
Hindi News: झारखंड की बेटी जमुना टुडू, जिन्हें प्यार से ‘लेडी टार्जन’ कहा जाता है, एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पहले उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया और अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में विशेष डिनर के लिए आमंत्रित किया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल झारखंड के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। जमुना टुडू ने जंगलों को बचाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए जो काम किया है, उसकी वजह से आज पूरी दुनिया उनकी तारीफ करती है।
जंगल बचाने की अनोखी मुहिम
जमुना टुडू का जन्म झारखंड के मयूरभंज जिले के एक छोटे से गाँव में हुआ था। शादी के बाद जब वे अपने ससुराल गाँव रानी मटेली आईं, तो उन्होंने देखा कि जंगल तेजी से कट रहे हैं। जंगल माफियाओं द्वारा पेड़ों की बेरहमी से कटाई ने उन्हें अंदर तक हिला दिया। इसके बाद उन्होंने संकल्प लिया कि वे जंगलों की रक्षा करेंगी। जमुना ने अपने गाँव की महिलाओं को इकट्ठा किया और ‘वन रक्षा मंच’ की स्थापना की। इस मंच में अब हजारों महिलाएँ जुड़ी हैं, जो जंगल माफियाओं का डटकर सामना करती हैं।
चुनौतियों से भरा सफर
जमुना का सफर कठिनाइयों से भरा था। जंगल माफियाओं ने उन्हें बार-बार डराने की कोशिश की, पर वे अडिग रहीं। अपने दृढ़ संकल्प और नन्हा के बल पर उन्होंने जंगलों की रक्षा की। बल्कि स्थानीय लोगों को पर्यावरण के महत्व के बारे में भी जागरूक किया। उनकी इस मुहिम ने लाखों पेड़ों को कटने से बचाया और जंगलों को फिर से हरा-भरा करने में मदद की। उनके इस काम की वजह से उन्हें 2019 में भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया।
राष्ट्रपति भवन का विशेष निमंत्रण
अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जमुना टुडू को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष डिनर के लिए आमंत्रित किया है। यह निमंत्रण उनके पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कार्यों के लिए एक बड़ा सम्मान है। इस आयोजन में उनके साथ झारखंड के राँची के रामदास टुडू भी शामिल होंगे। यह मौका जमुना के लिए बेहद खास है, क्योंकि यह उनके संघर्ष और समर्पण को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाता है।
प्रेरणा का स्रोत हैं जमुना
जमुना टुडू की कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है, जो अपने छोटे-छोटे प्रयासों से समाज और पर्यावरण के लिए कुछ करना चाहता है। उनका साहस, मेहनत और जुनून यह सिखाता है कि अगर दिल में लगन हो, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। आज जमुना न केवल झारखंड की, बल्कि पूरे देश की बेटी बन चुकी हैं, जिनका काम हर किसी को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करता है।