Baharagora: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा क्षेत्र में सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर घटते ही कथित अवैध बालू खनन का मामला सामने आया है। पानीपोड़ा-नागुड़साई स्थित सुवर्णरेखा नदी घाट से बड़े पैमाने पर बालू उठाव किए जाने का स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है। ग्रामीणों के अनुसार, घाट से प्रतिदिन करीब 60 से 70 ट्रैक्टर बालू उठाकर अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी का पानी कम होते ही बालू कारोबार से जुड़े लोग सक्रिय हो गए हैं। सुबह से लेकर शाम तक घाट और आसपास के रास्तों पर बालू लदे ट्रैक्टरों की आवाजाही देखी जा रही है। इससे क्षेत्र में अवैध खनन और परिवहन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पानी कम होते ही बढ़ा बालू उठाव
बताया जा रहा है कि पानीपोड़ा-नागुड़साई घाट का नदी क्षेत्र काफी विस्तृत है। जलस्तर कम होने के बाद यहां बड़ी मात्रा में बालू उपलब्ध हो जाता है। आरोप है कि इसी का फायदा उठाकर ट्रैक्टरों के माध्यम से लगातार बालू का उठाव किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई वाहन कथित तौर पर खुलेआम बालू लेकर सड़कों से गुजरते हैं। इसके बावजूद घाट पर नियमित प्रशासनिक निगरानी नहीं होने से कारोबार बढ़ता जा रहा है।
एनजीटी नियमों की अनदेखी का आरोप
स्थानीय लोगों ने बालू उठाव के दौरान राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों की अनदेखी किए जाने का भी आरोप लगाया है। ग्रामीणों के मुताबिक, नदी से अनियंत्रित तरीके से बालू निकाले जाने से नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण पर असर पड़ सकता है।
वहीं, यदि बालू का उठाव बिना वैध अनुमति या निर्धारित प्रक्रिया के किया जा रहा है तो इससे सरकार को राजस्व का नुकसान होने की भी आशंका है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से घाट पर तत्काल जांच अभियान चलाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बालू उठाव में लगे वाहनों की जांच के साथ यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि उनके पास वैध दस्तावेज और अनुमति है या नहीं।
स्थानीय लोगों ने अवैध खनन और परिवहन पाए जाने पर संबंधित लोगों और वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में सीओ राजाराम सिंह मुंडा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
अधिकारियों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घाट से हो रहा बालू उठाव नियमों के अनुरूप है या नहीं।

