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Animal Bites First Aid: जानवरों के काटने पर तुरंत करें ये उपाय, बच सकती है जान

मुख्य बातें

  • जानिए जानवर क्यों काटते हैं?
  • भारत में जानवरों के काटने का खतरा कितना बड़ा है?
  • Animal Bites First Aid: काटने पर तुरंत क्या करें?
  • क्या न करें: आम गलतियां
17 अगस्त 2025
Animal Bites First Aid
Animal Bites First Aid

Animal Bites First Aid: कुत्ता, बिल्ली, बंदर या कोई दूसरा जानवर काट ले तो ज्यादातर लोग घबरा जाते हैं या घरेलू नुस्खों के भरोसे बैठ जाते हैं। लेकिन जानवर के काटने को हल्के में लेना जानलेवा हो सकता है, क्योंकि इससे रेबीज जैसी बीमारी फैल सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार लक्षण शुरू होने के बाद रेबीज लगभग 100 प्रतिशत जानलेवा है, लेकिन समय पर सही प्राथमिक उपचार और टीकाकरण से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है। इस लेख में जानिए काटने के तुरंत बाद क्या करें, क्या न करें और डॉक्टर के पास कब जाएं।

जानिए जानवर क्यों काटते हैं?

जानवर या पक्षी डर, गुस्सा, भूख या अपनी रक्षा के लिए काट सकते हैं। अगर कोई जानवर खाते समय परेशान हो या उसके बच्चे पास हों, तो वह आक्रामक हो सकता है। बिना उकसाए भी कुछ जानवर काट लेते हैं, जैसे आवारा कुत्ते। उनके मुंह में बैक्टीरिया और कई बार रेबीज वायरस होता है, जो घाव के जरिए शरीर में पहुंचकर नुकसान पहुंचा सकता है।

भारत में जानवरों के काटने का खतरा कितना बड़ा है?

WHO इंडिया के अनुसार मनुष्यों में रेबीज के 99 प्रतिशत तक मामलों में कुत्ते जिम्मेदार होते हैं। WHO इंडिया पेज पर दिए गए ICMR-राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (NIE) के 2024 के अनुमान के मुताबिक भारत में हर साल करीब 91 लाख जानवरों के काटने के मामले और रेबीज से लगभग 5,726 मौतें होती हैं। भारत सरकार ने कुत्तों से फैलने वाले रेबीज को 2030 तक खत्म करने के लक्ष्य के साथ राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (NRCP) चलाया है।

Animal Bites First Aid: काटने पर तुरंत क्या करें?

  • घाव को तुरंत धोएं: घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। WHO और NRCP दोनों इसे सबसे जरूरी पहला कदम मानते हैं, क्योंकि इससे वायरस और बैक्टीरिया की मात्रा काफी घट जाती है।
  • एंटीसेप्टिक लगाएं: धोने के बाद घाव पर पोविडोन-आयोडीन जैसा एंटीसेप्टिक लगाएं।
  • घाव पर पट्टी न बांधें, टांका न लगवाएं: NRCP की सलाह है कि काटे गए घाव को कसकर ढकें या बैंडेज न करें। टांके की जरूरत हो तो इसका फैसला डॉक्टर ही करेंगे।
  • खून बहे तो: साफ कपड़े से हल्का दबाव देकर खून रोकें, फिर तुरंत अस्पताल जाएं।
  • तुरंत डॉक्टर के पास जाएं: नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) के लिए जाएं। जरूरत होने पर डॉक्टर रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (RIG) और टिटनेस का इंजेक्शन भी देते हैं।

क्या न करें: आम गलतियां

  • घाव पर मिर्च, हल्दी का लेप, तेल, चूना, मिट्टी या कोई भी जलन पैदा करने वाली चीज न लगाएं।
  • झाड़-फूंक या घरेलू इलाज के भरोसे वैक्सीन में देरी न करें। रेबीज का कोई घरेलू इलाज नहीं है।
  • “कुत्ता पालतू है” या “घाव छोटा है” सोचकर लापरवाही न करें। खरोंच या चाटने से भी, खासकर टूटी त्वचा पर, संक्रमण हो सकता है।
  • वैक्सीन का कोर्स बीच में न छोड़ें; डॉक्टर जो शेड्यूल बताएं, उसे पूरा करें।

किन जानवरों और पक्षियों से कौन सा खतरा?

