अमेरिका पर विदेश मंत्री जयशंकर का पलटवार, बोले भारत ने तय की रेड लाइन

पिछले एक हफ्ते में अमेरिका के कई वरिष्ठ अधिकारियों और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सलाहकारों ने भारत की नीतियों और व्यापारिक रुख पर सवाल उठाए। इन आरोपों का विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने करारा जवाब देते हुए साफ कहा कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता से कोई समझौता नहीं करेगा और न ही किसी बाहरी दबाव में झुकेगा।
“भारत ने तय की रेड लाइन्स”
जयशंकर ने कहा कि भारत ने अपने लिए कुछ रेड-लाइन्स तय की हैं। इनमें किसानों और छोटे कारोबारियों के हितों की रक्षा, राष्ट्रीय हितों के अनुरूप तेल आयात और पाकिस्तान के साथ संबंधों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को नकारना शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ कारोबारी वार्ता जारी है, लेकिन भारत अपनी प्राथमिकताओं से पीछे नहीं हटेगा।
“ट्रम्प के आरोप हास्यास्पद”
रूस से तेल खरीद पर ट्रंप प्रशासन के आरोपों को खारिज करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह आरोप बेहद हास्यास्पद हैं। “जो लोग अपने कारोबारी हितों को आगे बढ़ा रहे हैं, वे हमें कारोबार का दोषी ठहरा रहे हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यूरोपीय देश और चीन कहीं बड़े आयातक हैं, फिर भी आलोचना केवल भारत को झेलनी पड़ रही है।
पाकिस्तान को खरी-खरी
पाकिस्तान-अमेरिका रिश्तों पर भी उन्होंने तीखी टिप्पणी की। जयशंकर ने कहा कि अमेरिका और पाकिस्तान का एक-दूसरे के साथ “इतिहास” है और वे बार-बार उस इतिहास को नजरअंदाज करते रहे हैं। उन्होंने 2011 में एबटाबाद ऑपरेशन का जिक्र किया, जब अमेरिकी सेना ने पाकिस्तान में छिपे ओसामा बिन लादेन को मारा था।
मध्यस्थता के दावे को नकारा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-पाक तनाव में मध्यस्थता के दावे को जयशंकर ने पूरी तरह नकार दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 50 वर्षों से भारत की स्पष्ट नीति रही है कि पाकिस्तान के साथ संबंधों में किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार नहीं की जाएगी।
जयशंकर ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को भी अनुचित और असंगत बताया और कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाने को तैयार है।