New Delhi: टाटा समूह में टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर ट्रस्ट्स और कंपनी के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। टाटा ट्रस्ट्स ने 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक में चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाए रखने के फैसले की वैधता पर सवाल उठाए हैं। ट्रस्ट्स का कहना है कि टाटा संस के Articles of Association (AoA) में ट्रस्ट की ओर से नामित निदेशकों से जुड़ी विशेष शर्तों का पालन जरूरी था।
4-1 वोटिंग को लेकर ट्रस्ट्स की अलग दलील
टाटा संस के बोर्ड में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव 4-1 वोट से पास हुआ था। हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि पूरे बोर्ड के वोटों का यह आंकड़ा निर्णायक नहीं है। ट्रस्ट्स के मुताबिक, AoA में ट्रस्ट-नामित निदेशकों से संबंधित अलग प्रावधान है, जिसे पूरा करना जरूरी था।
ट्रस्ट्स का दावा है कि प्रस्ताव को प्रभावी बनाने के लिए बोर्ड में कम से कम 66 प्रतिशत समर्थन के साथ-साथ टाटा ट्रस्ट्स की ओर से नियुक्त दोनों निदेशकों की सहमति भी आवश्यक थी।
नोएल टाटा ने किया विरोध
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध किया था, जबकि दूसरे ट्रस्ट-नामित निदेशक वेणु श्रीनिवासन ने प्रस्ताव का समर्थन किया। ट्रस्ट्स का तर्क है कि दो ट्रस्ट-नामित निदेशकों में से केवल एक की सहमति पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
कास्टिंग वोट पर भी विवाद
ट्रस्ट्स ने चेयरमैन के कास्टिंग वोट के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कास्टिंग वोट तभी इस्तेमाल किया जा सकता है जब पूरे बोर्ड के स्तर पर वोट बराबर हों। ट्रस्ट्स के अनुसार, दो ट्रस्ट-नामित निदेशकों के बीच मतभेद को बोर्ड स्तर का गतिरोध नहीं माना जा सकता।

ट्रस्ट्स ने प्रस्ताव को बताया ‘शुरू से ही शून्य’
टाटा ट्रस्ट्स ने 17 सितंबर के प्रस्ताव को वैध नहीं माना है। उसके अनुसार यह प्रस्ताव “शुरू से ही कानूनी रूप से शून्य” है और इसका कानूनी प्रभाव नहीं होना चाहिए। दूसरी ओर, टाटा संस चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को बोर्ड द्वारा मंजूर प्रस्ताव के आधार पर आगे बढ़ा रही है।
साइरस मिस्त्री मामले का भी जिक्र
ट्रस्ट्स ने अपने पक्ष में पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री से जुड़े मामले का भी हवाला दिया है। ट्रस्ट्स के मुताबिक, उस समय टाटा संस ने सुप्रीम कोर्ट के सामने AoA के Articles 104B और 121 के तहत ट्रस्ट-नामित निदेशकों के विशेष मतदान अधिकारों का बचाव किया था। मौजूदा विवाद में इन्हीं अधिकारों की व्याख्या महत्वपूर्ण हो गई है।
विवाद सिर्फ चेयरमैन पद तक सीमित नहीं
टाटा समूह में मतभेद का एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग भी है। 17 सितंबर को बोर्ड ने कंपनी को संभावित रूप से सूचीबद्ध करने की दिशा में कदम उठाने को मंजूरी दी थी। वहीं टाटा ट्रस्ट्स लिस्टिंग के पक्ष में नहीं है और दूसरे विकल्पों पर विचार करने की बात कह चुका है।
फिलहाल चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर मुख्य विवाद टाटा संस के AoA में ट्रस्ट्स के विशेष अधिकारों की कानूनी व्याख्या और 17 सितंबर के बोर्ड प्रस्ताव की वैधता पर केंद्रित है।

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