Jharkhand News: झारखंड का मक्लुस्कीगंज अब दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करने की तैयारी में है। यहां के प्राचीन मेगालिथ स्मारक, जो हजारों साल पुराने हैं, को वैश्विक पर्यटन पहचान दिलाने के लिए विकास कार्य शुरू हो गए हैं। यह छोटा सा कस्बा, जो रांची से महज 40 किलोमीटर दूर है, अपनी अनोखी मेगालिथ संरचनाओं के कारण चर्चा में है। ये पत्थर के स्मारक आदिवासी संस्कृति और इतिहास की गवाही देते हैं। झारखंड सरकार ने इन साइट्स को संरक्षित कर पर्यटन को बढ़ावा देने का प्लान बनाया है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और पर्यटन से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। मक्लुस्कीगंज को ‘मेगालिथ पैराडाइज’ के रूप में विकसित करने का सपना साकार हो रहा है।
मक्लुस्कीगंज में मेगालिथ स्मारकों की खासियत

मक्लुस्कीगंज झारखंड के सबसे पुराने यूरोपीय बस्तियों में से एक है, लेकिन यहां के मेगालिथ स्मारक असली आकर्षण हैं। ये विशाल पत्थरों से बने मेनहिर, डॉलमेन और सर्कल हैं, जो 2000 ईसा पूर्व के हैं। पुरातत्वविदों का मानना है कि ये स्मारक आदिवासी समुदायों के दफन स्थल और पूजा स्थल थे। जंगल घने और हवा शुद्ध होने से यहां का माहौल शांतिपूर्ण है। पर्यटक यहां ट्रेकिंग, फोटोग्राफी और इतिहास की सैर कर सकते हैं।
मेगालिथ साइट्स की संख्या और महत्व
इस क्षेत्र में 50 से ज्यादा मेगालिथ साइट्स हैं। सबसे प्रसिद्ध ‘पारसनाथ हिल’ पर स्थित सर्कल है, जहां पत्थरों का घेरा रहस्यमयी लगता है। ये स्मारक यूनेस्को की वैश्विक धरोहर सूची में शामिल होने के योग्य हैं। झारखंड पर्यटन विभाग ने इनकी डिजिटल मैपिंग शुरू की है। स्थानीय गाइड बताते हैं कि ये पत्थरों में ऊर्जा है, जो पर्यटकों को खींचती है।
झारखंड सरकार ने 100 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इसमें सड़कें, पार्किंग, वॉच टावर और संग्रहालय बनेंगे। पर्यटन मंत्री ने कहा, “मक्लुस्कीगंज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकाएंगे।” इससे नेटारहाट और रांची के साथ एक पर्यटन सर्किट बनेगा।
विकास कार्यों से स्थानीय लोगों को फायदा
मक्लुस्कीगंज में ज्यादातर आदिवासी और गरीब परिवार रहते हैं। पर्यटन से होटल, दुकानें और गाइड का काम बढ़ेगा। एक स्थानीय किसान ने बताया, “हमारी जमीन पर अब रोजगार मिलेगा। पहले तो बस जंगल था।” सरकार होमस्टे और क्राफ्ट सेंटर भी खोलेगी, जहां हस्तशिल्प बिकेंगे। यह योजना ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देगी।
पर्यटन बढ़ाने के लिए क्या-क्या होगा?
- इंफ्रास्ट्रक्चर: साफ-सुथरी सड़कें और बस सेवा।
- सुरक्षा: सीसीटीवी और गार्ड।
- प्रचार: सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मेलों में प्रमोशन।
- शिक्षा: स्कूलों में मेगालिथ पर जागरूकता।
ये कदम मक्लुस्कीगंज को गोवा या शिलांग जैसा बना देंगे। पर्यटक यहां एक्टिविटी जैसे बर्ड वॉचिंग भी करेंगे।
वैश्विक पहचान से झारखंड का मान बढ़ेगा
मेगालिथ स्मारक यूरोप के स्टोनहेंज से मिलते-जुलते हैं, इसलिए विदेशी पर्यटक आकर्षित होंगे। झारखंड पर्यटन को नई ऊंचाई मिलेगी। लेकिन संरक्षण जरूरी है, ताकि ये स्मारक सुरक्षित रहें। विशेषज्ञ कहते हैं कि इको-फ्रेंडली विकास से प्रकृति बचेगी।
मक्लुस्कीगंज वैश्विक पर्यटन पहचान पाने की राह पर है। अगर आप इतिहास प्रेमी हैं, तो यहां जरूर जाएं। झारखंड सरकार की यह पहल सराहनीय है। पर्यटन से गांव उज्ज्वल होंगे। अधिक जानकारी के लिए झारखंड पर्यटन वेबसाइट देखें।



