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प्रयागराज: लड़की बनने की चाह में स्टूडेंट ने खुद काटा अपना प्राइवेट पार्ट !

प्रयागराज में यूपीएससी की तैयारी कर रहे 22–23 वर्ष के एक छात्र ने बीते दिनों अपने कमरे में आत्म-प्रेरित होकर खुद अपने प्राइवेट पार्ट पर चोट कर ली, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थानीय चिकित्सा सूत्रों और परिजनों के अनुसार युवक ने खुद को घायल करने की वजह जेंडर पहचान से जुड़ा आंतरिक संघर्ष बताई है — वह कहता हैं कि उसे लड़की बनना है।

जानकारी क अनुसार युवक ने इंटरनेट पर मिले सुझावों और एक अनभिज्ञ का परामर्श लेकर जोखिमभरा कदम उठाया। मकान मालिक की सूचना पर उसे नजदीकी बेली अस्पताल लाया गया, जहां से गंभीर हालत देखते हुए उसे स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल रेफर कर दिया गया। अस्पताल के सीनियर सर्जन के मुताबिक युवक को तुरंत नियंत्रक चिकित्सा सहायता दी गई; यदि समय पर इलाज न मिलता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। वर्तमान में चिकित्सकीय टीम उसकी स्थिति स्थिर करने और फिर मानसिक–स्वास्थ्य मूल्यांकन पर काम कर रही है।

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एसआरएन अस्पताल के मीडिया प्रभारी व वरिष्ठ सर्जन ने बताया कि प्राथमिक निदान में युवक जेंडर आइडेंटिटी डिसफोरिया (जेंडर पहचान संबंधी गंभीर असहजता) से पीड़ित दिखता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में मरीज अक्सर भावनात्मक दबाव में जोखिम भरे विकल्प अपना लेते हैं और इसलिए पेशेवर चिकित्सा, काउंसलिंग और संरचित मानसोपचार जरूरी होता है। अस्पताल ने बताया कि युवक की काउंसिलिंग शुरू कर दी गई है और परिजनों से चर्चा कर वैकल्पिक वैध चिकित्सा मार्ग या दीर्घकालिक उपचार योजना पर काम किया जाएगा — जिसमें एक साल तक चिकित्सा समीक्षा, हार्मोन उपचार सम्बन्धी मार्गदर्शन और योग्य सर्जिकल प्रक्रिया के लिए नैदानिक मानदंडों पर विचार शामिल हो सकते हैं।

युवक अमेठी जिले का निवासी है और परिवार में इकलौते बेटे के रूप में वह पढ़ाई के लिए प्रयागराज आया था। घटना से परिजन बेहद व्यथित हैं; मां अस्पताल में बेटे के बगल में मौजूद हैं। अस्पताल की टीम ने परिवार को भी मेडिकल व मनोवैज्ञानिक समर्थन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।

किसी भी प्रकार के लिंग परिवर्तनीय इलाज या सर्जरी से पहले प्रमाणित स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श और पूरी चिकित्सकीय प्रक्रिया की आवश्यकता पर अस्पताल ने जोर दिया है। साथ ही विशेषज्ञों ने आम लोगों से अपील की है कि जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं के संबंध में इंटरनेट या अनपाठी सलाह पर भरोसा न करें और यदि कोई व्यक्ति मनोदशा/आत्महत्या या आत्म-आघात के विचार प्रकट करे तो उसे तुरंत चिकित्सीय सहायता दिलाएं।

Vaibhav tiwari
Author: Vaibhav tiwari

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