https://whatsapp.com/channel/0029VajZKpiKWEKiaaMk4U3l
National
Trending

भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास 'त्रिशूल'-युद्ध कौशल को निखारा, बल्कि दुश्मन को स्पष्ट संदेश दिया

भारतीय वायुसेना का 'त्रिशूल' अभ्यास आन-बान-शान से समाप्त: 30,000 जवान, 40+ विमान शामिल, दुश्मन की हलक सूखी। ताकत, तैयारियों और आत्मनिर्भरता का शानदार प्रदर्शन।

वाराणसी – भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास ‘त्रिशूल’ आज धूमधाम से समाप्त हो गया। यह अभ्यास पूरे देश में आन-बान-शान के साथ चल रहा था। इसमें 30,000 से ज्यादा जवान शामिल हुए। 40 से अधिक लड़ाकू विमान आसमान में गरजे। दुश्मन की हालत ऐसी हो गई कि उसकी हलक सूख गई। यह अभ्यास वायुसेना की ताकत का बड़ा प्रदर्शन था। आइए, सरल शब्दों में जानते हैं क्या हुआ इसमें।
अभ्यास की शुरुआत और मकसद
‘त्रिशूल’ अभ्यास 1 नवंबर से शुरू हुआ था। यह भारतीय वायुसेना का सालाना बड़ा युद्धाभ्यास है। इसका मुख्य मकसद था – जवानों को असली युद्ध जैसी स्थिति में तैयार करना। दुश्मन के हमले का मुकाबला कैसे करें, यह सिखाया गया।अभ्यास पूरे देश में फैला हुआ था। राजस्थान की रेगिस्तानी जमीन से लेकर पूर्वी सीमाओं तक। पश्चिमी सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ ध्यान ज्यादा था। पूर्वी सेक्टर में चीन की चुनौतियों को देखा गया।
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा, “यह अभ्यास हमारी तैयारियों का आईना है। हम किसी भी खतरे के लिए तैयार हैं।” उनकी बात से साफ है कि भारत की सेना कितनी मजबूत है।
कितने जवान और विमान शामिल हुए?
इस बार का अभ्यास अब तक का सबसे बड़ा था। कुल 30,000 जवान मैदान में उतरे। ये जवान वायुसेना के अलग-अलग स्क्वाड्रन से थे।विमानों की बात करें तो 40 से ज्यादा लड़ाकू जेट शामिल हुए। इनमें राफेल, सुखोई-30, मिग-29 और तेजस जैसे आधुनिक विमान थे। हेलीकॉप्टर भी थे – अपाचे और चिनूक। ड्रोन का इस्तेमाल भी खूब हुआ।
अभ्यास में जमीन से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम भी तैनात किए गए। एस-400 जैसी एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन के हमले को रोकने का अभ्यास किया।
क्या-क्या हुआ अभ्यास में?
अभ्यास को कई चरणों में बांटा गया था। 
पहला चरण था – हवाई हमला। लड़ाकू विमान दुश्मन के ठिकानों पर बम बरसाते दिखे। लेजर गाइडेड बमों का इस्तेमाल हुआ। सटीक निशाना लगाया गया।
दूसरा चरण था – एयर डिफेंस। दुश्मन के विमानों को रोकने का अभ्यास। रडार ने दुश्मन को पकड़ा। मिसाइल दागी गई। आसमान में धुएं के गुबार उठे।
तीसरा चरण था – ग्राउंड सपोर्ट। जवानों को जमीन पर उतारा गया। पैरा ट्रूपर्स ने छलांग लगाई। हेलीकॉप्टर से रस्सी पर उतरे। दुश्मन के इलाके में घुसकर हमला किया।
रात में भी अभ्यास हुआ। नाइट विजन का इस्तेमाल। अंधेरे में दुश्मन को चकमा देना सिखाया गया।
दुश्मन की हलक क्यों सूख गई?
