वाराणसी: बिहार विधानसभा चुनाव के बीच हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का बयान सियासी हलचल मचा गया है। उन्होंने कहा,
“हमारे गठबंधन में पाँच दल हैं, और अब बिहार की राजनीति में असली ‘महाभारत’ शुरू हो चुकी है।”
उनके इस बयान ने पूरे राज्य की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला दिया है। मांझी का इशारा साफ था — बिहार में अब चुनाव सिर्फ सीटों का नहीं, विचारधाराओं के टकराव का युद्ध बन चुका है।
क्या पर फोकस करेंगे — ‘महाभारत जैसी सियासी जंग’
मांझी का बयान इस चुनाव में गठबंधन की एकता और विपक्ष से टकराव पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि पांचों दलों में साझा लक्ष्य बिहार को नई दिशा देना है। मांझी ने कहा,
“जिस तरह महाभारत में सच और झूठ आमने-सामने थे, वैसे ही आज बिहार में भी ईमानदारी और छल का संघर्ष हो रहा है।” यह फोकस इस बात पर है कि अब चुनाव केवल सत्ता बदलने का नहीं, राज्य की सोच और नीतियों को पुनर्परिभाषित करने का युद्ध बन गया है।
क्यों दिया गया बयान — ‘गठबंधन को मजबूत संदेश देना’
यह बयान मांझी ने ऐसे समय दिया जब कई दलों के बीच सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर चर्चा जारी है।
उनका उद्देश्य था यह दिखाना कि गठबंधन में एकता कायम है और यह कोई बिखरा हुआ समूह नहीं बल्कि एक सशक्त मोर्चा है।
मांझी ने यह भी कहा कि “हमारा गठबंधन सिर्फ सत्ता के लिए नहीं, जनता के हक के लिए लड़ रहा है। अब धोखे की नहीं, भरोसे की राजनीति होगी।”»
फायदा किसे होगा — ‘एकजुट विपक्ष को और ऊर्जा’
मांझी के इस बयान से गठबंधन के भीतर विश्वास और जोश दोनों में इज़ाफा होगा। उनका ‘महाभारत’ वाला उदाहरण जनता के बीच एक भावनात्मक जुड़ाव पैदा करता है, जिससे मतदाताओं को लगेगा कि वे भी इस परिवर्तन की लड़ाई का हिस्सा हैं।
इस तरह का संदेश गांव-देहात के मतदाताओं में उत्साह और भरोसा दोनों बढ़ाता है।
कैसे करेंगे असर — ‘प्रतीक और कहानी की ताकत से’
मांझी ने अपने बयान को सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि कहानी और प्रतीक के माध्यम से जनभावना से जोड़ने की कोशिश की है।
उन्होंने ‘महाभारत’ जैसे सांस्कृतिक संदर्भ का उपयोग कर जनता के मन में यह भाव जगाया कि यह लड़ाई सत्य बनाम असत्य की है।
इससे वे आम मतदाता के दिल तक अपनी बात सरल भाषा और प्रतीकात्मकता से पहुँचा रहे हैं।
निष्कर्ष — ‘बिहार में अब सियासी महाभारत की गूंज’
जीतन राम मांझी के बयान ने चुनावी माहौल में नया रंग भर दिया है।अब बिहार की राजनीति में यह सवाल गूंज रहा है कि कौन बनेगा ‘अर्जुन’ और कौन होगा ‘कौरव’? मांझी के अनुसार, इस बार का युद्ध जनता के हक और न्याय की रक्षा का युद्ध है।
और अगर उनकी मानें, तो यह ‘महाभारत’ सत्ता के लिए नहीं, सत्य के लिए लड़ी जाएगी।



