Bengal Bypolls 2026छ पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस ने रविवार को नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। सबसे बड़ी बात यह रही कि पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से चुनाव नहीं लड़ेंगी। नंदीग्राम सीट के लिए पार्टी ने संचिता प्रधान को उम्मीदवार बनाया है, जबकि रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी मैदान में उतरेंगे। इसके अलावा असम की नागांव लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए टीएमसी ने अब्दुल सलाम को टिकट दिया है। गौरतलब है कि यह घोषणा ऐसे समय आई है जब पार्टी के भीतर चुनाव चिह्न को लेकर गुटबाजी भी चरम पर है। ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट के बीच “जोड़ा फूल” चिह्न पर अधिकार की लड़ाई चुनाव आयोग तक पहुंच चुकी है।
ममता बनर्जी क्यों नहीं लड़ रहीं उपचुनाव
तृणमूल कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि ममता बनर्जी नंदीग्राम उपचुनाव में हिस्सा नहीं लेंगी। यह फैसला पार्टी के बागी गुट की उस मांग के एक दिन बाद आया, जिसमें बागियों ने कहा था कि अगर बनर्जी नंदीग्राम से लड़ती हैं तो वे वहां अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। बता दें कि पंद्रह साल में यह पहला मौका होगा जब ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा से बाहर रह सकती हैं।
भवानीपुर में हार के बाद बदले समीकरण
2026 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट से भाजपा के सुवेंदु अधिकारी के हाथों करीब पंद्रह हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। इससे पहले 2021 के चुनाव में भी अधिकारी ने उन्हें नंदीग्राम सीट पर शिकस्त दी थी। नंदीग्राम सीट इसलिए खाली हुई क्योंकि दोनों सीटों से जीत दर्ज करने वाले शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर बरकरार रखते हुए नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया।
रेजीनगर सीट खाली होने की वजह
रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने यह सीट छोड़ दी थी। दरअसल हुमायूं कबीर ने हालिया विधानसभा चुनाव में रेजीनगर और नाओदा, दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी, जिसके बाद उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ी। चुनाव आयोग ने इन उपचुनावों के लिए मतदान की तारीख 6 अक्टूबर और मतगणना 9 अक्टूबर तय की है।
पार्टी के भीतर चुनाव चिह्न को लेकर घमासान
टीएमसी की यह उम्मीदवार घोषणा ऐसे समय हुई है जब पार्टी के भीतर नियंत्रण को लेकर विवाद चरम पर है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट, दोनों ही चुनाव आयोग से पार्टी के नाम और “जोड़ा फूल” चुनाव चिह्न पर अपना दावा जता रहे हैं। यह चिह्न लंबे समय से ममता बनर्जी की पहचान रहा है, जिसे उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने के बाद अपनाया था।
चुनाव आयोग ने 12 सितंबर को दोनों पक्षों की बात सुनी और बागी खेमे से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे हैं। हालांकि 16 सितंबर की नामांकन तिथि नजदीक आने के बावजूद यह विवाद अब तक अनसुलझा बना हुआ है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि नामांकन प्रक्रिया शुरू होने तक चुनाव आयोग किस गुट को पार्टी और चिह्न की मान्यता देता है।
Bengal Bypolls 2026: असम की नागांव सीट पर भी टीएमसी की दावेदारी
पश्चिम बंगाल के अलावा असम की नागांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस ने अपनी दावेदारी पेश की है। पार्टी ने शिक्षाविद अब्दुल सलाम को उम्मीदवार बनाया है, जो ढिंग कॉलेज के पूर्व उप-प्रधानाचार्य रह चुके हैं। उनका शैक्षणिक अनुभव पार्टी के लिए इस सीट पर एक मजबूत दावेदारी माना जा रहा है।
कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल और असम में होने वाले आगामी उपचुनाव तृणमूल कांग्रेस के लिए कई मायनों में अहम साबित होंगे। एक ओर पार्टी को नंदीग्राम और रेजीनगर जैसी सीटों पर नए चेहरों के सहारे जीत दर्ज करनी है, तो दूसरी ओर पार्टी के भीतर चल रहा चुनाव चिह्न विवाद भी उसकी चुनौतियों को बढ़ा रहा है। ममता बनर्जी का खुद चुनाव न लड़ने का फैसला भी कई सियासी सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग के फैसले और नामांकन प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी, जो यह तय करेंगी कि पार्टी की असली कमान किसके हाथ में रहती है।
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Sanjana Gupta
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