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UP Special TET 2026: स्पेशल टीईटी में शिक्षामित्रों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका याचिका खारिज, जानें पूरा मामला

UP Special TET 2026: उत्तर प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षामित्रों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पेशल टीईटी परीक्षा में शामिल होने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। वसीम अहमद समेत 220 शिक्षामित्रों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना था कि उन्हें भी इस परीक्षा में बैठने का अधिकार मिलना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सामान्य टीईटी की पात्रता से स्पेशल टीईटी में प्रवेश का हक स्वतः नहीं बनता।

यह फैसला उन हजारों शिक्षामित्रों के लिए निराशा लेकर आया है जो अभी तक टीईटी पास नहीं कर पाए हैं। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कुल करीब 1.43 लाख शिक्षामित्र कार्यरत बताए जाते हैं। इनमें से लगभग 73 हजार ऐसे हैं जिन्होंने अब तक टीईटी क्वालीफाई नहीं किया है। वहीं करीब 70 हजार शिक्षामित्र यूपीटीईटी पास कर चुके हैं। स्पेशल टीईटी में शामिल होने की मांग मुख्य रूप से उन लोगों की ओर से आई थी जो परीक्षा पास नहीं कर सके हैं।

शिक्षामित्र और शिक्षक की कानूनी स्थिति अलग क्यों मानी गई?

हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई के दौरान शिक्षक और शिक्षामित्र की कानूनी स्थिति को अलग माना। अदालत ने कहा कि सामान्य टीईटी में बैठने की योग्यता मात्र से स्पेशल टीईटी में शामिल होने का अधिकार नहीं मिल जाता। कोर्ट का स्पष्ट मत था कि संविधान राज्य को हर उस अंतर को खत्म करने के लिए बाध्य नहीं करता जो किसी वैध कानूनी उद्देश्य पर आधारित हो।

यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षामित्र लंबे समय से अपनी स्थिति को नियमित शिक्षकों के बराबर मानने की मांग करते रहे हैं। वे स्थायी नौकरी और सहायक शिक्षक पद पर समायोजन चाहते हैं। प्रदर्शन के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने इन दोनों वर्गों के बीच कानूनी अंतर को स्वीकार किया और याचिका खारिज कर दी।

स्पेशल टीईटी परीक्षा की क्या है पूरी प्रक्रिया?

राज्य शिक्षा सेवा चयन आयोग ने स्पेशल टीईटी का विज्ञापन तीन सितंबर को जारी किया था। आवेदन प्रक्रिया पांच सितंबर से शुरू हुई। अभ्यर्थी चार अक्टूबर तक परीक्षा शुल्क जमा कर सकते हैं। आवेदन में सुधार की अंतिम तारीख आठ अक्टूबर तय की गई है। परीक्षा तीन नवंबर को होगी।

परीक्षा में 150 अंकों के 150 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे। अभ्यर्थियों को ढाई घंटे का समय मिलेगा। परीक्षा में निगेटिव मार्किंग नहीं होगी। यह विशेष परीक्षा मुख्य रूप से उन कार्यरत शिक्षकों के लिए बनाई गई है जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना अनिवार्य है। शिक्षामित्रों का तर्क था कि जब कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष मार्ग खोला गया तो उन्हें भी मौका मिलना चाहिए। कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

कितने शिक्षामित्र अभी टीईटी पास नहीं कर सके?

प्रदेश में कार्यरत करीब 1.43 लाख शिक्षामित्रों में से लगभग 73 हजार अभी भी टीईटी पास नहीं कर पाए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में लोग अभी भी योग्यता परीक्षा से बाहर हैं। दूसरी ओर करीब 70 हजार शिक्षामित्र पहले ही यूपीटीईटी पास कर चुके हैं। स्पेशल टीईटी में बैठने की मांग इन्हीं 73 हजार लोगों के बीच सबसे ज्यादा जोरशोर से उठी थी।

शिक्षामित्रों का कहना रहा है कि वे लंबे समय से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं और उनका अनुभव पर्याप्त है। वे चाहते थे कि विशेष परीक्षा का लाभ उन्हें भी मिले। लेकिन हाईकोर्ट ने कानूनी स्थिति को आधार बनाते हुए याचिका खारिज कर दी। अब ये 73 हजार शिक्षामित्र सामान्य मार्ग से ही टीईटी पास करने की कोशिश करेंगे।

हाईकोर्ट के फैसले का शिक्षामित्रों पर क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले के बाद शिक्षामित्रों को स्पेशल टीईटी में शामिल होने का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है। वे अब नियमित टीईटी परीक्षाओं पर निर्भर रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार कार्यरत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना जरूरी है। शिक्षामित्रों के लिए भी यही समयसीमा लागू रहेगी अगर वे नियमित शिक्षकों की श्रेणी में आने की कोशिश करते हैं।

फैसला उन लोगों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है जो स्थायी नियुक्ति और सहायक शिक्षक पद पर समायोजन की उम्मीद लगाए बैठे थे। प्रदर्शन और याचिका के बावजूद अदालत ने कानूनी अंतर को बरकरार रखा। अब शिक्षामित्र संगठनों को नई रणनीति पर काम करना पड़ सकता है। वे या तो नियमित परीक्षा में सफलता हासिल करने पर ध्यान देंगे या फिर आगे कोई और कानूनी विकल्प तलाशेंगे।

अब आगे क्या विकल्प बचे हैं?

हाईकोर्ट के फैसले के बाद शिक्षामित्रों के पास मुख्य विकल्प नियमित टीईटी परीक्षा में बैठना ही रह गया है। जो लोग पहले से यूपीटीईटी पास कर चुके हैं उनकी स्थिति बेहतर है। बाकी 73 हजार लोगों को अब सामान्य परीक्षाओं की तैयारी पर जोर देना होगा। स्पेशल टीईटी का विज्ञापन पहले ही जारी हो चुका है और आवेदन प्रक्रिया चल रही है। परीक्षा तीन नवंबर को होगी।

शिक्षामित्र लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सक्रिय रहे हैं। स्थायी नौकरी और समायोजन की उनकी मांग पुरानी है। इस बार भी प्रदर्शन के बाद अदालत का रुख साफ हो गया। कोर्ट ने शिक्षक और शिक्षामित्र के बीच के अंतर को वैध माना। अब आगे की राह परीक्षा पास करने और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करने से होकर गुजरती है।

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के शिक्षा तंत्र में कार्यरत एक बड़े वर्ग से जुड़ा है। करीब डेढ़ लाख शिक्षामित्र स्कूलों में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उनमें से आधे से ज्यादा अभी टीईटी पास नहीं कर पाए हैं। हाईकोर्ट का फैसला इनकी उम्मीदों पर पानी फेरने वाला साबित हुआ है। साथ ही यह भी साफ हो गया कि कानूनी स्थिति में अंतर को आसानी से खत्म नहीं किया जा सकता। अब शिक्षामित्रों को अपनी योग्यता बढ़ाने और नियमित मार्ग अपनाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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