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25 Years Under Tarpaulin: ओडिशा में 25 साल तिरपाल के नीचे जीवन, पक्के घर का इंतजार खत्म नहीं हुआ

25 Years Under Tarpaulin: ओडिशा में विकसित राज्य का सपना गरीबों के सिर पर पक्की छत से जुड़ा है। सरकार आवास योजना के तहत घर दे रही है लेकिन कई परिवार अब भी तिरपाल या टूटी झोपड़ी में गुजर-बसर कर रहे हैं। नबरंगपुर के उमरकोट ब्लॉक में 60 वर्षीय पद्मिनी माझी पिछले 25 साल से फटे तिरपाल के नीचे रह रही हैं। कोरापुट के सेमिलिगुड़ा में एक बुजुर्ग दंपति 15 साल से पक्के घर का इंतजार कर रहा है। आवेदन देने के बावजूद घर नहीं मिला। अधिकारियों ने जल्द व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है।

25 Years Under Tarpaulin: पद्मिनी माझी का 25 साल का संघर्ष

नबरंगपुर जिले के उमरकोट ब्लॉक के ढुंगियापानी गांव में पद्मिनी माझी रहती हैं। उनके घर के चारों तरफ लकड़ी की बाड़ है। सिर के ऊपर फटा तिरपाल बिछा है। दिन में उसी फांक से धूप अंदर आती है और रात में चांद-तारे दिखते हैं। यह जगह परित्यक्त है। 25 साल से यही हाल है। घर कभी भी गिर सकता है।

अकेली जिंदगी और मजदूरी

पद्मिनी के पति का कोई पता नहीं। बेटा सीमा पार रहता है। बेटी शादी के बाद अपने घर बस गई। अब उनके साथ सिर्फ यही टूटा घर है। पेट के लिए पांच किलो चावल मिलता है। भूख मिटने के बाद भी सिर पर छत का अभाव बना रहता है। उम्र के इस पड़ाव में भी वे मजदूरी करके गुजारा करती हैं। उमरकोट बीडीओ से पूछने पर कहा गया कि जल्द घर उपलब्ध कराया जाएगा।

25 Years Under Tarpaulin: सेमिलिगुड़ा में 15 साल का इंतजार

कोरापुट जिले के सेमिलिगुड़ा ब्लॉक के पाकझोला गांव में राधिका नायक और लक्ष्मण नायक रहते हैं। उनके घर की दीवारें टूट चुकी हैं। छत कमजोर हो गई है। फिर भी यही टूटा मकान उनका एकमात्र सहारा है। 15 साल से पक्का घर पाने की उम्मीद में आवेदन देते आ रहे हैं। वार्ड सदस्य से लेकर बीडीओ कार्यालय तक गुहार लगाई जा चुकी है।

आंसू सूख गए इंतजार में

राधिका और लक्ष्मण लंबे इंतजार से थक चुके हैं। उनकी आंखों के आंसू सूख गए हैं। बार-बार दरख्वास्त देने के बावजूद घर नहीं मिला। सेमिलिगुड़ा बीडीओ ने कहा है कि बहुत जल्द आवास उपलब्ध कराया जाएगा। दोनों बुजुर्ग अब भी उसी टूटे घर में दिन काट रहे हैं। बारिश और सर्दी में परेशानी बढ़ जाती है।

योजना है लेकिन घर नहीं मिला

सरकार आवास योजना चला रही है। गरीब परिवारों को पक्का घर देने का लक्ष्य रखा गया है। फिर भी कई गांवों में स्थिति दयनीय बनी हुई है। कुछ लोग तिरपाल के नीचे सो रहे हैं तो कुछ टूटी मिट्टी की झोपड़ी में। आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी लाभ नहीं मिल पा रहा। स्थानीय स्तर पर देरी की शिकायत आम है।

बारिश और गर्मी में बढ़ी मुश्किल

तिरपाल फट जाने से बारिश का पानी अंदर आ जाता है। गर्मी में धूप सीधी पड़ती है। सर्दी में ठंड से बचाव नहीं हो पाता। रात को सुरक्षा का डर भी बना रहता है। पद्मिनी ने अपनी जमा पूंजी से तिरपाल खरीदा था जो अब काम का नहीं रहा। ऐसे हालात में बुजुर्गों का जीवन और कठिन हो गया है।

25 Years Under Tarpaulin: अधिकारियों का आश्वासन

दोनों जगह के बीडीओ ने जल्द घर देने की बात कही है। उमरकोट और सेमिलिगुड़ा दोनों ब्लॉकों में मामले की जानकारी प्रशासन को है। आवेदनों पर कार्रवाई का वादा किया गया है। ग्रामीण लंबे समय से इसी आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना यह है कि वादा कितनी जल्दी पूरा होता है।

ओडिशा में आवास योजना के बावजूद कई गरीब परिवार सालों से पक्की छत के इंतजार में हैं। पद्मिनी माझी जैसे लोग 25 साल से तिरपाल के नीचे जी रहे हैं। राधिका-लक्ष्मण दंपति 15 साल से टूटे घर में गुजर-बसर कर रहे हैं। अधिकारियों ने जल्द मदद का भरोसा दिया है। योजना के लाभ समय पर पहुंचें तो इन परिवारों की तकलीफ कम हो सकती है। प्रशासन की प्राथमिकता तय करेगी कि इंतजार और कितना लंबा खिंचेगा। गरीबों के सिर पर छत का सपना अभी अधूरा है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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