Top 5 This Week

Related Posts

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली घोषणापत्र से लेकर मोदी-जिनपिंग मुलाकात तक, जानें क्या रही बड़ी उपलब्धियां

BRICS Summit 2026: भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हुआ 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कई मायनों में अहम साबित हुआ है। इस सम्मेलन में समूह के सभी 11 सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जहां बहुपक्षीय चर्चाओं के साथ-साथ कई अहम द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं। भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता से जुड़ी दो सबसे बड़ी बातें सामने आती हैं, पहली ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ और दूसरी शिखर सम्मेलन से इतर हुई कूटनीतिक गतिविधियां। सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि गहरे मतभेदों के बावजूद सदस्य देशों ने 140 बिंदुओं वाले इस घोषणापत्र पर सहमति जताई, जिसमें बेहद संतुलित भाषा का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक ने भारत-चीन संबंधों को स्थिर करने की दिशा में भी एक अहम संकेत दिया। आइए इस पूरे सम्मेलन की उपलब्धियों और आगे की चुनौतियों को विस्तार से समझते हैं।

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली घोषणापत्र की सबसे बड़ी खासियत

शिखर सम्मेलन में सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही सदस्यों के बीच तीखे मतभेदों को सुलझाकर 140 बिंदुओं वाले नई दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया जाना। जारी वैश्विक संघर्षों पर भारी असहमति के बावजूद इस दस्तावेज में इतनी संतुलित भाषा का इस्तेमाल किया गया कि किसी भी देश का नाम सीधे आरोपी के रूप में नहीं लिया गया, जिससे विरोधी रुख रखने वाले सदस्य देश भी इसे स्वीकार कर सके। इसी घोषणापत्र के जरिए 2027 की अध्यक्षता के लिए चीन के नाम पर भी सहमति बनाई गई।

पहलगाम हमले की हुई कड़ी निंदा

भारत के लिए इस सम्मेलन का एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू रहा पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले का उल्लेख। पिछले साल के रियो घोषणापत्र के उलट, इस बार नई दिल्ली घोषणापत्र में इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई, जिसमें 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए हमले का जिक्र करते हुए बताया गया कि इसमें 26 लोगों की जान गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर भी बिना किसी पक्ष का नाम लिए चिंता व्यक्त की गई, क्योंकि ईरान और यूएई दोनों अब ब्रिक्स सदस्य बन चुके हैं और इस संघर्ष से सीधे प्रभावित हैं।

मोदी-जिनपिंग मुलाकात ने दिया स्थिरता का संकेत

इस शिखर सम्मेलन की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक। यह मुलाकात 2020 में गलवान घाटी की झड़प के बाद बिगड़े भारत-चीन संबंधों को स्थिर करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। दोनों पक्षों ने व्यापार, व्यावसायिक रिश्तों, आपूर्ति श्रृंखला और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई क्षेत्रों पर चर्चा की, साथ ही सीमाओं पर शांति बनाए रखने के महत्व को भी दोहराया गया।

निरंतरता तंत्र का नया प्रस्ताव

भारत ने ब्रिक्स के भीतर एक पुरानी समस्या को हल करने की भी कोशिश की, जिसके तहत एक अध्यक्षता के दौरान शुरू की गई पहलें अगली अध्यक्षता में अपनी गति खो देती थीं। इसे दूर करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने ‘ब्रिक्स निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र’ का प्रस्ताव रखा, जिसके तहत निवर्तमान, वर्तमान और नए अध्यक्ष देशों की त्रयी मिलकर प्रगति पर नजर रखेगी। इस प्रस्ताव की असली परीक्षा तब होगी जब 2027 की अध्यक्षता चीन को सौंपी जाएगी।

2021 और 2026 की अध्यक्षता में बड़ा अंतर

भारत की 2021 और 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता में तीन बड़े अंतर देखने को मिलते हैं। सबसे पहले समूह का आकार बदल चुका है, 2021 में सिर्फ पांच सदस्य देश थे, जबकि अब 11 सदस्य और 10 भागीदार देश शामिल हो चुके हैं। दूसरा, 2021 का सम्मेलन कोविड महामारी के चलते ऑनलाइन हुआ था, जबकि 2026 में भारत ने 30 शहरों में 350 से अधिक बैठकों की सफल मेजबानी की। तीसरा, ब्रिक्स सदस्यों के साथ भारत का व्यापार 2020-21 के 203 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 417 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

BRICS Summit 2026: क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट में अभी भी बाकी है काम

सम्मेलन में भुगतान प्रणालियों को सुव्यवस्थित करने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई, लेकिन समूह के पास अभी राष्ट्रीय मुद्राओं में सीमा पार व्यापार के लिए कोई चालू प्रणाली मौजूद नहीं है। भारत ने ब्रिक्स देशों की तेज-भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं के बीच तालमेल बढ़ाने की वकालत की। हालांकि सदस्यों के बीच अलग-अलग विनिमय दर व्यवस्थाओं और बैंकिंग नियमों के चलते इसे लागू करना अभी भी काफी जटिल बना हुआ है, और ब्रिक्स की साझा मुद्रा जैसी बातें फिलहाल महज चर्चा तक ही सीमित हैं।

कुल मिलाकर, भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता ने समूह को नेताओं के बयानों से आगे बढ़ाकर व्यावहारिक सहयोग की दिशा में ले जाने की कोशिश की है। नई दिल्ली घोषणापत्र, मोदी-जिनपिंग मुलाकात और निरंतरता तंत्र जैसी पहलें इस अध्यक्षता की बड़ी उपलब्धियां मानी जा रही हैं। हालांकि अब असली चुनौती इन महत्वाकांक्षी योजनाओं को जमीन पर उतारने की है, जिसके लिए भुगतान प्रणालियों को जोड़ना, छोटे उद्योगों के लिए वित्तीय सुविधा बढ़ाना और आने वाले अध्यक्ष देशों के दौरान वास्तविक सहयोग को आगे बढ़ाना जरूरी होगा।

Read More Here:- 

Reporter TV दफ्तर में पुलिस कार्रवाई पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने जताई आपत्ति

Kal Ka Mausam 17 September: 20 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 80 की रफ्तार से चलेंगी तूफानी हवाएं

Honda Livo 110 की 5 खूबियां, ऑफिस-कॉलेज वालों के लिए क्यों है ये कम्यूटर बाइक

Amit Shah: UCC पर अमित शाह का बड़ा दांव, टीडीपी-शिवसेना साथ, नीतीश की जेडीयू ने क्यों दिखाई तल्खी?

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

वोटिंग जानकारी लोड हो रही है...
Sanjna Gupta
Sanjna Guptahttp://newsmediakiran.com
Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles