New Delhi। NEET UG 2026 के जरिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का इंतजार कर रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अपडेटेड MBBS सीट मैट्रिक्स जारी कर दिया है। नए आंकड़ों के अनुसार देशभर में MBBS की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 1,40,214 हो गई है। जुलाई 2026 के मुकाबले इसमें 3,275 सीटों का इजाफा हुआ है।
सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में बढ़ीं सीटें
नए सीट मैट्रिक्स के मुताबिक सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सीटें अब 63,971 हो गई हैं। जुलाई में यह संख्या 63,296 थी। वहीं प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़कर 76,243 पहुंच गई है, जबकि जुलाई में 73,643 सीटें थीं।
| श्रेणी | जुलाई 2026 | सितंबर 2026 |
|---|---|---|
| सरकारी MBBS सीटें | 63,296 | 63,971 |
| प्राइवेट MBBS सीटें | 73,643 | 76,243 |
| कुल MBBS सीटें | 1,36,939 | 1,40,214 |
13 नए मेडिकल कॉलेज भी जुड़े
NMC के आंकड़ों के अनुसार देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या भी बढ़ी है। जुलाई 2026 में कुल 823 मेडिकल कॉलेज थे, जो सितंबर में बढ़कर 836 हो गए हैं। यानी इस अवधि में 13 नए मेडिकल कॉलेज जुड़े हैं। इनमें चार सरकारी और नौ प्राइवेट मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।
पिछले साल की तुलना करें तो MBBS सीटों में और भी बड़ा इजाफा हुआ है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में देश में कुल 1,27,028 MBBS सीटें थीं। अब यह संख्या 1,40,214 हो गई है। यानी एक साल में 13,186 सीटों की बढ़ोतरी हुई है।

कर्नाटक में सबसे ज्यादा MBBS सीटें
राज्यों की बात करें तो कर्नाटक 15,745 MBBS सीटों के साथ सबसे आगे है। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 14,400, तमिलनाडु में 14,299 और महाराष्ट्र में 13,249 सीटें हैं।
शीर्ष राज्यों में तेलंगाना में 10,450, राजस्थान में 8,280, गुजरात में 7,800, पश्चिम बंगाल में 7,350, मध्य प्रदेश में 6,120 और बिहार में 4,660 MBBS सीटें हैं।
NEET UG उम्मीदवारों को क्या फायदा?
MBBS सीटों में बढ़ोतरी से NEET UG 2026 उम्मीदवारों को मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए अधिक विकल्प मिल सकते हैं। सीटों की संख्या बढ़ने से कुछ कॉलेजों और कैटेगरी में कटऑफ पर भी असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, कटऑफ में बदलाव कॉलेज, राज्य, कैटेगरी और काउंसलिंग के स्तर पर अलग-अलग हो सकता है।
NMC ने मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृत सीटों से अधिक छात्रों का दाखिला नहीं लेने का निर्देश दिया है। निर्धारित क्षमता से अधिक एडमिशन को नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है और संबंधित संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। छात्रों को काउंसलिंग के दौरान अपडेटेड सीट मैट्रिक्स जरूर देखना चाहिए।

