 600 शिकायतों वाली व्यवस्था अगर रुक गई तो सुधार में देर लगेगी।
Rajasthan News: विभाग के सामने अगला कदम क्या है
समय रहते वैकल्पिक रखरखाव या आचार संहिता में छूट की प्रक्रिया स्रोत में स्पष्ट नहीं है। निजी कंपनी के निशुल्क प्रस्ताव पर विभाग चर्चा कर रहा है, मंजूरी का उल्लेख नहीं है। 4 सितंबर करीब है, इसलिए फैसला जल्द चाहिए।
राजस्थान में 27 हजार राशन दुकानों की पोस मशीन का रखरखाव अनुबंध 4 सितंबर को खत्म हो रहा है। नया टेंडर चुनाव आचार संहिता में अटका है। रोज करीब 600 खराबी की शिकायतें आती हैं। बिना पोस वितरण को गबन जैसी अनियमितता माना जा सकता है। योजना में 4.34 करोड़ लाभार्थी हैं और हर महीने करीब 2.20 लाख मीट्रिक टन गेहूं बंटता है। निजी कंपनी के निशुल्क रिपेयर ऑफर पर विभाग सवाल उठा रहा है। समय पर व्यवस्था न बनी तो गेहूं वितरण प्रभावित हो सकता है।
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