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Chhattisgarh News: झीरम घाटी नरसंहार मामले में बड़ा फैसला, NIA कोर्ट ने 10 दोषी माओवादियों को सुनाई मौत की सजा

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नरसंहार मामले में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। एनआईए की विशेष अदालत ने इस मामले में दोषी पाए गए 10 माओवादियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। बुधवार शाम करीब पांच बजे विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने यह फैसला सुनाया, जिसके बाद पूरे इलाके में एक बार फिर उस खौफनाक हमले की यादें ताजा हो गईं।

गौरतलब है कि 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था, जिसमें छत्तीसगढ़ के कई बड़े कांग्रेसी नेताओं समेत कुल 32 लोगों की जान चली गई थी। इस भीषण हमले ने देशभर की राजनीति को झकझोर कर रख दिया था, और वर्षों की सुनवाई के बाद अब पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

Chhattisgarh News: क्या था झीरम घाटी नरसंहार

25 मई 2013 का वह दिन छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है। उस दिन कांग्रेस पार्टी की परिवर्तन यात्रा पर दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में माओवादियों ने सुनियोजित तरीके से घात लगाकर हमला बोला था। इस हमले में पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व विधायक उदय मुदलियार और योगेंद्र शर्मा सहित कुल 32 लोगों की मौत हो गई थी। यह हमला उस समय देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में से एक माना गया था।

पांच सितंबर को हुआ था दोषी करार

इस मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने पांच सितंबर को अपने फैसले में कुल दस माओवादियों को दोषी ठहराया था। दोषी करार दिए गए इन आरोपियों में प्रमिला मोडियाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मांडवी, मड़कामी देवा, कोसा कवासी, आयत मरकाम, बंजामी सेना, चैतू लेकाम, जोगा मड़कामी और महादेव नागा शामिल हैं। अदालत ने इन सभी को कुल सात अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी पाया था, जिसके बाद सजा का ऐलान बुधवार को किया गया।

जगदलपुर जेल में बंद हैं सभी दोषी

फिलहाल सभी दोषी जगदलपुर स्थित केंद्रीय कारागार में बंद हैं, जहां से उन्हें सजा सुनाए जाने के लिए अदालत में पेश किया गया। सजा के ऐलान के दौरान अभियुक्तों के परिजन भी अदालत परिसर के बाहर मौजूद रहे। बीजापुर और दंतेवाड़ा जैसे दूरदराज के इलाकों से भी कुछ स्वजन इस अहम फैसले को सुनने के लिए जगदलपुर पहुंचे थे, जो इस मामले को लेकर लोगों की गहरी दिलचस्पी को दर्शाता है।

विशेष न्यायाधीश ने सुनाया फैसला

बुधवार शाम करीब पांच बजे विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने अदालत कक्ष में मृत्युदंड की सजा का ऐलान किया। लंबी सुनवाई और गहन जांच के बाद आया यह फैसला झीरम घाटी नरसंहार के पीड़ित परिवारों के लिए एक बड़ी राहत की तरह देखा जा रहा है, जो वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहे थे। यह मामला अपनी जटिलता और गंभीरता के चलते वर्षों तक अदालती प्रक्रिया से गुजरता रहा।

देश की राजनीति पर पड़ा था गहरा असर

झीरम घाटी नरसंहार ने न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया था। इस हमले में मारे गए नेताओं में से कई राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, और उनकी अचानक हुई मौत ने कांग्रेस पार्टी को गहरा आघात पहुंचाया था। इस घटना के बाद राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों को और तेज किया गया था, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

Chhattisgarh News: आगे की कानूनी प्रक्रिया

हालांकि मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी यह मामला यहीं समाप्त नहीं होता। दोषी करार दिए गए माओवादियों के पास उच्च न्यायालय और आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय तक अपील करने का कानूनी अधिकार सुरक्षित रहता है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले समय में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या यह फैसला उच्च अदालतों में भी बरकरार रहता है।

कुल मिलाकर, झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए कोर्ट का यह फैसला एक दशक से अधिक समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आया है। दस माओवादियों को मिली मृत्युदंड की सजा पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की एक बड़ी जीत मानी जा रही है, हालांकि आगे की अपील प्रक्रिया अभी बाकी है। इस फैसले से छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की खौफनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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