Top 5 This Week

Related Posts

UP News: लखनऊ में ₹265 करोड़ का बस टर्मिनल बनाने की मंजूरी, जानें किस काम पर खर्च होंगे 205 करोड़ रुपये

UP News: उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने शुक्रवार को लखनऊ में आधुनिक बस टर्मिनल की परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर विकसित करने की मंजूरी दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक का यह फैसला दर्ज है। कुल लागत 265 करोड़ रुपये बताई गई है। इसमें 60 करोड़ रुपये बस टर्मिनल के निर्माण पर और 205 करोड़ रुपये वाणिज्यिक सुविधाओं के विकास पर खर्च होंगे। जमीन की कीमत इस लागत में शामिल नहीं है।

नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा के मुताबिक वृंदावन योजना की पी-4 पार्किंग में करीब 7.06 एकड़ जमीन निर्धारित की गई है। टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय, रेस्तरां, एटीएम और पार्किंग जैसी सुविधाओं का जिक्र है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन और चार्जिंग के लिए अलग व्यवस्था भी बताई गई है। निर्माण पूरा होने की तारीख या बसें कब से यहां रुकेंगी, यह खबर नहीं कहती।

लागत का बंटवारा कैसे हुआ है?

265 करोड़ में 60 करोड़ टर्मिनल निर्माण और 205 करोड़ वाणिज्यिक सुविधाओं पर हैं। जमीन अलग से है और उसकी कीमत लागत में नहीं जोड़ी गई। पीपीपी मॉडल पर निजी कंपनी निर्माण और वित्तीय व्यवस्था संभालेगी। निर्माण के बाद बस टर्मिनल नगरीय परिवहन निदेशालय को बिना किसी कीमत के सौंप दिया जाएगा। संचालन और प्रबंधन का जिम्मा निजी कंपनी के पास रहेगा। कंपनी को बस टर्मिनल का 35 साल और वाणिज्यिक सुविधाओं का 90 साल तक रखरखाव करना होगा। ये अवधि रखरखाव की हैं। स्वामित्व का पूरा ब्योरा लेख में नहीं खुला।

इलेक्ट्रिक बसों की संख्या और नई व्यवस्था क्या है?

लखनऊ में फिलहाल दुबग्गा डिपो से 116 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। 300 और इलेक्ट्रिक बसें चलाने की प्रक्रिया जारी बताई गई है। बसों की संख्या बढ़ने पर ठहराव और संचालन के लिए अतिरिक्त जगह की जरूरत का हवाला दिया गया है। नए टर्मिनल में बसों की पार्किंग, चार्जिंग स्टेशन, मरम्मत केंद्र और कर्मचारियों के विश्राम कक्ष बनाए जाएंगे। सुरक्षा के लिए अलग कक्ष की व्यवस्था भी होगी। 116 मौजूदा आंकड़ा है। 300 की प्रक्रिया पूरी होने की तारीख नहीं है। टर्मिनल इन सभी बसों को एक साथ संभालेगा, यह अभी दावा नहीं।

यात्रियों को कौन सी सुविधाएं बताई गई हैं?

परिसर में टिकट काउंटर, पूछताछ केंद्र, प्रतीक्षालय और सामान रखने की सुविधा होगी। रेस्तरां, कॉफी शॉप और फास्ट फूड की दुकानें भी बनाई जाएंगी। मेडिकल स्टोर, बैंक, एटीएम, सार्वजनिक शौचालय और वाटर एटीएम का जिक्र है। ये रोजमर्रा की सेवाएं एक परिसर में देने का प्रस्ताव है। एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं शीर्षक की भाषा है। लेख खुद टिकट काउंटर से लेकर रेस्तरां और पार्किंग तक गिनाता है। फ्लाइट टर्मिनल की तुलना विस्तृत सूची से साबित नहीं होती।

निविदा में कौन सी कंपनी आगे है?

परियोजना के लिए जारी निविदा में चार कंपनियों ने हिस्सा लिया था। सबसे अधिक बोली लगाने वाली ओबेक्स लिमिटेड को काम सौंपने का प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव है, अंतिम अनुबंध या काम शुरू होने की तारीख नहीं। निर्माण निजी कंपनी करेगी और प्रबंधन भी उसी के पास रहेगा। टर्मिनल निदेशालय को बिना कीमत के सौंपने और 35 तथा 90 साल के रखरखाव की शर्तें ऊपर दी गई हैं। चार कंपनियों के नाम लेख में नहीं हैं।

यह फैसला अभी क्या नहीं बताता?

कैबिनेट मंजूरी शुक्रवार की है और रिपोर्ट 10 अक्टूबर 2026 सुबह की है। जमीन 7.06 एकड़ पी-4 पार्किंग में है। लागत 265 करोड़ है और जमीन अलग है। 116 इलेक्ट्रिक बसें दुबग्गा से चल रही हैं और 300 और की प्रक्रिया जारी है। यात्री सुविधाओं की सूची प्रस्ताव है। निर्माण कब पूरा होगा, किराया क्या रहेगा और मौजूदा डिपो बंद होंगे या नहीं, यह खबर में नहीं है। वाराणसी से विंध्याचल की 86 पूजा स्पेशल बसों वाली संबंधित खबर अलग है। वह इस टर्मिनल का हिस्सा नहीं।

Read More Here

Netsha Singh
Author: Netsha Singh

वोटिंग जानकारी लोड हो रही है...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles