पटना : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार, 10 जनवरी 2025 की सुबह राजद के विधायक और बिहार के पूर्व मंत्री आलोक मेहता के पटना स्थित सरकारी आवास पर छापेमारी की। ED की टीम सुबह-सुबह उनके आवास पर पहुंची और सर्च ऑपरेशन शुरू किया। शुरुआत में कार्रवाई की वजह साफ नहीं थी, लेकिन बाद में सामने आया कि यह छापेमारी वैशाली के एक सहकारी बैंक में हुए करोड़ों रुपये के कथित लोन घोटाले से जुड़ी है।
राजद विधायक आलोक मेहता के आवास पर ED की छापेमारी
मुख्य बातें
- किस मामले में हुई छापेमारी
- कई राज्यों में एक साथ कार्रवाई
- कौन हैं आलोक मेहता
- चार लोगों की गिरफ्तारी

किस मामले में हुई छापेमारी
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, ED ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत वैशाली शहरी विकास सहकारी बैंक से जुड़े करीब 85 करोड़ रुपये के कथित लोन फर्जीवाड़े की जांच के सिलसिले में की। आरोप है कि बैंक में सैकड़ों फर्जी खातों के जरिए कर्ज दिए गए और इसके लिए फर्जी वेयरहाउस रसीदों और बीमा दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की जांच में यह गड़बड़ी सामने आई थी, जिसके बाद वैशाली के नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। इन्हीं एफआईआर के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। बताया गया कि दिसंबर 2024 के आखिर में RBI ने इस बैंक का लाइसेंस भी रद्द कर दिया था।
कई राज्यों में एक साथ कार्रवाई
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, ED ने इस मामले में बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में करीब 19 ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली। इनमें आलोक मेहता का पटना स्थित आवास और उनसे जुड़े अन्य लोगों के ठिकाने शामिल थे। रिपोर्टों के अनुसार, यह बैंक आलोक मेहता के पिता तुलसी दास मेहता ने शुरू किया था और इसके संचालन से मेहता परिवार के लोग जुड़े रहे थे।
द हिंदू के अनुसार, ED ने जिस आवास पर छापेमारी की, वह पटना के 12, मंगल्स रोड स्थित उनका सरकारी आवास है।
कौन हैं आलोक मेहता
आलोक मेहता को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का करीबी नेता माना जाता है। वह समस्तीपुर जिले की उजियारपुर सीट से विधायक हैं और महागठबंधन सरकार में मंत्री रह चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वह अगस्त 2022 से जनवरी 2024 तक नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रहे। इससे पहले वह सांसद भी रह चुके हैं। उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को हराया था।
चार लोगों की गिरफ्तारी
छापेमारी के बाद ED ने इस मामले में आगे की कार्रवाई की। द हिंदू की 12 जनवरी की रिपोर्ट के अनुसार, ED ने बैंक से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें बैंक के पूर्व सीईओ विपिन तिवारी भी शामिल थे। आलोक मेहता की गिरफ्तारी की कोई खबर नहीं थी।
सियासी हलचल
विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुई इस छापेमारी के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। राजद ने इस तरह की कार्रवाइयों को अक्सर केंद्रीय एजेंसियों के राजनीतिक इस्तेमाल से जोड़ा है, जबकि भाजपा का कहना रहा है कि एजेंसियां कानून के तहत अपना काम कर रही हैं। छापेमारी के दिन ED की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था, जिससे शुरुआती घंटों में अटकलों का दौर चलता रहा।
सहकारी बैंकों में होने वाली ऐसी गड़बड़ियों का सबसे बड़ा नुकसान आम जमाकर्ताओं को उठाना पड़ता है। लाइसेंस रद्द होने के बाद जमाकर्ता जमा बीमा एवं प्रत्यय गारंटी निगम (DICGC) के नियमों के तहत तय सीमा तक अपनी जमा राशि के भुगतान का दावा कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: आलोक मेहता के घर ED की छापेमारी कब हुई?
जवाब: ED ने 10 जनवरी 2025 की सुबह उनके पटना स्थित सरकारी आवास पर छापेमारी की।
सवाल: छापेमारी किस मामले में हुई?
जवाब: यह कार्रवाई वैशाली शहरी विकास सहकारी बैंक से जुड़े करीब 85 करोड़ रुपये के कथित लोन घोटाले में PMLA के तहत की गई।
सवाल: ED ने कितने ठिकानों पर तलाशी ली?
जवाब: रिपोर्टों के अनुसार, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में करीब 19 ठिकानों पर तलाशी ली गई।
सवाल: आलोक मेहता किस सीट से विधायक हैं?
जवाब: वह समस्तीपुर जिले की उजियारपुर विधानसभा सीट से राजद विधायक हैं।

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