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झारखंड हाईकोर्ट का सख्त फैसला, हेमंत सोरेन सरकार पर लगाया 50 हजार का जुर्माना, बेवजह मुकदमेबाजी पर लगाई फटकार

झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन सरकार पर लगाया ₹50 हजार का हर्जाना, बताई 'बेवजह मुकदमेबाजी'।

Jharkhand Court News: झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन सरकार की बेवजह मुकदमेबाजी पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील याचिका खारिज करते हुए 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया। अदालत ने कहा, “राज्य सरकार अपने ही कर्मचारियों को न्याय से वंचित रखने के लिए बार-बार अदालतों का दरवाजा खटखटा रही है। इससे न केवल न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि जनता का धन भी व्यर्थ जाता है।” यह फैसला एक अधिकारी के पदस्थापना मामले में आया, जहां सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। कोर्ट ने इसे ‘बेमानी और बेवजह मुकदमेबाजी‘ करार दिया।

हाईकोर्ट का फैसला: जनता का पैसा बर्बाद न करें

झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य एक वेलफेयर स्टेट है, न कि ऐसा पक्षकार जो अपने नागरिकों के खिलाफ मुकदमा जीतना चाहता हो। चीफ जस्टिस ने फैसले में लिखा, “राज्य के अधिकारी यह भूल जाते हैं कि मुकदमेबाजी का खर्च सरकारी खजाने से आता है, उनकी जेब से नहीं। इसलिए वे बिना जरूरत के मुकदमे दायर करते हैं।” कोर्ट ने हर्जाने की राशि पहले प्रतिवादी अखिलेश प्रसाद को देने और फिर छह महीने के भीतर संबंधित अधिकारी से वसूली करने का निर्देश दिया। प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ रंजन ने पक्ष रखा। यह फैसला राज्य सरकार की लिटिगेशन पॉलिशी (2011) को सख्ती से लागू करने का आदेश देता है।

मामले की पृष्ठभूमि: अखिलेश प्रसाद का पदस्थापना विवाद

यह मामला अखिलेश प्रसाद नामक अधिकारी से जुड़ा है, जो पहले बिहार सरकार में सहकारिता विस्तार पदाधिकारी थे। झारखंड गठन के बाद वे यहां की प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार ने उनकी पदस्थापना 2013 से प्रभावी करने में देरी की। इस पर अखिलेश ने हाईकोर्ट की शरण ली, जहां एकल पीठ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। लेकिन राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ अपील दाखिल कर दी। खंडपीठ ने अपील को खारिज करते हुए कहा कि यह बेवजह की मुकदमेबाजी है। कोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा करें।

सरकार पर विपक्ष का हमला: लोकतंत्र की हत्या

झारखंड हाईकोर्ट का फैसला राजनीतिक हलकों में हलचल मचा रहा है। विपक्षी दलों ने इसे हेमंत सोरेन सरकार की नाकामी बताया। भाजपा नेता ने कहा, “सरकार बेवजह मुकदमेबाजी कर जनता का पैसा बर्बाद कर रही है।” झामुमो ने बचाव किया कि यह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन कोर्ट का फैसला सरकार को सतर्क करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भविष्य में अनावश्यक केस कम होंगे। राज्य में ऐसे कई मामले लंबित हैं, जहां कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी हुई।

सामाजिक प्रभाव: जनता का धन व्यर्थ न जाए

यह फैसला जनता के धन के सदुपयोग पर जोर देता है। सरकार को अब मुकदमेबाजी नीति सख्ती से लागू करनी होगी। कर्मचारियों को न्याय मिलेगा। कोर्ट ने कहा कि राज्य नागरिकों का सेवक है, न कि दुश्मन। यह निर्णय अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बनेगा।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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