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Jharkhand News: धनबाद के 25 साल, झारखंड राज्य बनने से विकास की कहानी, चुनौतियां और भविष्य की उम्मीदें

झारखंड 25 वर्ष: कोयले के राजा धनबाद का 25 साल का सफर, विकास और प्रदूषण का विरोधाभास

Jharkhand News: धनबाद, 5 नवंबर 2025: झारखंड राज्य बनने के 25 साल पूरे होने पर धनबाद शहर ने जश्न मनाया। यह शहर कोयला खदानों का राजा है, लेकिन इन सालों में विकास की रफ्तार ने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। धनबाद 25 वर्ष विकास की यह यात्रा मिश्रित है। एक तरफ सड़कें, स्कूल और अस्पताल बने, दूसरी तरफ प्रदूषण, बेरोजगारी और गरीबी जैसी समस्याएं बरकरार हैं। स्थानीय लोग कहते हैं कि राज्य बनने से पहले धनबाद बंगाल का हिस्सा था, लेकिन अब झारखंड का गौरव है। झारखंड राज्य 25 वर्ष के मौके पर आयोजित कार्यक्रमों में नेता, अधिकारी और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया। भविष्य में स्मार्ट सिटी और हरित ऊर्जा से धनबाद चमकेगा, ऐसी उम्मीदें जगी हैं।

धनबाद का सफर: राज्य बनने से पहले और बाद में क्या बदला?

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धनबाद झारखंड विकास 25 वर्ष की शुरुआत 2000 से हुई। पहले यह पश्चिम बंगाल का हिस्सा था, जहां कोयला मजदूरों की जिंदगी कठिन थी। राज्य बनने के बाद धनबाद जिला मुख्यालय बना। धनबाद 25 वर्ष चुनौतियां में सबसे बड़ा बदलाव इंफ्रास्ट्रक्चर का है। जीटी रोड का विस्तार हुआ, बिड़ला मंदिर और आईएससीओन जैसे पर्यटन स्थल विकसित हुए। कोयला उत्पादन बढ़ा, लेकिन मजदूरों को स्वास्थ्य सुविधाएं कम मिलीं। 25 सालों में 10 नए अस्पताल, 50 स्कूल और 20 कॉलेज बने। लेकिन ग्रामीण इलाकों में बिजली-पानी की कमी बनी रही। स्थानीय विधायक ने कहा, “धनबाद कोयले की नगरी है, लेकिन अब शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर देना होगा।” जश्न में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, जहां आदिवासी नृत्य ने रंग जमाया।

विकास की उपलब्धियां: कोयला से आगे बढ़ता धनबाद

धनबाद विकास उपलब्धियां गिनाने को हो तो लिस्ट लंबी है। कोल इंडिया लिमिटेड ने 25 सालों में उत्पादन दोगुना किया। आईआईटी (ISM) धनबाद विश्वविद्यालय बना, जहां हजारों छात्र पढ़ते हैं। रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट का विस्तार हुआ। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत पार्क और सड़कें बनीं। महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूह बढ़े, जो हस्तशिल्प से कमाई कर रही हैं। लेकिन कोविड जैसे संकट ने विकास को रोका। फिर भी, जीडीपी में धनबाद का योगदान 15% है। लोग कहते हैं, “25 सालों में धनबाद गांव से शहर बना, लेकिन और काम बाकी है।”

चुनौतियां बरकरार: प्रदूषण, बेरोजगारी और गरीबी का बोझ

धनबाद 25 वर्ष चुनौतियां में पर्यावरण सबसे बड़ी समस्या है। कोयला खदानों से धुआं और धूल ने फेफड़ों की बीमारियां बढ़ाईं। सिलिकोसिस जैसी बीमारी मजदूरों को सताती है। बेरोजगारी दर 20% से ऊपर है, युवा दिल्ली-मुंबई पलायन कर रहे। बाढ़ और जल संकट आम हो गया। झारखंड धनबाद समस्याएं सुलझाने के लिए एनजीओ और सरकार प्रयासरत हैं। एक मजदूर ने कहा, “कोयला देता है रोटी, लेकिन जिंदगी छोटी कर देता है।” 25 सालों में 5 लाख परिवार प्रभावित हुए। लेकिन उम्मीद है कि हरित ऊर्जा से नया दौर आएगा।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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