UP News: लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर बार बार दोहराए जा रहे सड़क हादसों को केवल चेतावनी बोर्ड से नहीं, ढांचे में बदलाव से रोकने की तैयारी है। एनएचएआई उन स्थानों पर 7 अंडरपास और एक फ्लाईओवर बनवाएगा, जिन्हें कुछ समय पहले हुए सेफ्टी ऑडिट में ज्यादा हादसे वाले बिंदुओं के रूप में चिह्नित किया गया था। पूरे निर्माण पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च होने हैं।
टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। काम अगले महीने शुरू होने की उम्मीद है। फ्लाईओवर सफेदाबाद में हाईवे के किमी 19.140 पर प्रस्तावित है और इसकी लागत करीब 75.93 करोड़ रुपये बताई गई है। बाकी सात अंडरपास दादरा से अरकुना तक अलग अलग किलोमीटर पर बनेंगे।
यह योजना स्थानीय आवाजाही और हाईवे के तेज यातायात को अलग करने पर टिकी है। कई जगह पीडब्ल्यूडी के अन्य जिला मार्ग और मुख्य जिला मार्ग सीधे हाईवे से जुड़ते हैं। दूरी घटाने के लिए वाहन गलत दिशा पकड़ लेते हैं और आमने सामने टक्कर का खतरा बढ़ जाता है।
लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर हादसे क्यों हो रहे हैं?
हाईवे के कई हिस्सों में जिला मार्ग एक ही समतल पर मुख्य सड़क से मिलते हैं। गांव या कस्बे से आने वाले चालक को दूसरी तरफ निकलने के लिए लंबा चक्कर काटना पड़ता है। समय बचाने की कोशिश में कई वाहन हाईवे पर उलटी दिशा में चल पड़ते हैं। एनएचएआई के अनुसार इसी आवाजाही से आमने सामने की टक्कर और दूसरे तरह के हादसों का जोखिम बढ़ता है।
सेफ्टी ऑडिट में इन्हीं जगहों को ज्यादा हादसे वाले स्थान के रूप में दर्ज किया गया था। अब वहां अस्थायी उपाय की जगह स्थायी सुधार का निर्माण शुरू किया जा रहा है। एनएचएआई का मानना है कि अंडरपास और फ्लाईओवर बनने के बाद यातायात का बहाव सुधरेगा और गलत दिशा में वाहन चलाने की जरूरत घटेगी। हादसों पर लगाम लगने की उम्मीद इसी बदलाव से जोड़ी गई है।
यात्रियों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि जिला सड़क से हाईवे पर चढ़ना और हाईवे पार करना अलग संरचना से होगा। लंबी दूरी की गाड़ियां अपनी लेन में रहेंगी और स्थानीय वाहन क्रॉसिंग के लिए गलत दिशा का सहारा कम लेंगे। ऑडिट में चिह्नित बिंदुओं को ही निर्माण के लिए चुना गया है, इसलिए काम पूरे हाईवे पर एक साथ नहीं, चुनिंदा मोड़ों पर होगा।
टेंडर पूरा हो चुका है, काम कब शुरू होगा?
अंडरपास और फ्लाईओवर के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। परियोजना अब जमीन पर उतारने की तैयारी में है। एनएचएआई के मुताबिक सभी निर्माण कार्यों पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च होंगे और अगले महीने से काम शुरू होने की उम्मीद है।
क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित ने संबंधित परियोजना अधिकारियों को निर्माण की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। जोर दो बातों पर है। काम निर्धारित मानकों के अनुसार पूरा हो और निर्माण के दौरान हाईवे पर यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो।
दूसरा निर्देश रोजाना इस रास्ते से निकलने वालों के लिए महत्वपूर्ण है। हाईवे पर खुदाई और संरचना खड़ी होने के दौरान लेन संकरी हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि आवाजाही बाधित न हो, इसका ध्यान रखा जाएगा। गुणवत्ता की निगरानी इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि ये संरचनाएं उन्हीं बिंदुओं पर बन रही हैं जहां हादसों का रिकॉर्ड पहले से भारी है। कमजोर काम सुरक्षा के मकसद को अधूरा छोड़ सकता है।
सफेदाबाद में फ्लाईओवर कहां और कितने में बनेगा?
