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UP News: अखिलेश यादव का बड़ा दावा, SSR के जरिए फर्जी वोट जोड़ने की तैयारी, चुनाव आयोग पर निशाना

UP News: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक तीखापन बढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की Special Summary Revision (SSR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पहले SIR के माध्यम से असली मतदाताओं के नाम काटे गए और अब SSR के जरिए फर्जी वोट जोड़ने की तैयारी हो रही है। अखिलेश ने इसे भाजपा के इशारे पर चलने वाला खेल बताया और कहा कि सपा कार्यकर्ता पूरी तरह सतर्क हैं।

यह बयान तब आया जब चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR शुरू करने का निर्देश दिया है। अखिलेश यादव पिछले कुछ दिनों से मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर अभियान चला रहे हैं और इसके सबूत भी पेश कर चुके हैं।

अखिलेश यादव ने SSR पर क्या आरोप लगाया है?

सपा सुप्रीमो का कहना है कि चुनाव आयोग ने पहले Special Intensive Revision (SIR) के जरिए Genuine मतदाताओं के नाम हटाए। अब जब SSR की प्रक्रिया शुरू हो रही है, तो इसमें फर्जी नाम जोड़ने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा मामला भाजपा के निर्देश पर चल रहा है। अखिलेश ने कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता एक भी फर्जी वोटर को सूची में नहीं जुड़ने देंगे।

उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि मतदाता सूची में बार-बार संशोधन न किया जाए। उनका कहना था कि एक बार पूरी तैयारी के साथ SSR शुरू करने का फैसला हो चुका है, तो आखिरी नामांकन तक इसे SSR ही रहने दें। बार-बार रिविजन से भ्रम फैलता है और असली प्रक्रिया प्रभावित होती है।

अखिलेश यादव ने क्या सबूत पेश किया?

इससे पहले गुरुवार को अखिलेश यादव एक युवा मतदाता को लेकर सामने आए थे। उन्होंने विकास यादव नाम के फर्स्ट टाइम वोटर को पेश करते हुए कहा कि इस युवक ने सिर्फ एक जगह वोट के लिए आवेदन किया था। लेकिन उसका नाम अलग-अलग 10 सूचियों में जोड़ दिया गया। अखिलेश का आरोप था कि भाजपा नेताओं ने ऐसा इसलिए किया ताकि चुनाव के दौरान फर्जी वोट डाले जा सकें।

सपा का दावा है कि उनकी पार्टी के PDA प्रहरियों ने कई विधानसभा क्षेत्रों का डेटा तैयार किया है, जिसमें एक ही व्यक्ति के कई जगह नाम दर्ज होने के मामले सामने आए हैं। अखिलेश ने कहा कि उनकी पार्टी ने 100 सीटों से जुड़ी अनियमितताओं का डेटा चुनाव आयोग को सौंप दिया है।

SSR और SIR में क्या फर्क है और अखिलेश का तर्क क्या है?

SIR यानी Special Intensive Revision गहन स्तर पर मतदाता सूची की जांच और संशोधन की प्रक्रिया है, जिसमें नए नाम जोड़ने और पुराने नाम हटाने का काम होता है। SSR यानी Special Summary Revision अपेक्षाकृत संक्षिप्त और तेज प्रक्रिया मानी जाती है। अखिलेश यादव का तर्क है कि SIR के बाद अब SSR शुरू करने से पिछली प्रक्रिया शून्य जैसी हो गई है। उन्होंने कहा कि अगर SSR को पलट दिया जाए तो वह RSS बन जाता है।

उनका कहना है कि अब बहुत से लोग भाजपा के साथ नहीं रहना चाहते। जब अन्य योजनाएं काम नहीं कर रही हैं, तो मतदाता सूची के माध्यम से साजिश रची जा रही है। सपा इस बात के खिलाफ है कि एक ही प्रक्रिया के ऊपर दूसरी प्रक्रिया चलाई जाए।

विपक्षी दलों ने अखिलेश यादव के आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी?

अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता और मंत्री ओपी राजभर ने कहा कि चुनाव में अखिलेश को अपनी हार साफ दिख रही है, इसलिए वे मतदाता सूची के नाम पर लोगों में भ्रम फैला रहे हैं। राजभर का कहना था कि चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट को दुरुस्त कर दिया है और अखिलेश के फर्जी वोटर हटा दिए गए हैं। इसी कारण वे परेशान हैं।

राजभर ने कहा कि असली मतदाताओं के नाम काटे जाने का दावा गलत है। उनके अनुसार आयोग ने साफ-सुथरी सूची तैयार की है और अब विपक्ष को इसकी आलोचना करने की जरूरत नहीं है।

आगे क्या हो सकता है और मतदाताओं को क्या ध्यान रखना चाहिए?

यह विवाद 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ रहा है। सपा कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि 17 और 24 अक्टूबर को अपने बूथों पर मौजूद रहकर नए मतदाताओं के नाम जुड़वाने और फर्जी प्रविष्टियों पर नजर रखने का काम करें। चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है, हालांकि प्रक्रिया पारदर्शी बताई जा रही है।

आम मतदाताओं के लिए सलाह है कि वे अपने नाम की स्थिति चुनाव आयोग की वेबसाइट या वोटर हेल्पलाइन से जांच लें। अगर नाम गायब है या दोहरा है, तो समय रहते फॉर्म भरकर सुधार कराएं। बार-बार संशोधन की प्रक्रिया में नाम कटने या जुड़ने की शिकायतें पहले भी आई हैं, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। राजनीतिक दलों के आरोपों और जवाबों के बीच आखिरकार मतदाता सूची की शुद्धता ही सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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