Kolkata: नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार को लेकर चल रहे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी कौशिकी अमावस्या के अवसर पर कोलकाता के प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर पहुंचे। उन्होंने मां काली की पूजा-अर्चना की और मंदिर की परंपरा के अनुसार मछली और पुलाव का भोग ग्रहण किया।
शुभेंदु अधिकारी ने पूजा के दौरान बनारसी साड़ी, फूल-माला और मिठाई समेत पूजा सामग्री देवी को अर्पित की। इसके बाद उन्होंने आरती और अंजलि में हिस्सा लिया। पूजा के बाद वह जमीन पर बैठकर महाप्रसाद ग्रहण करते नजर आए।
बागेश्वर बाबा की टिप्पणी के बाद गरमाया विवाद
दरअसल, दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस तेज हो गई है। कई बंगाली नेताओं ने कहा है कि बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में मछली और मांसाहारी भोग का भी स्थान रहा है।
इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का कालीघाट जाकर पारंपरिक भोग ग्रहण करना राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया है।
मां काली को चढ़ाया गया मछली और मांस का भोग
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भोग में हिलसा, झींगा, भेटकी और कटला समेत कई प्रकार की मछलियां, मछली का सिर, तली हुई मछली और बासंती पुलाव जैसे व्यंजन शामिल थे। इसके अलावा अन्य पारंपरिक व्यंजन और बकरे के मांस का भी उल्लेख सामने आया है।
पूजा के बाद अधिकारी ने स्वयं भोग का प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि किसी संत या मठाधीश की अपनी राय हो सकती है, लेकिन लोगों को अपनी परंपरा और आस्था के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।
‘बंगाली होने के नाते मछली भी ग्रहण करता हूं’
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाली होने के नाते वह मां को अर्पित की गई मछली का प्रसाद भी ग्रहण करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पारंपरिक संस्कृति जीवित रहेगी और सनातन परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा।
कालीघाट मंदिर में उनका यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब नवरात्रि के दौरान मांसाहार को लेकर देशभर में बहस चल रही है। ऐसे में उनका पारंपरिक मछली भोग ग्रहण करना बंगाल की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

