UP News: प्रदेश में हाईस्पीड रेल नेटवर्क की तैयारी जोरों पर है। दिल्ली से वाराणसी तक बुलेट ट्रेन चलाने की योजना पर काम तेज हो गया है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इस कॉरिडोर की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रेल मंत्रालय को अंतिम मंजूरी के लिए भेज दी है। मंजूरी मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इस प्रस्तावित हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की लंबाई करीब 865 किलोमीटर बताई जा रही है और इसकी अनुमानित लागत 1.21 लाख करोड़ रुपये है। ट्रेन की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा और परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। योजना के मुताबिक दिल्ली से वाराणसी का सफर लगभग 3 घंटे 50 मिनट में पूरा हो सकेगा, जबकि फिलहाल सामान्य ट्रेनों से इस दूरी में 11 से 12 घंटे लगते हैं।
लखनऊ से वाराणसी कितने समय में पहुंचाएगी बुलेट ट्रेन?
सबसे ज्यादा चर्चा लखनऊ-वाराणसी सेक्शन को लेकर हो रही है। प्रस्तावित समय के अनुसार दोनों शहरों के बीच की यात्रा महज 1 घंटा 20 मिनट में पूरी हो सकेगी। अभी एक्सप्रेस ट्रेनों से यह सफर लगभग 4 से 6 घंटे में पूरा होता है। प्रयागराज से वाराणसी करीब 30 मिनट और प्रयागराज से लखनऊ लगभग 55 मिनट में पहुंचने का अनुमान है।
इससे प्रदेश के प्रमुख शहरों के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। व्यापार, शिक्षा और पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए समय की बचत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। परियोजना के पूरा होने पर पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।
बुलेट ट्रेन किन शहरों से होकर गुजरेगी?
प्रस्तावित रूट में उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहर शामिल किए गए हैं। इनमें नोएडा सेक्टर-146, जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी शामिल हैं। वाराणसी में मंडुआडीह स्टेशन प्रस्तावित है।
नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में तीन स्टेशन बनाने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। जेवर एयरपोर्ट के पास भूमिगत स्टेशन और करीब 8.8 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड ट्रैक का प्रस्ताव है। कॉरिडोर का ज्यादातर हिस्सा एलिवेटेड रखने की योजना है, ताकि जमीन की जरूरत कम हो और निर्माण में आसानी रहे। स्टेशनों और रूट की अंतिम स्थिति मंजूरी के बाद स्पष्ट होगी।
अयोध्या तक कनेक्टिविटी की क्या योजना है?
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लखनऊ से अयोध्या के बीच करीब 135 किलोमीटर लंबा लिंक बनाने का प्रस्ताव है। इसके पूरा होने पर दिल्ली से अयोध्या तक की यात्रा लगभग 3 घंटे में पूरी होने का अनुमान है। राम मंदिर दर्शन के लिए आने वाले यात्रियों को भविष्य में तेज कनेक्टिविटी मिल सकती है।
अयोध्या लिंक की अंतिम स्थिति और निर्माण योजना स्वीकृत परियोजना पर निर्भर करेगी। अगर यह लिंक बन जाता है तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली से अयोध्या की दूरी काफी कम हो जाएगी। इससे पर्यटन क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
परियोजना की वर्तमान स्थिति और समयसीमा क्या है?
NHSRCL ने कॉरिडोर की DPR तैयार कर समीक्षा और अंतिम मंजूरी के लिए रेल मंत्रालय को भेज दी है। परियोजना के लिए ग्राउंड और एरियल LiDAR सर्वे पूरा हो चुका है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 2027-28 तक निर्माण शुरू करने और 2031 तक परिचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि ये समयसीमाएं सरकारी मंजूरी और भूमि अधिग्रहण की प्रगति पर निर्भर करेंगी।
कॉरिडोर का ज्यादातर हिस्सा एलिवेटेड रखने से जमीन अधिग्रहण की जटिलता कम हो सकती है। जेवर एयरपोर्ट क्षेत्र में भूमिगत हिस्से का प्रस्ताव भी कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंजूरी मिलने के बाद विस्तृत निर्माण योजना और समयसारणी स्पष्ट होगी।
इस परियोजना से उत्तर प्रदेश को क्या फायदा हो सकता है?
दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड कॉरिडोर से प्रदेश के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी हिस्सों के बीच तेज रेल कनेक्टिविटी विकसित होने की उम्मीद है। यात्रा समय में भारी कमी से व्यापारिक गतिविधियों, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों के बीच आवाजाही आसान होने से आर्थिक गतिविधियों को बल मिल सकता है।
जेवर एयरपोर्ट के पास स्टेशन बनने से हवाई और रेल कनेक्टिविटी का बेहतर संयोजन भी संभव हो सकता है। हालांकि परियोजना अभी DPR चरण में है और अंतिम मंजूरी तथा भूमि अधिग्रहण के बाद ही निर्माण आगे बढ़ेगा। यदि योजना तय समय पर पूरी होती है तो उत्तर प्रदेश की रेल यात्रा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है।
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