SIP Investment: महिलाओं के निवेश का तरीका तेजी से बदल रहा है। खासकर युवा महिलाएं अब केवल सोना और फिक्स्ड डिपॉजिट पर नहीं टिकीं। वे इक्विटी और म्यूचुअल फंड में भी पैसा लगा रही हैं। मकसद सिर्फ बचत नहीं, लंबे समय में पूंजी बढ़ाने का भी है। एम्फी-क्रिसिल फैक्टबुक 2026 के अनुसार मार्च 2021 से मार्च 2026 के बीच महिलाओं का कुल एसआईपी निवेश 1.26 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 4.73 लाख करोड़ रुपये हो गया। पांच साल में यह करीब चार गुना बढ़ा।
महिलाओं का कुल म्यूचुअल फंड एयूएम 5.84 लाख करोड़ से 15.88 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। कुल निवेशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 26.4 प्रतिशत है। 25 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के निवेश में इक्विटी 88.3 प्रतिशत है, जबकि 58 वर्ष से अधिक उम्र में यह 51.2 प्रतिशत है।
SIP Investment: पांच साल में आंकड़े कितने बदले
मार्च 2021 में महिलाओं का एसआईपी निवेश 1.26 लाख करोड़ रुपये था। मार्च 2026 में यह 4.73 लाख करोड़ रुपये दर्ज हुआ। यानी पांच वर्ष में लगभग चार गुना वृद्धि हुई। म्यूचुअल फंड की कुल संपत्ति में भी बड़ी बढ़ोतरी दिखी।
म्यूचुअल फंड एयूएम में महिलाओं की स्थिति
महिलाओं का म्यूचुअल फंड एयूएम 5.84 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 15.88 लाख करोड़ रुपये हो गया। कुल निवेशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 26.4 प्रतिशत बताई गई है। आंकड़ों के अनुसार अब हर चार निवेशकों में से एक महिला है। 2021 में यह अनुपात हर छह में से एक था।
SIP Investment: उम्र के हिसाब से इक्विटी का फर्क
25 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के निवेश में इक्विटी की हिस्सेदारी 88.3 प्रतिशत है। 58 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में यह हिस्सेदारी 51.2 प्रतिशत है। युवा वर्ग लंबी अवधि तक निवेश कर सकता है। विशेषज्ञ इसी वजह से बदलाव को स्थायी मान रहे हैं।
फैसले अब खुद लेने की प्रवृत्ति
विशेषज्ञों के अनुसार महिलाएं पैसे से जुड़े फैसले स्वयं ले रही हैं। संपत्ति बढ़ाने पर ध्यान बढ़ा है। अधिक महिलाएं खुद कमाई कर रही हैं और वित्तीय रूप से स्वतंत्र हो रही हैं। जिम्मेदारी किसी और को सौंपने के बजाय खुद तय करना पसंद कर रही हैं।
एसआईपी पहली पसंद क्यों बनी
घर का खर्च जैसे हर महीने तय होता है, वैसे ही एसआईपी में छोटी रकम नियमित लगती है। एक साथ बड़ी राशि लगाने के बजाय मासिक निवेश बचत की आदत से जुड़ जाता है। यही सरलता इसे लोकप्रिय बना रही है।
SIP Investment: डिजिटल प्रक्रिया ने क्या आसान किया
डिजिटल माध्यमों से निवेश घर बैठे संभव हो गया है। केवाईसी ऑनलाइन पूरी हो सकती है। ई-मैंडेट से हर महीने अपने आप राशि कट सकती है। समय और कागजी झंझट दोनों घटे हैं।
लंबे लक्ष्यों पर क्यों जोर
विशेषज्ञ कहते हैं कि सोच अब केवल सुरक्षित विकल्प तक सीमित नहीं रही। ऐसे रास्ते खोजे जा रहे हैं जिनसे लंबी अवधि में पूंजी बढ़ सके। बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदना और रिटायरमेंट जैसे लक्ष्य इससे जुड़े बताए गए हैं।
SIP Investment: आने वाले वर्षों का अनुमान
युवा महिलाएं इक्विटी में ज्यादा पैसा लगा रही हैं। लंबे समय तक निवेश रह सकने के कारण यह रुझान टिकाऊ माना जा रहा है। म्यूचुअल फंड और इक्विटी में महिलाओं की हिस्सेदारी आगे और बढ़ सकती है। यह संभावना आंकड़ों पर आधारित है, गारंटी नहीं।
सोना छूटा नहीं, लेकिन अकेला विकल्प नहीं रहा
विशेषज्ञों के मुताबिक महिलाओं ने सोना पूरी तरह नहीं छोड़ा। अब वह एकमात्र या मुख्य सहारा नहीं रह गया। सोने के साथ एसआईपी के जरिए इक्विटी म्यूचुअल फंड और सीधे इक्विटी में भी निवेश हो रहा है।
SIP Investment: कुल निवेश में इक्विटी की हिस्सेदारी
महिलाओं के कुल निवेश में इक्विटी की हिस्सेदारी अब 64 प्रतिशत हो गई है। पांच साल पहले यह करीब 49 प्रतिशत थी। यानी पारंपरिक सुरक्षा के साथ बढ़ोतरी वाले विकल्प का वजन बढ़ा है। आंकड़ा बदलाव की दिशा दिखाता है।
एम्फी-क्रिसिल फैक्टबुक 2026 के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं का एसआईपी निवेश पांच साल में 1.26 लाख करोड़ से 4.73 लाख करोड़ रुपये पहुंचकर करीब चार गुना हो गया। म्यूचुअल फंड एयूएम 5.84 लाख करोड़ से 15.88 लाख करोड़ रुपये बढ़ा और कुल निवेशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 26.4 प्रतिशत रही। 2021 में हर छह में एक महिला निवेशक थी, अब हर चार में एक है।
25 वर्ष से कम उम्र में इक्विटी 88.3 प्रतिशत तक है और कुल निवेश में इक्विटी 49 से 64 प्रतिशत पहुंच गई। एसआईपी की मासिक आदत, डिजिटल केवाईसी और ई-मैंडेट ने रास्ता आसान किया। सोना बना रहा, पर अकेला विकल्प नहीं रहा। आगे हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना जताई गई है, बशर्ते लंबी अवधि का अनुशासन कायम रहे।
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