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प्राचार्य डॉ. पी. के. गुप्ता द्वारा शहीद की तस्वीर पर माल्यार्पण

प्राचार्य डॉ. पी. के. गुप्ता द्वारा शहीद की तस्वीर पर माल्यार्पण

घाटशिला, 11 अगस्त — देश के महान सपूत एवं वीर क्रांतिकारी शहीद खुदीराम बोस के शहादत दिवस के अवसर पर घाटशिला कॉलेज में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पी. के. गुप्ता द्वारा शहीद की तस्वीर पर माल्यार्पण से हुई। इसके पश्चात डॉ. दिलचंद राम, डॉ. संदीप चंद्रा, डॉ. मोहम्मद सज्जाद, डॉ. कन्हाई बारिक और डॉ. संजय तिवारी सहित अन्य शिक्षकों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

अपने संबोधन में डॉ. कन्हाई बारिक ने कहा कि “जीवन की लंबाई नहीं, बल्कि उसका सार्थक होना महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि खुदीराम बोस आज भी हमारे दिलों में जीवित हैं। उनके पास न तो धन था, न ही बड़ी डिग्री, लेकिन उनके साहस और त्याग ने उन्हें अमर बना दिया। सुभाष चंद्र बोस स्वयं उनसे प्रेरित थे और उनके स्कूल में उनकी शहादत दिवस मनाते थे। मुंशी प्रेमचंद खुदीराम के फोटो घर में तंग करके रखे थे। उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था, जब भी मेरा हाथ लिखने से डगमगाए, इस लड़के का फोटो मुझे दिखा देना। जहां खुदीराम को जलाया गया था, वहां जाकर शरतचंद घंटों रोए थे।


घाटशिला कॉलेज के परीक्षा नियंत्रक एवं बांग्ला डिपार्टमेंट के हेड, डॉ. संदीप चंद्रा ने उनके जीवन-संघर्ष पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि मात्र 18 वर्ष की आयु में हंसते-हंसते उन्होंने अपनी जान मातृभूमि पर न्योछावर कर दी, जिससे पूरा बंगाल ही नहीं, बल्कि देशभर में क्रांति की चिंगारी फैल गई। हजारों नौजवान उनकी फांसी से प्रेरणा लेकर के देश के लिए आहुति देने को तैयार हो गए थे।

हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिलचंद राम ने कहा कि “फांसी के दिन भी खुदीराम बोस अपने रोज के दिनचर्या की तरह ही सुबह व्यायाम कर रहे थे और उनके चेहरे पर ना तो मौत की खोप थी, न ही डर, थी तो बस मुस्कान। वह मौत को भी मात दे चुके थे। आज के युवाओं को उनसे साहस और अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े होने की प्रेरणा लेनी चाहिए। हर नौजवान को हर तरह के शोषण जुल्म अत्याचार के खिलाफ अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद करनी चाहिए”।

प्राचार्य डॉ. पी. के. गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि “भले ही खुदीराम किंग्सफोर्ड को मारने में सफल नहीं हो पाए, लेकिन इतने बड़े अंग्रेज अधिकारी को मारने का संकल्प ही उनकी महानता को दर्शाता है। उनकी बहादुरी ने पूरे देश को जागृत कर दिया और अंग्रेज शासन को हिला दिया। उनकी मौत से क्रांतिकारियों को हौसला मिला, साहस मिला, क्रांतिकारी संगठन और मजबूत हो गया और देश के जगह-जगह पर लोग क्रांतिकारी संगठन से जुड़ने लगे। हमें इस तरह के क्रांतिकारी से प्रेरणा लेकर के हमेशा देश को बचाने के लिए तत्पर रहना चाहिए”।

अंत में डॉ. संजय तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में केमिस्ट्री विभाग के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद सज्जाद के साथ साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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