लखनऊ-अयोध्या राजमार्ग पर एकमात्र फ्लाईओवर सफेदाबाद में बनेगा। स्थान हाईवे का किमी 19.140 है। निर्माण लागत करीब 75.93 करोड़ रुपये रखी गई है। यह बिंदु यातायात के दबाव और सड़क कनेक्टिविटी की वजह से चुना गया है। यहां हादसों का खतरा बना रहता है।
सफेदाबाद हाईवे के शुरुआती हिस्से में आता है, जहां जुड़ने वाले मार्ग और वाहनों की भीड़ दोनों साथ हैं। फ्लाईओवर से एक धारा को ऊपर निकालने की योजना है, ताकि समतल पर सीधी टक्कर का मौका घटे। कुल 450 करोड़ की परियोजना में यह हिस्सा अलग से चिह्नित है। शेष राशि सात अंडरपासों पर खर्च होगी।
सात अंडरपास किन जगहों पर प्रस्तावित हैं?
हाईवे पर कुल सात अंडरपास बनेंगे। दादरा में किमी 40.385, भिटरिया में किमी 62.85, रानीमऊ में किमी 70.6, कूढ़ा सादात में किमी 85.5, भेलसर में किमी 88.675, सत्ती चौरा में किमी 96.5 और अरकुना में किमी 104.480 पर निर्माण प्रस्तावित है।
ये बिंदु किमी 40 से किमी 104 के बीच फैले हैं। सुधार एक ही मोड़ तक सीमित नहीं है। हर स्थान सेफ्टी ऑडिट में हादसा संभावित जगह के रूप में चिह्नित हुआ था। अंडरपास का काम जिला मार्ग और हाईवे के सीधे टकराव को तोड़ना है, ताकि स्थानीय वाहन दूसरी तरफ निकलने के लिए उलटी लेन न पकड़ें।
दादरा और भिटरिया शुरुआती खंड में हैं। रानीमऊ, कूढ़ा सादात और भेलसर मध्य हिस्से में करीब करीब आते हैं। सत्ती चौरा और अरकुना आगे के किलोमीटर पर हैं। इतने फैलाव का अर्थ यह है कि लखनऊ से अयोध्या की तरफ बढ़ते यात्रियों को एक नहीं, कई बिंदुओं पर निर्माण क्षेत्र दिख सकता है। एनएचएआई को उम्मीद है कि इन अंडरपास और फ्लाईओवर के बाद वाहनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी और हादसों वाले स्थानों पर सड़क सुरक्षा बेहतर होगी।
निर्माण का यात्रियों और आसपास के गांवों पर क्या असर पड़ेगा?
लखनऊ-अयोध्या हाईवे लंबी दूरी के यात्रियों के साथ उन लोगों का भी रास्ता है, जिनके गांव और कस्बे जिला मार्गों से मुख्य सड़क पर जुड़ते हैं। गलत दिशा में चलने की मजबूरी इसी जुड़ाव से पैदा होती है। अंडरपास और फ्लाईओवर उसी मजबूरी को घटाने के लिए रखे गए हैं।
काम अगले महीने शुरू होने की उम्मीद है, इसलिए आने वाले हफ्तों में इन आठ स्थानों पर यातायात प्रबंधन तय करेगा कि सफर कितना प्रभावित होता है। अब्दुल बासित के निर्देश में गुणवत्ता और आवाजाही दोनों शामिल हैं। मानक पूरे हों और हाईवे रुकने न पाए, यही जोर है।
सफेदाबाद का फ्लाईओवर किमी 19.140 पर करीब 75.93 करोड़ में बनेगा। सात अंडरपास दादरा, भिटरिया, रानीमऊ, कूढ़ा सादात, भेलसर, सत्ती चौरा और अरकुना में अपने अपने किलोमीटर पर खड़े होंगे। पूरी परियोजना पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च होंगे और टेंडर पूरा हो चुका है। हादसों में कमी की उम्मीद ऑडिट में दर्ज इन्हीं स्थानों पर स्थायी सुधार से जोड़ी गई है। असली नतीजा तब साफ होगा, जब निर्माण पूरा होकर वाहन नई संरचना पर आने लगेंगे।
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