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Bihar Chunav: बिहार में वोटर लिस्ट संसोधन को सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी, लेकिन समय पर उठाया गंभीर सवाल

SC ने बिहार SIR को मंजूरी दी, लेकिन टाइमिंग पर सवाल। ECI से आधार, राशन कार्ड स्वीकारने को कहा।

Bihar Chunav: बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले वोटर लिस्ट को अपडेट करने की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने  बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया जारी रखने की इजाजत दी, लेकिन इसकी टाइमिंग पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र और वोटिंग के अधिकार से जुड़ी है, इसलिए इसे सावधानी से करना जरूरी है। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को गलत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉय माल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि वोटर लिस्ट को अपडेट करना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन कोर्ट ने पूछा कि यह प्रक्रिया चुनाव से ठीक पहले क्यों शुरू की गई? कोर्ट ने सुझाव दिया कि आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे दस्तावेजों को वेरिफिकेशन के लिए स्वीकार करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी वोटर का नाम बिना सुनवाई के नहीं हटाया जाना चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।

विपक्ष का विरोध, क्या है मुद्दा?

राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने वोटर लिस्ट की इस प्रक्रिया को गलत बताया है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया गरीब और प्रवासी मजदूरों को वोट देने से रोक सकती है। तेजस्वी यादव और राहुल गांधी जैसे नेताओं ने इसे ‘वोटबंदी’ करार देते हुए विरोध किया। उनका दावा है कि 11 दस्तावेजों की मांग से गरीब लोग परेशान होंगे, क्योंकि उनके पास ये कागजात नहीं हैं। बिहार की 65% से ज्यादा ग्रामीण आबादी के पास जमीन या सरकारी नौकरी जैसे दस्तावेज नहीं हैं।

Bihar Chunav: चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग ने कहा कि वोटर लिस्ट को शुद्ध करने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई गैर-नागरिक वोटर लिस्ट में न रहे और सभी योग्य वोटर शामिल हों। आयोग ने साफ किया कि आधार कार्ड को नागरिकता का सबूत नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह गृह मंत्रालय का काम है। आयोग ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि कोई भी वोटर बिना मौका दिए लिस्ट से नहीं हटेगा।

बिहार की जनता के लिए क्या मतलब?

बिहार की करीब 7.9 करोड़ वोटर आबादी के लिए यह प्रक्रिया बहुत अहम है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे जारी रखने की मंजूरी दी, लेकिन यह सुनिश्चित करने को कहा कि कोई भी योग्य वोटर वंचित न रहे। बिहार चुनाव 2025 में यह मुद्दा सियासी चर्चा का केंद्र बन सकता है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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