सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि “बोलने की आजादी का मतलब यह नहीं कि कोई व्यक्ति कुछ भी बोल सकता है।” अदालत ने साफ किया कि हर नागरिक को अपनी जुबान और शब्दों पर नियंत्रण रखना सीखना चाहिए, खासकर डिजिटल माध्यमों पर।...
