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Rashtriya Swayamsevak Sangh: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय प्रतिनिधि सभा बैठक बेंगलुरु में प्रारंभ

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बेंगलुरु:राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तीन दिवसीय प्रतिनिधि सभा की बैठक शुक्रवार को बेंगलुरु में प्रारंभ हुई। बैठक का शुभारंभ संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने किया। इस बैठक में संघ के पदाधिकारियों के साथ समवैचारिक संगठनों के प्रमुख भी भाग ले रहे हैं।
बैठक के प्रारंभ के बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में भाषा से संबंधित सवाल पर आरएसएस के सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने कहा कि संघ हमेशा से अपना कार्य मातृभाषा में करने पर जोर देता रहा है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही, जहां कोई व्यक्ति रहता है, वहां के लोगों से बातचीत करने और बाजार में परेशानी से बचने के लिए स्थानीय भाषा और कार्यस्थल की भाषा जानना आवश्यक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि पूर्वोत्तर के लोग दक्षिण भारत में रहते हैं, तो उन्हें वहां की भाषा सीखनी होगी, और यदि तमिलनाडु के लोग दिल्ली में रहते हैं, तो उन्हें हिंदी सीखनी होगी।
रुपये के चिह्न में बदलाव देश हित में नहीं
तमिलनाडु में रुपये के चिह्न बदलने से संबंधित सवाल पर उन्होंने कहा कि यह बदलाव देश हित में नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस विषय पर स्थानीय नेताओं और सामाजिक संगठनों को मिलकर बातचीत करनी चाहिए।
परिसीमन और एनआरसी पर विचार
परिसीमन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि सभी राज्यों की लोकसभा सीटों का संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री ने भी इस संबंध में स्पष्ट रूप से अपनी राय व्यक्त की है। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पर उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार का कार्यक्षेत्र है, लेकिन जो लोग देश में रह रहे हैं, उनकी पहचान आवश्यक है।
संघ की शाखाओं में वृद्धि
संघ की शाखाओं की संख्या को लेकर उन्होंने बताया कि वर्तमान में 51,710 स्थानों पर 83,129 शाखाएं संचालित हो रही हैं। पिछले वर्ष की तुलना में यह संख्या 10,000 बढ़ी है। उन्होंने बताया कि 58,981 ग्रामीण मंडलों में से 67 प्रतिशत में शाखाएं सक्रिय हैं। पूरे देश में एक करोड़ स्वयंसेवक कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त, देशभर में 32,149 मिलन केंद्र और 12,091 मासिक मंडलियां भी कार्यरत हैं।
यह बैठक संगठन के विस्तार, सामाजिक कार्यों और समसामयिक विषयों पर विचार-विमर्श के लिए आयोजित की गई है। संघ की यह बैठक विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखने और आगामी कार्य योजनाओं को निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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