अभ्यास इतना जोरदार था कि दुश्मन देशों के होश उड़ गए। पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर यह संदेश गया – भारत तैयार है।
सुखोई-30 विमान ने हाई स्पीड में उड़ान भरी। राफेल ने मल्टी रोल दिखाया। तेजस ने स्वदेशी ताकत का प्रदर्शन किया।
एक दिन में 500 से ज्यादा सॉर्टी उड़ानें हुईं। यानी विमान बार-बार उड़ते और उतरते रहे। दुश्मन सोचता रहा – इतनी ताकत कैसे सामना करें?
वायुसेना ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किए। आसमान में विमानों की लाइन। धमाकों की आवाज। लोग देखकर दंग रह गए। दुश्मन की नींद उड़ गई। उसकी हलक सच में सूख गई।
जवानों की मेहनत और चुनौतियां
30,000 जवान दिन-रात मेहनत करते रहे। राजस्थान में गर्मी थी। धूल भरी आंधी। फिर भी अभ्यास नहीं रुका।
पायलटों ने घंटों उड़ान भरी। ग्राउंड क्रू ने विमानों को तैयार किया। हर कोई अपनी जिम्मेदारी निभाता रहा।
महिलाएं भी शामिल थीं। महिला पायलटों ने राफेल उड़ाया। गरिमा और शक्ति का संदेश दिया।
कोई चोट नहीं लगी। सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया।
समापन समारोह की शान
आज समापन हुआ। वायुसेना स्टेशन पर बड़ा कार्यक्रम। एयर चीफ मार्शल ने जवानों को सम्मानित किया। मेडल बांटे गए।
विमानों ने फ्लाई पास्ट किया। आसमान में तिरंगा बनाया। लोग तालियां बजाते रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, “त्रिशूल अभ्यास गर्व की बात है।
क्या सीख मिली इस अभ्यास से?
यह अभ्यास सिर्फ दिखावा नहीं था। असली सबक मिले।
पहला – टीम वर्क। सभी यूनिट्स ने मिलकर काम किया।
दूसरा – तकनीक। नए हथियारों का इस्तेमाल। ड्रोन और एआई का रोल बढ़ा।
तीसरा – तैयारियां। सीमा पर किसी भी वक्त हमला हो सकता है। हम तैयार हैं।
चौथा – आत्मनिर्भरता। तेजस जैसे स्वदेशी विमान चमके। मेक इन इंडिया को बढ़ावा।
आगे क्या?
‘त्रिशूल’ खत्म हुआ, लेकिन तैयारियां जारी रहेंगी। अगला अभ्यास और बड़ा होगा। वायुसेना नई तकनीक ला रही है।
लोगों को संदेश – अपनी सेना पर गर्व करो। वह दिन-रात देश की रक्षा करती है।
दुश्मन अब सोचेगा दस बार। भारत की ताकत देख ली है। आन-बान-शान बरकरार है।
निष्कर्ष
‘त्रिशूल’ अभ्यास भारतीय वायुसेना की ताकत, एकजुटता और तैयारियों का जीता-जागता प्रमाण बनकर उभरा। 30,000 जवानों और 40 से अधिक विमानों की भागीदारी ने न केवल युद्ध कौशल को निखारा, बल्कि दुश्मन को स्पष्ट संदेश दिया – भारत किसी भी चुनौती का मुकाबला करने को पूरी तरह सक्षम है। यह अभ्यास महज सैन्य प्रदर्शन नहीं था, बल्कि आत्मनिर्भरता, तकनीकी उन्नति और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक बना। आन-बान-शान के साथ सम्पन्न यह युद्धाभ्यास देशवासियों के लिए गर्व का विषय है और सीमाओं पर चौकसी बरतने वालों के लिए प्रेरणा। वायुसेना की यह हुंकार दुश्मन की हलक सूखाने के साथ-साथ हर भारतीय के सीने में गर्व की लहर भर गई। जय हिंद!
PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!