कुत्ता, बिल्ली, बंदर: ये सभी स्तनधारी हैं और रेबीज फैला सकते हैं। भारत में ज्यादातर मामले कुत्तों के काटने से होते हैं। काटने वाले कुत्ते या बिल्ली पर 10 दिन तक नजर रखें और यह जानकारी डॉक्टर को दें।

चूहा: चूहे के काटने से आमतौर पर रेबीज का खतरा नहीं माना जाता, लेकिन अमेरिकी स्वास्थ्य संस्था CDC के अनुसार इससे “रैट-बाइट फीवर” नाम का बैक्टीरियल संक्रमण हो सकता है। इसके लक्षण आमतौर पर 3 से 10 दिन में बुखार, उल्टी, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द तथा चकत्तों के रूप में दिखते हैं। ऐसे लक्षण हों तो डॉक्टर को चूहे के संपर्क की जानकारी जरूर दें।

तोता और दूसरे पक्षी: पक्षियों से रेबीज नहीं फैलता। पक्षियों से जुड़ी बीमारी सिटैकोसिस (Psittacosis) के बारे में CDC बताता है कि यह ज्यादातर संक्रमित पक्षियों की सूखी बीट या स्राव वाली धूल सांस के जरिए अंदर जाने से फैलती है; काटने से फैलना कम आम है। पक्षी के काटने पर भी घाव को साबुन-पानी से धोएं और संक्रमण के लक्षण दिखें तो डॉक्टर से मिलें।

रेबीज के लक्षण और वैक्सीन क्यों जरूरी है

रेबीज वायरस नसों के रास्ते दिमाग तक पहुंचता है। लक्षण दिखने में आमतौर पर कुछ हफ्तों से कुछ महीनों तक का समय लगता है। शुरुआत में बुखार और काटे गए स्थान पर झनझनाहट या दर्द हो सकता है, बाद में पानी से डर (हाइड्रोफोबिया), बेचैनी और लकवा जैसे लक्षण आते हैं। एक बार लक्षण आ गए तो इलाज लगभग असंभव हो जाता है। इसलिए काटने के बाद लक्षणों का इंतजार किए बिना पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) लेना जरूरी है, जिसमें घाव की सफाई, वैक्सीन और जरूरत होने पर RIG शामिल हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

कुत्ते के काटने पर घाव को कितनी देर धोना चाहिए?

साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए, फिर एंटीसेप्टिक लगाकर तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

क्या घाव पर पट्टी बांधनी चाहिए?

नहीं। राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम की सलाह है कि काटे गए घाव को बैंडेज से कसकर न ढकें। जरूरी देखभाल डॉक्टर तय करेंगे।

क्या पालतू कुत्ते के काटने पर भी वैक्सीन लगवानी होगी?

इसका फैसला डॉक्टर घाव की श्रेणी और जानवर के टीकाकरण इतिहास को देखकर करते हैं। अपने मन से वैक्सीन न टालें।

सरकारी अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन मिलती है?

हां, NRCP के तहत राष्ट्रीय मुफ्त दवा पहल के जरिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी-रेबीज वैक्सीन और रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं। नजदीकी केंद्र की जानकारी के लिए अपने जिला अस्पताल से संपर्क करें।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। जानवर के काटने पर किसी योग्य डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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कवरेज: Sanjna Gupta, News Media Kiran

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Sanjana GuptaHindi Content Writer | New Media KiranSanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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