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Malkangiri Tribal Students: महाराष्ट्र की इंजीनियर भाग्यश्री बदल रही मलकानगिरी के 15 हजार आदिवासी बच्चों का भविष्य

Malkangiri Tribal Students: पहाड़ और जंगल से घिरे मलकानगिरी के सुदूर इलाकों में स्कूल भी थे और कंप्यूटर तथा इंटरनेट जैसी सुविधाएं भी मौजूद थीं। फिर भी बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं थे। नतीजा यह हुआ कि कंप्यूटर स्क्रीन पर धूल जमती रही और आदिवासी बच्चों का डिजिटल सपना अधूरा रह गया। इसी स्थिति को एक फैसले और हजारों किलोमीटर दूर से बढ़े सहयोग ने बदल दिया।

महाराष्ट्र की आईटी इंजीनियर भाग्यश्री यादव आज ओडिशा के आदिवासी बच्चों का भविष्य गढ़ रही हैं। जिला प्रशासन की योजना प्रगति पथे युवा मलकानगिरी के तहत 24 आश्रम विद्यालयों और एक कलिंग मॉडल आवासीय विद्यालय के 15 हजार से अधिक बच्चों को निशुल्क कंप्यूटर शिक्षा मिलनी शुरू हुई है। सप्ताह में दो दिन ऑनलाइन कक्षा के जरिए यह प्रयास अब चर्चा में है।

Malkangiri Tribal Students: स्कूल में सुविधा थी लेकिन पढ़ाने वाला नहीं था

मलकानगिरी के उपांत इलाकों में आधारभूत सुविधा की कमी ही सबसे बड़ी बाधा नहीं थी। स्कूल भवन और मशीनें मौजूद थीं, पर पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं था। कंप्यूटर पर धूल जमना इसी खालीपन का संकेत था। आदिवासी बच्चों के लिए डिजिटल दुनिया दूर की चीज बनी रही।

कोरापुट दौरे पर सामने आई समस्या

भाग्यश्री यादव कोरापुट दौरे के दौरान उपांत क्षेत्र के आदिवासी छात्रों की इस दिक्कत से रूबरू हुईं। स्कूल में साधन होते हुए भी शिक्षक न होने की बात जानने के बाद उन्होंने स्वयं निस्वार्थ भाव से कंप्यूटर शिक्षा देने की इच्छा जताई। मलकानगिरी जिला प्रशासन ने उनके इस प्रस्ताव को अवसर में बदल दिया।

प्रगति पथे युवा मलकानगिरी योजना क्या है

प्रशासन की योजना प्रगति पथे युवा मलकानगिरी के अंतर्गत यह काम आगे बढ़ा। योजना में 24 आश्रम विद्यालय और एक कलिंग मॉडल आवासीय विद्यालय जुड़े हैं। इन संस्थानों के 15 हजार से अधिक बच्चों तक निशुल्क कंप्यूटर शिक्षा पहुंचाने का प्रयास शुरू हो चुका है। दूर बैठकर भी नियमित कक्षाएं चल रही हैं।

Malkangiri Tribal Students: ऑनलाइन कक्षा कैसे चल रही है

भाग्यश्री सप्ताह में दो दिन और प्रत्येक दिन एक घंटे ऑनलाइन कक्षा लेती हैं। महाराष्ट्र से ओडिशा के बच्चों तक यह कड़ी अब नियमित हो गई है। पहले जहां स्क्रीन बंद पड़ी रहती थी, वहां अब पढ़ाई दिखाई देने लगी है। बच्चे धीरे-धीरे मशीन के इस्तेमाल से परिचित हो रहे हैं।

बच्चों को क्या-क्या सिखाया जा रहा है

बुनियादी कंप्यूटर शिक्षा के साथ जावा और पावरपॉइंट जैसे विषय भी पाठ्यक्रम में शामिल हैं। आधुनिक तकनीक से जुड़े विषयों की जानकारी भी बच्चों तक पहुंचाई जा रही है। उद्देश्य केवल मशीन चलाना नहीं, बल्कि आगे की पढ़ाई और रोजगार की नींव रखना है। सुदूर स्कूलों में यह बदलाव साफ दिखने लगा है।

Malkangiri Tribal Students: 15 हजार बच्चों के सपने से कैसे जुड़ा यह प्रयास

एक व्यक्ति की पहल अब 15 हजार से अधिक आदिवासी छात्रों से जुड़ गई है। पहाड़-जंगल वाले इलाके के बच्चों के लिए यह कड़ी नई संभावना खोलती है। शिक्षक की अनुपस्थिति ने जो खाई बनाई थी, उसे ऑनलाइन माध्यम से पाटने की कोशिश चल रही है। अभिभावक और स्कूल दोनों इस बदलाव को महसूस कर रहे हैं।

जिला प्रशासन की भूमिका क्यों अहम रही

केवल इच्छा पर्याप्त नहीं थी। मलकानगिरी प्रशासन ने भाग्यश्री के प्रस्ताव को योजना से जोड़कर रास्ता खोला। आश्रम विद्यालयों और आवासीय विद्यालय तक पहुंच बनाने में यही सहयोग काम आया। बिना स्थानीय व्यवस्था के दूरस्थ कक्षाएं इतने बड़े पैमाने पर संभव नहीं होतीं।

Malkangiri Tribal Students: धूल भरी स्क्रीन से पढ़ाई तक का सफर

जो कंप्यूटर कभी बंद पड़े रहते थे, उन पर अब अक्षर और अभ्यास दिखाई देने लगे हैं। बच्चों के चेहरे पर नई जिज्ञासा है। हजारों किलोमीटर की दूरी अब बाधा नहीं रह गई। शिक्षा का यह पुल मलकानगिरी के सुदूर स्कूलों तक पहुंच चुका है।

पहाड़-जंगल वाले मलकानगिरी में कंप्यूटर होने के बावजूद शिक्षक न मिलना आदिवासी बच्चों की पढ़ाई का बड़ा संकट था। महाराष्ट्र की आईटी इंजीनियर भाग्यश्री यादव ने कोरापुट दौरे के बाद इसी कमी को दूर करने का जिम्मा उठाया। प्रगति पथे युवा मलकानगिरी योजना के तहत 24 आश्रम विद्यालयों और एक कलिंग मॉडल आवासीय विद्यालय के 15 हजार से अधिक बच्चे अब सप्ताह में दो दिन ऑनलाइन कंप्यूटर शिक्षा पा रहे हैं।

बुनियादी ज्ञान से लेकर जावा, पावरपॉइंट और आधुनिक तकनीक तक की कक्षाएं चल रही हैं। धूल जमी स्क्रीन पर आज बच्चों के भविष्य की नई तस्वीर बन रही है। यह पहल दिखाती है कि दूरी बाधा नहीं रहती, जब मकसद साफ हो और प्रशासन साथ दे।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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